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मुजफ्फरनगर ओटिज्म प्रभावित बच्चों के लिए आगे आई नगरपालिका अध्यक्ष मीनाक्षी स्वरूप

सीएमओ से मुलाकात कर उपचार, जागरूकता और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं पर हुई विस्तृत चर्चा

मुजफ्फरनगर। ओटिज्म से प्रभावित बच्चों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं दिलाने और उनके प्रति समाज में जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से नगरपालिका परिषद की अध्यक्ष मीनाक्षी स्वरूप ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। इसी क्रम में उन्होंने ओटिज्म जागरूकता अभियान से जुड़ी संस्था के पदाधिकारियों और बच्चों के अभिभावकों के साथ जिला चिकित्सालय पहुंचकर मुख्य चिकित्सा अधिकारी से मुलाकात की। इस दौरान ओटिज्म से प्रभावित कई बच्चे भी उपस्थित रहे।

नगरपालिका अध्यक्ष मीनाक्षी स्वरूप ने कहा कि ओटिज्म से प्रभावित बच्चों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ना हम सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि ऐसे बच्चों को विशेष देखभाल, सही उपचार और सकारात्मक वातावरण की आवश्यकता होती है। नगर पालिका स्तर पर भी जागरूकता अभियान चलाकर लोगों को इस विषय में जानकारी देने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने कहा कि हर बच्चे को बेहतर जीवन जीने का अधिकार है। यदि समय पर पहचान और उपचार मिले तो ओटिज्म प्रभावित बच्चे भी अपनी प्रतिभा के दम पर आगे बढ़ सकते हैं। समाज को इनके प्रति संवेदनशील होने की जरूरत है। उन्होंने बताया कि इस बैठक में बच्चों के उपचार, नियमित स्वास्थ्य जांच, विशेष चिकित्सकीय परामर्श और समाज में जागरूकता बढ़ाने को लेकर विस्तार से चर्चा की गई। साथ ही यह भी विचार किया गया कि जिले में ऐसे बच्चों को समय रहते पहचान और उचित मार्गदर्शन कैसे उपलब्ध कराया जाए, ताकि उनका जीवन बेहतर बनाया जा सके।

बैठक के दौरान ऑटिज्म जागरूकता अभियान में सक्रिय भूमिका निभा रहीं डॉ. नमिता का परिचय मुख्य चिकित्सा अधिकारी से कराया गया। डॉ. नमिता ने कहा कि ओटिज्म कोई बीमारी नहीं, बल्कि एक न्यूरो-डेवलपमेंटल स्थिति है, जिसमें बच्चों के व्यवहार, संवाद और सामाजिक गतिविधियों पर प्रभाव पड़ता है। उन्होंने कहा कि शुरुआती अवस्था में पहचान और थेरेपी के माध्यम से बच्चों के विकास में सकारात्मक सुधार संभव है। डॉ. नमिता ने कहा कि हमारा प्रयास है कि मुजफ्फरनगर में अधिक से अधिक परिवारों तक सही जानकारी पहुंचे और प्रभावित बच्चों को बेहतर चिकित्सकीय सहायता एवं प्रशिक्षण उपलब्ध हो सके।

मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. सुनील तेवतिया ने भी इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि स्वास्थ्य विभाग ओटिज्म प्रभावित बच्चों के उपचार और परामर्श के लिए हर संभव सहयोग देगा। उन्होंने कहा कि जिला चिकित्सालय में विशेषज्ञ चिकित्सकों की मदद से बच्चों को बेहतर सुविधा उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा। समय पर जांच और सही मार्गदर्शन से ऐसे बच्चों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है। गौरतलब है कि ओटिज्म एक ऐसी स्थिति है, जिसमें बच्चों के सीखने, बोलने, व्यवहार और सामाजिक संपर्क की क्षमता प्रभावित हो सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार यदि शुरुआती स्तर पर इसकी पहचान हो जाए तो विशेष शिक्षा, थेरेपी और परिवार के सहयोग से बच्चों के विकास में काफी सुधार संभव है। इस पहल को जिले में ओटिज्म प्रभावित बच्चों और उनके परिवारों के लिए नई उम्मीद के रूप में देखा जा रहा है।

Taja Report
Author: Taja Report

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