मुजफ्फरनगर । बीजेपी से केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान और समाजवादी पार्टी से हरेंद्र मलिक के बीच टक्कर को बसपा के दारा सिंह प्रजापति को मैदान में उतार कर बीजेपी की राह मुश्किल कर दी है? मायावती और अखिलेश की सभा के बाद भी मुस्लिम का रुझान अभी तक समाजवादी पार्टी पर है। दूसरी ओर दो बार सांसद रहने के बाद कुछ खूबियों के बावजूद राजपूत और पिछड़ा वर्ग समेत तमाम दूसरे वर्गों में नाराजगी भाजपा की मुसीबत बनी है। सरधना क्षेत्र में राजपूत समाज की महापंचायत में एक बार फिर भाजपा के बायकाट की घोषणा के बाद इस पर नजर रहेगी कि करीब डेढ़ लाख राजपूत समाज में से कितनी वोट भाजपा बचाए रख पाती है।
2019 के चुनाव में भाजपा उम्मीदावार के रूप में संजीव बालियान की रालोद के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी अजित सिंह से टक्कर हुई थी। तब इस सीट पर बसपा का कोई उम्मीदवार यहां से चुनाव नहीं लड़ा था, मगर इस बार बसपा के प्रत्याशी हैं तो भाजपा को दलित वोटों का नुकसान हो सकता है। ‘2019 के लोकसभा चुनाव में संजीव बालियान ने मात्र 6 हजार वोटों से जीत हासिल की थी। संजीव बालियान को जिताने के पीछे सबसे बड़ा कारण दलित वोटों का था। दलित वोट भारी संख्या में भाजपा के साथ चले गए। पर इस बार समीकरण बदला नजर आ रहा है। बसपा ने यहां से प्रत्याशी को मैदान में उतार दिया तो माना जा रहा है कि भाजपा को पिछले बार के मुकाबले इस बार दलित वोटों का नुकसान हो सकता है।’ 2019 के चुनाव में भाजपा के संजीव बालयान को 5 लाख 73 हजार 780 वोट मिले थे। वहीं गठबंधन के प्रत्याशी अजीत सिंह को 5 लाख 67 हजार 254 वोट मिले थे। समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी हरेंद्र मलिक 1985 खतौली, 1989, 1991 और 1996 में बुरा से विधायक रह चुके हैं। इसके अलावा 2002 से 2008 तक राज्यसभा सदस्य रहे हैं। उनके बेटे पंकज मलिक चरथावल से सपा विधायक हैं। हरेंद्र मलिक पिछली बार कांग्रेस से चुनाव लड़े थे जिसमें उन्हें महज 70 हजार वोट मिले थे। लेकिन इस बार सपा-कांग्रेस गठबंधन में हैं।
गुजरात से शुरू हुई क्षत्रिय समाज की नाराजगी यूपी तक समेत कई राज्यों में भाजपा पर भारी पड़ रही है। खुलेआम राजपूत समाज भाजपा और भाजपा के नेताओं का विरोध कर रहा है। हुआ कुछ यूं कि पिछले दिनों गुजरात के भाजपा नेता और राज्यसभा सांसद परषोत्तम रूपाला ने एक बयान दिया, जिसके बाद भाजपा के लिए सियासी परेशानियां बढ़नी शुरू हो गईं। हुआ यूं कि परषोत्तम रूपाला ने दलित वर्ग के कार्यक्रम में राजपूतों को लेकर विवादित बयान दे दिया। मीडिया रिपोर्ट की माने तो उन्होंने कहा, महाराजाओं ने अंग्रेजों से नाता जोड़ लिया था और अपनी बेटियों की शादी भी उनसे कर दी थी। उनकी ये वीडियो पूरे देश में वायरल हो गई और इसे देखने के बाद राजपूत समाज भड़क गया। दूसरी तरफ राजपूत समाज का ये भी आरोप है कि भाजपा ने उसे वैसा प्रतिनिधित्व नहीं दिया, जैसा उसे देना चाहिए था। बता दें कि गाजियाबाद सीट से जनरल वीके सिंह का टिकट काटे जाने और संगीत सोम और सुरेश राणा की विधानसभा चुनाव में पराजय से भी राजपूत समाज भाजपा से नाराज है। इसके लिए वे जाट समाज को जिम्मेदार मानते हैं। उत्तर प्रदेश में जगह-जगह राजपूतों की बैठक और पंचायतों में भाजपा का विरोध और बहिष्कार किया जा रहा है।


