मुजफ्फरनगर। मुजफ्फरनगर की फास्ट टेक कोर्ट के न्यायाधीश रवि दिवाकर कोर्ट ने चार और कातिलों को मृत्युदंड की सजा सुनाई है। इन आरोपियों ने 12 साल पहले भभीसा गांव में फायरिंग कर पवन सिंह की हत्या कर दी थी, जबकि उसके भाई के घायल कर दिया था। हत्याकांड में शामिल रहा एक आरोपी पुलिस मुठभेड़ में मारा जा चुका है, जबकि दूसरे के फरार होने के कारण उसकी फाइल विरक्त कर दी गई थी।
14 जुलाई 2014 को यह हत्याकांड शामली जिले के कांधला थाना क्षेत्र के भभीसा गांव में हुआ था। कार में सवार होकर आए हमलावरों ने अशोक कुमार के घर में घुसकर अंधाधुंध फायरिंग कर दी थी, जिसमें अशोक घायल हो गया था, जबकि उसके भाई पवन कुमार की मौत हो गई थी। इस हत्याकांड में विपुल उर्फ खूनी समेत आठ लोगों को आरोपी बनाया गया था। पुलिस ने विवेचना के बाद आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी थी। कोर्ट ने साक्ष्यों के आधार पर शामली के पीरखेड़ा निवासी रामवीर, बड़ौत के रामनगर निवासी राजीव उर्फ छोटू, भभीसा निवासी राहुल उर्फ बोसी और कांजरहेड़ी निवासी हरेंद्र कुमार पर दोषी करार दिया था।
शासकीय अधिवक्ता कुलदीप कुमार ने बताया कि कोर्ट ने 12 साल पहले हुए पवन कुमार हत्याकांड में बृहस्पतिवार को अपना फैसला सुनाया। अपर सत्र न्यायाधीश एवं त्वरित न्यायालय संख्या-3 के पीठासीन अधिकारी रवि कुमार दिवाकर ने चार आरोपियों को फांसी की सजा सुनाई। उन्होंने बताया कि एक आरोपी विपुल उर्फ खूनी बागपत पुलिस से हुई मुठभेड़ में मारा गया था।


