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सोरम में सर्वखाप महापंचायत का स्वामी ओमानंद महाराज ने किया शुभारंभ

मुजफ्फरनगर। ऐतिहासिक गॉंव सोरम में सर्वजातीय सर्वखाप महापंचायत में पहुंचकर भागवत पीठ श्री शुकदेव आश्रम के पीठाधीस्वर स्वामी ओमानंद महाराज ने कार्यक्रम का दीप प्रज्ज्वलन के साथ शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि सर्वखापों का इतिहास बहुत ही प्राचीन, गौरवशाली एवं यशस्वी रहा है। बिर्टिश शासन और मुगल आक्रांताओं की दमनकारी नीतियों के उन्मूलन में सर्वखापों ने अपनी बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभायी। देश की आजादी में सर्वखापों के वीर बलिदानियों के योगदान को कभी भी भुलाया नहीं जा सकता। गुलामी के दीर्घकाल में सर्वखापों की स्थिति लुप्त प्रायः हो गयी थी। इसकी महत्वतता को जनमानस में पुनः प्रतिष्ठापित करने के लियॆ किसान मसीहा चौ. महेन्द्र सिंह टिकैत और चौ. कबूल सिंह का बहुत ही सराहनीय योगदान है।

उन्होंने कहा कि सर्वखापों जैसे विशाल संघटन की भूमिकाओं एवं उद्देश्यों को सार्थक बनाने तथा खापों के गौरव को बढ़ाने के लियॆ सर्वखापों के सभी चौधरी और थांवेदरों को आपसी भेदभाव भुलाकर एक और नेक होना चाहियॆ, यह समय की आवश्यकता है। इससे किसानों का उत्थान होगा और समाज तथा राष्ट्र प्रगतिशील बनेगा।

इससे पूर्व गॉंव सोरम पहुंचे स्वामी ओमानंद महाराज ने यज्ञ की पूर्णाहुति कर चौधरी महेन्द्र सिंह टिकैत की प्रतिमा का अनावरण किया और चौधरी कबूल सिंह की प्रतिमा पर श्रद्धा सुमन अर्पित किये। सभा मंच पर भाकियू अध्यक्ष चौधरी नरेश टिकैत एवं प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत तथा सर्वखापों के सभी चौधरी और थांवेदरों ने स्वामी ओमानंद महाराज को शाल ओढ़ाकर सम्मानित किया। सभा को संबोधित करते हुए स्वामी ओमानंद महाराज ने कहा कि सोरम गॉंव की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि रही है, यहां चौ. कबूल सिंह और चौ. महेन्द्र सिंह टिकैत की प्रतिमा आने वाले पीढ़ियों का सदैव मार्गदर्शन करती रहेगी। उन्होंने कहा कि गॉंव एक कुटुम्ब है उसको छोटा-बड़ा, अगड़ा-पिछड़ा, ऊंच-नीच के भेदभाव में ना बांटे। विनाश की शक्ति को विकास की शक्ति में लगाएं। इससे कुटुम्ब में समता, समग्रता, संवेदनशीलता और सृजनात्मक शक्ति बढ़ेगी।

सृष्टि की एकता और जीवन की संपन्नता एवं लोकतंत्र के मेल से ही यह सधता है। इसलिये दिमाग के साथ दिल को भी बड़ा रखें।भारत माता ग्रामवासिनी है इसलिये सभी भारतीय योजनाएं भी ग्राम आधारित होनी चाहियॆ। जीव, जीवन, जीविका और जैविविधता संरक्षण की प्राकृतिक व्यवस्था ग्राम व्यवस्था से ही संभव है। किसान को ऋषि कहा जाता है। देश की अर्थव्यवस्था, खाद्यान्न व्यवस्था और सुरक्षा व्यवस्था में किसानों का बहुत बड़ा योगदान है। भारत किसान और मजदूरों की झोपड़ी में बसा है। पूज्य गुरुदेव स्वामी कल्याणदेव जी महाराज कहा करते थे। भगवान के दो बेटे हैं किसान और मजदूर। सभी इन्हीं की कमाई खाते हैं। चींटी से लेकर हाथी तक पटवारी से लेकर राष्ट्रपति तक। किसान और मजदूर दोंनो ही सदैव खेतों में, खलिहानों में, कारखानों में, सरहदों पर राष्ट्र और समाज की सेवा के लिये प्रतिबद्ध हैं।

उन्होंने कहा कि चौधरी महेन्द्र सिंह टिकैत किसानों का मुकुट, किसानों का गौरव, किसानों का प्रकाशस्तंभ थे। उनका सारा जीवन किसानों के लियॆ एक वरदान था, संजीवनी था। वह किसान और मजदूरों के सदैव प्रेरणा का स्रोत बनें रहेंगे। इस अवसर पर ट्रस्टी ओमदत्त देव, कथाव्यास अचल कृष्ण शास्त्री , रमेश मलिक, दीपक मिश्रा आदि मौजूद रहे।

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Author: Taja Report

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