मुजफ्फरनगर। पुलिस अधीक्षक ग्रामीण के नेतृत्व में तितावी पुलिस व एसओजी देहात की बड़ी कार्रवाई, फैक्ट्री में कैद 12 श्रमिकों को कराया मुक्त, 02 आरोपी गिरफ्तार कर लिए।विभिन्न राज्यों के श्रमिकों को नौकरी, वेतन, भोजन व रहने की सुविधा का प्रलोभन देकर फैक्ट्री में लाया गया, नौकरी और अच्छे वेतन का सपना दिखाकर बनाया बंधुआ मजदूर, दिन में एक बार सूखी रोटी देकर 24 घण्टे कराया जाता था काम, वेतन मांगने एवं बाहर जाने की बात पर मारपीट की जाती थी।
एसएसपी संजय कुमार वर्मा ने बताया कि थाना तितावी पुलिस को सूचना प्राप्त हुई कि थाना क्षेत्र के ग्राम मांडी स्थित एक फैक्ट्री में कुछ कर्मचारियों को अवैध रूप से बंधक बनाकर रखा गया है तथा उनसे जबरन कार्य कराया जा रहा है। सूचना प्राप्त होते ही मामले को गंभीरता से लेते हुए उच्चाधिकारीगण को अवगत कराया गया। पुलिस अधीक्षक ग्रामीण श्अक्षय संजय महाडीक के निर्देशन व क्षेत्राधिकारी फुगाना श्री विश्वजीत सिंह के पर्यवेक्षण में तत्काल विशेष टीमों का गठन किया गया, जिसमें थाना तितावी पुलिस, एसओजी देहात टीम, सहायक श्रम आयुक्त श्री देवेश सिंह, तहसीलदार श्री राधेश्याम गौड़ की संयुक्त टीम शामिल रही। पुलिस अधीक्षक ग्रामीण द्वारा स्वयं सम्पूर्ण ऑपरेशन की निगरानी एवं नेतृत्व किया गया। संयुक्त टीम द्वारा ग्राम मांडी स्थित फैक्ट्री पर योजनाबद्ध तरीके से छापेमारी की गई, जहां से 12 श्रमिकों को मुक्त कराया गया। मुक्त कराए गए श्रमिक बिहार, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, छत्तीसगढ़, हरियाणा एवं राजस्थान राज्यों के निवासी हैं तथा कुछ नाबालिग भी है। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि इन श्रमिकों को विगत लगभग एक से डेढ़ वर्ष से फैक्ट्री में बंधक बनाकर रखा गया था। पुलिस टीम द्वारा मौके से 02 अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया तथा अन्य संबंधित व्यक्तियों की तलाश एवं विवेचनात्मक कार्यवाही की जा रही है।
*घायल/गिरफ्तार अभियुक्तगण का नाम/पता-*
*1-* शिवा त्यागी पुत्र मनोज त्यागी निवासी उकावली थाना बुढाना, मुजफ्फरनगर ।
*2-* प्रदीप बालियान पुत्र राजवीर निवासी मांडी थाना तितावी, मुजफ्फरनगर ।
*वांछित अभियुक्त का नाम/पता-*
*1-* अकिंत बालियान पुत्र प्रदीप बालियान निवासी मांडी थाना तितावी, मुजफ्फरनगर ।
मुक्त कराए गए श्रमिकों ने पूछताछ में बताया कि उन्हें रोजगार दिलाने के नाम पर 10 से 12 हजार रुपये प्रतिमाह वेतन, भोजन एवं रहने की सुविधा का लालच देकर यहां लाया गया था। परंतु यहां आने के बाद उन्हें कोई वेतन नहीं दिया गया। उनसे लगातार कठोर श्रम कराया जाता था तथा दिन में केवल एक बार सूखी रोटी खाने को दी जाती थी। उन्हें फैक्ट्री परिसर से बाहर जाने की अनुमति नहीं थी और यदि कोई व्यक्ति बाहर जाने अथवा अपने वेतन की मांग करता था तो शिवा व अंकित द्वारा उनके साथ बेरहमी से रॉड व डंडो से मारपीट की जाती थी। श्रमिकों को फैक्ट्री परिसर में ही बंद रखकर 24 घण्टे कार्य कराया जाता था तथा बीमार होने पर भी किसी प्रकार की चिकित्सीय सुविधा उपलब्ध नहीं कराई जाती थी।
गिरफ्तार अभियुक्त शिवा त्यागी ने पूछताछ में बताया कि उसे फैक्ट्री संचालक अंकित बालियान द्वारा वहां रखा गया था। हम विभिन्न रेलवे स्टेशनों एवं सार्वजनिक स्थानों पर जाकर रोजगार की तलाश कर रहे मजदूरों को चिन्हित करते थे तथा उन्हें 10-12 हजार रुपये प्रतिमाह वेतन, भोजन एवं रहने की सुविधा का प्रलोभन देकर फैक्ट्री में लाते थे। उन्हें यह बताया जाता था कि केवल दोने-पत्तल बनाने का कार्य करना होगा, लेकिन फैक्ट्री पहुंचने के बाद उन्हें कोई वेतन नहीं दिया जाता था। यदि कोई श्रमिक वेतन मांगता था अथवा फैक्ट्री छोड़कर जाने का प्रयास करता था तो उसके साथ मारपीट की जाती थी तथा उसे जबरन वहीं रोककर कार्य कराया जाता था।
मुजफ्फरनगर पुलिस की इस सफल कार्रवाई से बंधुआ मजदूरी जैसे गंभीर अपराध का पर्दाफाश हुआ है तथा पीड़ित श्रमिकों को मुक्त कराकर उनके अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित की गई है।उक्त सराहनीय कार्य करने वाली पुलिस टीम को वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री संजय कुमार वर्मा द्वारा 25,000 रुपये के पुरस्कार से पुरस्कृत किया गया है।


