मुजफ्फरनगर। जिले में 48 में दो दर्जन लोगों को पुलिस सुरक्षा को लेकर मिले गनर हटाने की तैयारी चल रही है।
आरटीआई कार्यकर्ता सुमित मलिक मलिक ने आरटीआई के जरिए पूछा है कि मुजफ्फरनगर के 49 लोगों को पुलिस सुरक्षा प्रधान की गई है उनमें से 26 महानुभावों को निशुल्क सुरक्षा प्रदान की गई है आरटीआई के माध्यम से 7 फरवरी 2026 में जानकारी प्राप्त हुई सूचना मांगने पर सुरक्षा लेने वाले व्याक्तियों के नाम पुलिस विभाग के द्वारा नहीं खोले गए नाम से कोई भी गोपनीयता भंग नहीं होती। कुछ लोगों को ऐसे भी सुरक्षा दे रखी है जिस पर कोई भी पद नहीं है। उनकी भी गंभीरता से गोपनीय जांच करने की कृपा करें आम जनता को पूछने का अधिकार है। लखनऊ से ही जांच करने की कृपा करें हर एक व्यक्ति की सुरक्षा कर्मियों के वर्तमान स्थिति सच्चाई का खुलासा हो सके ताकि सही और गलत का पता चल सके। उन्होंने कहा कि पुलिस महानिदेशक महोदय पर आम जनता को पूरा विश्वास है आम नागरिक सुरक्षित महसूस कर रहा है। लेकिन फिर कुछ लोग अपना स्टेटस बनाने के चक्कर मे पब्लिक को दिखाने के लिए पुलिस सुरक्षा लेकर घूम रहे हैं तथा इंस्टाग्राम पर रील बनाकर पोस्ट कर रहे हैं। इससे पुलिस विभाग की गरिमा को ठेस पहुंचाया जा रहा है। आम जनता मे गलत मैसेज जा रहा है इस पर रोक लगनी अति आवश्यक है। जब मुख्यमंत्री सरकार में पॉलीटिकल व्यक्ति आम लोगों को दिखाने के चक्कर में पुलिस की सुरक्षा का दुरुपयोग कर रहा है।सच्चाई को जानने के लिए लखनऊ उच्च अधिकारियों की एक टीम के माध्यम से गोपनीय जांच कराने मांग की गई है ताकि सच्चाई का खुलासा हो सके जिन जिन लोगों ने पुलिस सुरक्षा कर्मियों को सैलरी के आधार पर ले रखे है उनका सरकार को कोई भी पूरा पेमिट नही करता। इसकी भी जांच करने की कृपा करें। इस प्रकरण को गंभीरता से गहनता से जांच कराने की कृपा करें।


