मुजफ्फरनगर। सावन के पावन महीने में शुरू होने जा रही कांवड़ यात्रा से पहले शहर के मीनाक्षी चौक पर लगने वाले एक पारंपरिक कांवड़ सेवा शिविर को लेकर विवाद के कारण धरने पर प्रशासन के अधिकारियों के आश्वासन पर धरना खत्म हो गया। वरिष्ठ पत्रकार अंकुर दुआ के खिलाफ दर्ज फर्जी मुकदमे को भी वापस लेने पर सहमति बनी।
प्रशासन का तर्क था कि यह शिविर सड़क पर अतिक्रमण कर रहा है, जिससे यातायात बाधित होगा। इसलिए इसे 5 फीट पीछे खिसकाया जाए। वहीं, शिविर संचालकों का कहना था कि यह शिविर पिछले 25-30 वर्षों से इसी स्थान पर इसी तरह लगता आ रहा है।
मामले को बढ़ता देख स्थानीय प्रशासन के आला अधिकारियों (एसपी सिटी, सीओ सिटी और सिटी मजिस्ट्रेट) के साथ राज्य मंत्री कपिल देव अग्रवाल भी मौके पर पहुंचे। राज्य मंत्री की मध्यस्थता और समझाने-बुझाने के बाद कांवड़ संचालक शिविर को 5 फीट पीछे लगाने के लिए राजी हो गए।
तनाव के बीच बुलेटिन संपादक पर मुकदमा दर्ज
इस पूरे विवाद के बीच ‘मुजफ्फरनगर बुलेटिन’ के संपादक अंकुर दुआ भी कांवड़ संचालकों के समर्थन में मौके पर पहुंचे थे। इस दौरान दिए गए एक बयान को लेकर पुलिस ने उन पर बड़ी कार्रवाई की है। सहायक पुलिस अधीक्षक (नगर) श्री सिद्धार्थ के. मिश्रा के अनुसार, मीनाक्षी चौक जैसे संवेदनशील क्षेत्र में धार्मिक वैमनस्य फैलाने के उद्देश्य से एक विवादित टिप्पणी की गई थी, जिससे दो समुदायों के बीच सांप्रदायिक सौहार्द बिगड़ने की स्थिति पैदा हुई।
पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी संपादक अंकुर दुआ के खिलाफ थाना सिविल लाइंस में मु0अ0सं0-177/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 353(2) के अंतर्गत मुकदमा पंजीकृत किया है। पुलिस विवाद से जुड़े सभी वीडियो और साक्ष्यों की गहनता से जांच कर रही है। मुकदमा दर्ज होने की सूचना मिलते ही संपादक अंकुर दुआ मीनाक्षी चौक पर ही धरने पर बैठ गए। उनके धरने की खबर फैलते ही बड़ी संख्या में स्थानीय व्यापारी, किसान नेता और विभिन्न सामाजिक संगठनों के लोग समर्थन में पहुंच गए।
उन्होंने खुलेआम आरोप लगाया कि उन पर यह मुकदमा पूरी तरह से राज्य मंत्री के इशारे पर दर्ज कराया गया है। इस दौरान व्यापारी संगठनों ने पुलिस कार्रवाई के विरोध में कल (16 जुलाई को) मुजफ्फरनगर बंद रखने का ऐलान कर दिया। शाम होते होते धरना स्थल पर पहुंचे सिटी मजिस्ट्रेट व सीओ सिटी के ऐलान पर धरना समाप्त हो गया है।


