लखनऊ । भारतीय जनता पार्टी हाईकमान ने जिस वरुण गांधी का टिकट पीलीभीत से काट दिया था, रायबरेली से उन्हें मैदान में उतरने के लिए उनकी चिरौरी करनी पड़ी लेकिन वरुण गांधी ने अपनी चचेरी बहन प्रियंका गांधी के खिलाफ चुनाव लड़ने से इंकार कर भाजपा के प्लान को चौपट कर दिया। भाजपा से जुड़े विश्वस्त सूत्रों के अनुसार अपनी बीमारी के बाद घर में आराम फरमा रहे वरुण गांधी को पहला फोन भाजपाध्यक्ष जेपी नड्डा का आया। जिसमें इस युवा गांधी से कहा
गया वे रायबरेली से भाजपा की टिकट पर चुनावी मैदान में उतरने के लिए कमर कस लें पर वरुण ने इस संदेशवाहक को टका सा जवाब देकर उन्हें निरूत्तर कर दिया। फिर वरुण के पास दो ओर बड़े नेताओं के फोन आये। पटकथा वही थी, संवाद भी वही पुराना था, पर फिर भी जब वरुण नहीं माने। सूत्रों की माने तो उन्हें समझाया गया कि मौजूदा परिस्थितियों से उन्हें हताश होने की जरूरत नहीं है, वे अपने भविष्य की डोर भाजपा के हाथों में सौंप कर निश्चिंत हो जाएं।’ वरुण ने विनयपूर्वक अनुनय को ठुकराते हुए कहा- चूंकि रायबरेली से उनकी बड़ी
बहन प्रियंका गांधी चुनाव लड़ने वाली है सो वे अपनी बहन के खिलाफ चुनाव नहीं लड़ सकते क्योंकि प्रियंका से उनके बेहद आत्मीय रिश्ते हैं। भाजपा को इस बात का कहीं पहले इल्म हो गया था कि गांधी परिवार अमेठी और रायबरेली दोनों ही सीटों पर अपना दावा बरकरार रखने वाला है। अमेठी से राहुल गांधी और रायबरेली से प्रियंका वाड़ा चुनावी मैदान में उतरने वाले हैं जिससे कि यूपी में एक चुनावी माहौल बनाया जा सके। भाजपा नेतृत्व संभावित नामों को लेकर एक जमीनी सर्वेक्षण कराया। ये 5 नाम थे वरुण गांधी, उमा भारती, विनय कटियार, ब्रजेश पाठक और मनोज पांडे पर इन तमाम सर्वेक्षणों में वरुण गांधी का नाम ही राय बरेली में सर्वमान्यता की कसौटी पर खरा उतरा। इसके बाद वरुण को मनाने के लिए पार्टी नेताओं ने भरसक कोशिश की लेकिन उन्हें टका सा जवाब मिला। अब चर्चाएं हैं कि वरुण भाजपा को बाय बाय कर कांग्रेस में जा सकते हैं। वरुण गांधी जैसे व्यक्तित्व के लिए लोकसभा टिकट कोई मायने नहीं रखता।

