17 जुलाई से आरम्भ होगा चातुर्मास-ठहर जाएंगे सभी मांगलिक आयोजन
चातुर्मास देवशयनी एकादशी से लेकर देवउठनी एकादशी तक के समय को कहा जाता है।
ये समय साधना का समय होता है. इसमें श्रीहरि की उपासना करनी चाहिए. इस बीच आप विशेष अनुष्ठान, मंत्र जाप, गीता का पाठ आदि कर सकते हैं।
चातुर्मास में दान-पुण्य का विशेष महत्व बताया गया है. इस बीच धन, वस्त्र, छाता, चप्पल और अन्न का दान आदि करें. इससे आपकी तमाम समस्याएं दूर होंगी।
चातुर्मास के दौरान एक संयमित जीवन जीने का अभ्यास करें. सुबह जल्दी उठें और रात को जल्दी सोएं. सादा भोजन करें और समय पर भोजन करें. वाणी को संयमित रखें।
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*(चातुर्मास में क्या नहीं करें)*
चातुर्मास में विवाह संस्कार, मुंडन, गृह प्रवेश आदि शुभ व मांगलिक कार्यक्रम नहीं किए जाते।
पलंग व बिस्तर पर नहीं सोना चाहिए। साथ ही किसी प्रकार का क्रोध ना करें और संयम का पालन करें।
चातुर्मास में ब्रजधाम को छोड़कर अन्य जगहों की यात्रा नहीं करनी चाहिए।
बाल व दाढ़ी नहीं करवानी चाहिए। इस समय कटु वचन, झूठ बोलना, अनर्गल बातें का त्याग करना चाहिए।
चातुर्मास में तेल से बनी चीजें, बैंगन, पत्तेदार सब्जियां, मसालेदार भोजन, अचार, बेल, मूली, दूध, दही, शक्कर, मिठाई, सुपारी, मांस मदिरा आदि चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए।
चार माह में से कम से कम दो माह एक ही स्थान पर रहना चाहिए। साथ ही कपड़े व आभूषण नहीं खरीदने चाहिए।

