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AI से नौकरियों पर खतरा नहीं : डॉ सिद्दीकी

लंढौरा (हरिद्वार)। डेवलपमेंट कम्युनिकेशन और समुदाय से संपर्क अभियान के अंतर्गत ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी के प्रोफेसरों और मीडिया स्टडीज के स्टूडेंट्स ने चमन लाल महाविद्यालय में छात्रों को AI के इस्तेमाल, कैनवा के जरिए डिजाइनिंग और क्रिएटिव राइटिंग के गुर सिखाए। इस टीम को लीड कर रही प्रोफेसर ताहा सिद्दीकी ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस किसी नौकरी के लिए कोई खतरा नहीं है, बशर्ते कि समय रहते सभी इस टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल के तौर-तरीके ठीक तरह से सीख लें।

चमन लाल महाविद्यालय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी के मीडिया स्टडीज विभाग के सहयोग से विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया। मुख्य वक्ता के रूप में ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी के मास कम्युनिकेशन विभाग की अध्यक्ष डॉ. ताहा सिद्दीकी ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में डेटा महत्वपूर्ण है, सही जानकारी होना आवश्यक है। सूचना के स्रोत पर भी ध्यान देने की आवश्यकता है। इसमें समाचार पत्र, टीवी, रेडियो, वेबसाइट, ट्विटर, यूट्यूब, व्हाट्सएप, टेलीग्राम इत्यादि शामिल हैं। उन्होंने बताया कि गूगल प्रति सेकंड 70 हजार सूचनाओं की खोज करता है। हर मिनट यूट्यूब पर 500 घंटे का वीडियो अपलोड किया जाता है।

इन सबके बीच भ्रामक सूचनाओं से सावधान रहना होगा। सूचना का सही स्रोत पता होना जरूरी है। फेक न्यूज़, बच्चों के अपहरण के गलत वीडियो डाल देना—इस प्रकार के भ्रामक पोस्ट से भी स्वयं को अलग रखने की जरूरत है। डॉ ताहा सिद्दीकी ने कहा कि सूचना के स्रोत कई प्रकार हो सकते हैं—विज्ञापन, प्रोपेगेंडा आदि। विश्वसनीयता जरूरी है कि जानकारी के पीछे कौन है। प्रमाणिकता के पैमाने पर हम गूगल रिवर्स इमेज सर्च की सहायता ले सकते हैं।

उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) हमारे जीवन शैली में शामिल हो गया है। AI से पेपर वर्क और ड्राफ्टिंग का काम आसान हुआ है, लेकिन कुछ नौकरियों का नुकसान भी हुआ है, साथ ही कुछ नौकरियों का निर्माण भी हुआ है। इसलिए नौकरियों का संतुलन बना रहेगा। डिजिटल इंडिया और ऑनलाइन कोर्सेज से शिक्षा के क्षेत्र का दायरा बढ़ा है। साथ ही नए अवसर भी प्राप्त हुए हैं तथा तकनीकी का क्षेत्र भी विस्तृत हुआ है।

वर्कशॉप के दूसरे चरण में डॉ. हिमानी बिंजोला और डॉ. संदीप भट्ट के निर्देशन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजाइन विद कैनवा और क्रिएटिव राइटिंग पर समानांतर सत्र आयोजित किए गए। मुख्य कार्यक्रम और समानांतर सत्रों में लगभग 300 से अधिक छात्र-छात्राओं ने प्रतिभाग किया। छात्र-छात्राओं को प्रशिक्षित करने में डोल्मा पासिंग, कार्तिक, अमन, अनुकृति और वृद्धि ने विशेष भूमिका निभाई।

वर्कशॉप के आरंभ में महाविद्यालय प्रबंध समिति के अध्यक्ष रामकुमार शर्मा एवं कोषाध्यक्ष अतुल हरित ने इस प्रकार के कार्यक्रम की सराहना की और इसे छात्र-छात्राओं के लिए उपयोगी बताया। महाविद्यालय प्राचार्य डॉ. सुशील उपाध्याय ने अपने संबोधन में कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से कार्य आसान तो हुआ है, लेकिन सावधान रहने की भी आवश्यकता है। महाविद्यालय के लिए यह एक उल्लेखनीय अवसर है, जब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर कार्यशाला में छात्र-छात्राओं को बहुत कुछ सीखने को मिला। आइक्यूएसी की समन्वयक डॉ. दीपा अग्रवाल ने कहा कि प्रतिष्ठित संस्थानों के छात्र-छात्राओं द्वारा ग्रामीण इलाके के संस्थानों का भ्रमण तथा लोकल कम्युनिटी के साथ इंवॉल्व होने से एक साझी संस्कृति का निर्माण होगा।

कार्यक्रम समन्वयक डॉ. दीपा अग्रवाल एवं डॉ. ऋचा चौहान ने सभी अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापित किया। इस अवसर पर महाविद्यालय के समस्त शिक्षक एवं गैर-शिक्षक कर्मचारियों ने भी प्रतिभाग किया और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर आधारित टिप्स की जानकारी भी प्राप्त की।

 

विदेशी छात्रों को भाया गांव

लंढौरा। छात्रों के दल के साथ महाविद्यालय पहुंची तंजानिया की छात्रा मेरी और साउथ सूडान के एंटनी ने पहली बार भारत का ग्रामीण इलाका देखा। मेरी ने स्थानीय छात्राओं की नृत्य प्रस्तुति में विशेष रुचि दिखाई जबकि एंटनी ने स्थानीय दृश्यों को अपने कैमरे में कैद किया।

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Author: Taja Report

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