मुजफ्फरनगर । उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल रजिस्टर्ड मुजफ्फरनगर द्वारा एक ज्ञापन ऑनलाइन की असीमित क्षेत्र में अनियमित घुसपैठ के विरोध में प्रधानमंत्री जी के नाम नगर मजिस्ट्रेट श्री विकास कश्यप को सौंपा गया। जिसका विषय निष्पक्ष प्रतिस्पर्धाएं एमएसएमई हितों ,उपभोक्ता संरक्षण की रक्षा के लिए और छोटे दुकानदारों के हितों की रक्षा के लिए, ई-कॉमर्स में भी विनीयमन अधिनियम बनाये जाने के संदर्भ में दिया गया । प्रधानमंत्री जी का ध्यान भारतीय ई-कॉमर्स उद्योग में विनायमक निरीक्षण की तत्काल आवश्यकता की ओर आकर्षित किया गया ई-कॉमर्स ने कुछ ऐसी प्रथाओं को जन्म दिया है जो निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा को खतरे में डालते हैं विशेष रूप से व्यापारी एमएसएमई खुदरा विक्रेताओं और उपभोक्ताओं को भी प्रभावित करती हैं ।
विकसित एवं आत्मनिर्भर भारत की संकल्पना को तभी पूरा किया जा सकता है जब स्थानीय उत्पादन स्थानीय व्यापार एवं स्थानीय पर्यटन को बढ़ावा दिया जाएगा जिसके लिए व्यापार मंडल सतत प्रयत्नशील है लेकिन यह ई-कॉमर्स कंपनियों कानून का उल्लंघन करते हुए उसमें बाधक बन रही हैं।
खुदरा व्यापार और एमएसएमई क्षेत्र हमारी अर्थव्यवस्था की रीड है और यह अनैतिक प्रथाओं से लगातार चुनौती का सामना कर रहा है जिन्हें अगर नियंत्रित नहीं किया गया तो यह इसके विकास व्यापार और जीडीपी में योगदान को खतरनाक रूप से प्रभावित कर सकता ह।
ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म विक्रेताओं का अनिवार्य के वाई सी किया जाना चाहिए। केवाईसी पारदर्शिता बढ़ाएगी वैध एमएसएमई की रक्षा करेगा और कर नियमों का अनुपालन सुनिश्चित करेगा।
अमेजॉन और फ्लिपकार्ट जैसी बड़ी दिग्गज ई-कॉमर्स कंपनियों ने लगातार वित्तीय घाटे की सूचना दी है उच्च बिक्री मात्रा के बावजूद यह नुकसान इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि जहां एमएसएमई और पारंपरिक खुदरा विक्रेताओं सहित छोटे प्रतिस्पर्धियों को बाहर करने के लिए उत्पादों को स्थिर दरों पर बेचा जाता है। जिस कारण भारत का छोटा खुदरा व्यापारी बेरोजगार होने के कगार पर है।
ई-कॉमर्स को थोक विक्रेताओं के रूप में कार्य नहीं करना चाहिए इससे एमएसएमई और छोटे खुदरा विक्रेता को नुकसान होता है इस तरह की कीमतों के साथ प्रतिस्पर्धा नहीं कर सकते यह सुनिश्चित करने के लिए हस्तक्षेप की आवश्यकता है।
बड़े प्लेटफार्म पर दी जाने वाली कैशबैक और ब्याज मुक्त योजनाएं आसान खेल को मैदान बनती हैं क्योंकि वह ग्राहकों को आकर्षित करती हैं जबकि छोटे हैं वैसे में विक्रेता सामान प्रोत्साहन देने का जोखिम नहीं उठा सकते यह प्रथाएं स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देती हैं और हम इन योजनाओं पर अंकुश लगाने और नैतिक व्यावसायिक प्रथाओं को सुनिश्चित करने के लिए विनिमय्यन का अनुरोध करते हैं।
ई-कॉमर्स कंपनी के डिलीवरी कर्मियों को कर्मचारियों के रूप में माना जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि उन्हें उचित श्रम सुरक्षा और लाभ प्राप्त हो जिससे लॉजिस्टिक क्षेत्र में श्रमिकों का कल्याण बढ़े।
आते हैं उपरोक्त मुद्दों को देखते हुए ई-कॉमर्स कंपनियों पर तुरंत आवश्यक अंकुश लगाने की आवश्यकता है ताकि भारत के खुदरा व्यापारी जो भारत की अर्थव्यवस्था की रीड है और ग्राहक को कोई नुकसान ने पहुंचे तथा भारत की जीडीपी लगातार वृद्धि करती रहे, हम इस विश्वास और आशा के साथ शीघ्र कार्रवाई की आशा करते हैं।
अशोक कंसल प्रांतीय वरिष्ठ उपाध्यक्ष अजय सिंघल नगर अध्यक्ष के नेतृत्व में यह ज्ञापन प्रधानमंत्री जी को प्रेषित किया गया साथ में श्याम सिंह सैनी राकेश गर्ग, दिनेश बंसल, अशोक छाबड़ा, पंकज शर्मा ,अनिल तायल, अमित मित्तल ,रामपाल सेन, हिमांशु कौशिक, शोभित गुप्ता ,अंजू शर्मा अजय गुप्ता, प्रमोद अग्रवाल ,पवन छाबड़ा ,अनीशा भटनागर, अंजू शर्मा आदि उपस्थित रहे।


