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श्री राम कॉलेज फार्मास्युटिकल विभाग में दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन

मुजफ्फरनगरश्रीराम कॉलेज के सभागार मे बायोसाइंस विभाग द्वारा दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया गया। जिसमे सेमिनार का विषय श्फार्मास्युटिकल इंडस्ट्री में बायोटेक्नोलॉजी एकेडेमिया, इनोवेशन और एंटरप्राइज के बीच सेतुश् रहा।कार्यक्रम का शुभारम्भ कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डा प्रशांत कुमार शर्मा, पिसा विश्वविद्यालय इटली और डा प्रेरणा मित्तल प्राचार्या, श्रीराम कॉलेज मुजफ्फरनगर द्वारा सम्मलित रुप से दीप प्रज्जवलन करके किया गयाइस अवसर पर डा प्रशांत कुमार शर्मा द्वारा फार्मास्युटिकल इंडस्ट्री में बायोसेंसर के उपयोगउनके कार्यप्रणाली के बारे मे विद्यार्थीयो को विस्तृत जानकारी दी उन्होने घरो, अस्पतालो और दैनिक जीवन मे बायोमेडिकल उपकरणो और रेडियो फ्रिकवेंसी आधारित बायोसेंसर के बारे मे जानकारी देते हुए बताया कि ये बायोसेंसर अब विभिन्न रोगो की पहचान और उनके निदान मे महत्तवपूर्ण भूमिका निभा रहे है। आज के सेमिनार मे डा सत्य प्रकाश इंपिरियल काॅलेज लन्दन ने आनलाइन प्रतिभाग कर फार्मास्युटिकल उद्योग में बायोटेक्नोलॉजी की बढ़ती भूमिका, आधुनिक अनुसंधान, नवाचार, स्टार्टअप एवं उद्यमिता तथा उद्योगअकादमिक सहयोग की संभावनाओं पर अपने विचार साझा किएसेमिनार के प्रथम दिन विभिन्न संकाय के विद्यार्थीयो ने श्फार्मास्युटिकल इंडस्ट्री में बायोटेक्नोलॉजी एकेडेमिया, इनोवेशन और एंटरप्राइज के बीच सेतुश् विषय पर पोस्टर प्रजेनटेसन प्रस्तुत किये। पोस्टर प्रजेनटेसन मे विशाल त्यागी, किरण सैनीअंशिका त्यागी ने क्रमशः प्रथम ,द्वितीयतृतीय स्थान प्राप्त किये, निर्णायक मण्डल मे डा पूजा तोमर डीन बेसिक साइंस, डा0 श्वेता राठी विभागाध्यक्ष होम साइंसडा नईम विभागाध्यक्ष कृषि विज्ञान सम्मलित रहेइसके पश्चात डा प्रशांत कुमार शर्मा ने बायोसेंसर के बारे मे जानकारी देते हुए बताया कि बायोसेंसर एक ऐसा आधुनिक उपकरण है जो जैविक प्रतिक्रियाओं को पहचानकर उन्हें इलेक्ट्रॉनिक संकेतों में बदल देता है। यह प्रकृति के विज्ञान और इंसानी तकनीक का एक अद्भुत मेल है। इसमें एक जैविक हिस्सा होता है जैसे कोई एंजाइम, एंटीबॉडी या डीएनए जो किसी खास बीमारी या तत्व की पहचान करता है, और एक कनवर्टर होता है जो उस जानकारी को हमारे पढ़ने लायक डेटा में बदल देता हैसाथ ही साथ यह भी बताया की आज के समय में इसका सबसे बेहतरीन और आम उदाहरण है ग्लूकोमीटर। शुगर (डायबिटीज) के मरीज सिर्फ एक छोटी सी खून की बूंद को इस मशीन पर लगाते हैं और कुछ ही सेकंड में उनका ब्लड शुगर लेवल स्क्रीन परजाता है। यह कमाल बायोसेंसर के कारण ही मुमकिन हो पाया है। इसने मरीजों को बार-बार अस्पताल जाने और दर्दनाक जांचों से मुक्ति दिलाई है। सेमिनार के द्वितीय दिन विद्यार्थीयो ने पावर पाइंट प्रजेनटेसन के माध्यम से अपने विचारो को सांझा किया पावर पाइंट प्रजेनटेसन मे अकांक्षा तान्या और रिया पुण्डीर ने क्रमशः प्रथम, द्वितीयतृतीय स्थान प्राप्त किये। सभी विजेताओ को मुख्य अतिथि डा0 प्रशांत कुमार शर्मा, डा प्रेरणा मित्तलडा विनित कुमार शर्मा, द्वारा प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गयाइस अवसर पर सेमिनार मे उपस्थित डा गिरेन्द्र गौतम, निदेशक श्रीराम कॉलेज आॅफ फार्मेसी ने इस विषय पर विशेष चर्चा करते हुए कहा कि अकादमिक संस्थानों में किए जा रहे शोध को उद्योग की वास्तविक आवश्यकताओं से जोड़कर नवीन एवं उपयोगी उत्पादों और तकनीकों का विकास कैसे किया जा सकता है। भारत में भी उद्योग और अकादमिक संस्थानों के बीच सहयोग को बायोफार्मास्युटिकल अनुसंधान तथा उत्पाद विकास को आगे बढ़ाने के महत्वपूर्ण माध्यम के रूप में देखा गया है। डा स्नेह यादव द्वारा भी प्रजेनटेसन प्रस्तुत की गयी। कार्यक्रम का समापन डा विपिन कुमार सैनी विभागाध्यक्ष बायोसाइंस के द्वारा सभी का आभार व्यक्त करके किया गया। कार्यक्रम को सफल बनाने में, श्रीराम कॉलेज के प्रवक्ता डा प्रवीण मलिक, विकास त्यागी, डा बुशरा आकिल डा वरुण भारद्वाज, डा पुलकित, अंकित कुमार, जेहरा हुसैनी, सचिन कुमार, मौ सलमान,, दिव्या पाटियाल, व सुबोध कुमार का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

 

Taja Report
Author: Taja Report

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