मुजफ्फरनगर । मुस्लिम देशों को आतंकवाद के खिलाफ खड़ा होना चाहिए न कि उनका समर्थन करना चाहिए–अशोक बालियान, चेयरमैन,पीजेंट वेलफेयर एसोसिएशन ने यह सुझाव देते हुए कहा कि फिलिस्तीन के आतंकवादी संगठन हमास के चीफ लीडर इस्माइल हानिया की अगुआई में ही हमास ने पिछले साल 7 अक्टूबर 2023 को इजराइल पर 75 सालों का सबसे बड़ा हमला किया था।इस घातक हमले में बच्चों की हत्या, महिलाओं के साथ बलात्कार, पूरे परिवारों को जिंदा जलाना और सैकड़ों निर्दोष नागरिकों को बंधक बनाना जैसी घटनाये हुई थी।
हमास चीफ इस्माइल हानिये टीवी पर अपने आतंकियों का इजराइल पर हो रहा हमला देख रहा था। जब इजरायल की सड़कों पर कत्लेआम मचलने लगा, तो वह बेहद खुश हो गया था और सजदा करने लगा था। उसका यह वीडियो सोशल मीडिया पर भी वायरल हो गया था। हमास के आतंकी हमले के कई ऐसे वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं, जो कि उसकी दरिंदगी का सबूत देते हैं। आतंकियों ने लड़कों पर गोलीबारी करके लाशें बिछा दीं थी। बच्चों को उनकी मां के आगे मार दिया गया था।और महिलाओं को किडनैप कर उनके साथ दरिंदगी की गयी थी।
इजरायल पर हमास के हमले के बाद ईरान, लेबनान समेत कई देशों में जश्न मनाया जाने लगा था। इसके बाद इजराइल ने हमास को खत्म करने के किये जंग शुरू कर दी थी। इसी जंग में हमास का चीफ लीडर इस्माइल हानिया को 31 जुलाई 2023 तड़के ईरान की राजधानी तेहरान में मार गिराया है।ईरान और हमास ने इस हत्या के लिए इजरायल को दोषी ठहराया है।
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने इजराइल को धमकी दी है।इस्माइल हानिया की मौत के बाद ईरान के राष्ट्रपति पजशकियान ने कहा है कि “हम उन्हें इस हमले पर पछताने के लिए मजबूर कर देंगे”। दूसरी तरफ इस्माइल हानिया की मौत के बाद अमेरिकी रक्षा सचिव लॉयड ऑस्टिन ने कहा कि अगर इजराइल पर हमला होता है, तो अमेरिका उसकी मदद करेगा।
हमास-इजरायल युद्ध के बीच आज दुनिया भर के मुस्लिम देश और इस्लामी सहयोग संगठन (आईओसी) जिस तरह से इजरायल के खिलाफ खड़े हैं,अगर इतनी सख्ती आतंकवाद के खिलाफ दिखाते,तो आज दुनिया से आतंकवाद खत्म हो गया होता। इजरायल व हमास जंग के बीच 57 मुस्लिम देशो के समूह इस्लामी सहयोग संगठन (आईओसी) ने बैठक बुलाकर इजरायल पर आतंकवाद फैलाने का आरोप लगा दिया था और इजरायल के गाजा पर हमले को युद्ध अपराध बता दिया था।मुस्लिम देश इजराइल के खिलाफ रैली निकालकर नारेबाजी कर रहे हैं।लेकिन मुस्लिम देश और इस्लामी सहयोग संगठन (आईओसी) हमास के खिलाफ किसी भी तरह की कार्रवाई करने की मांग नहीं की है।क्योकि यह सच है कि मुस्लिम समाज में कट्टरपंथी मान्यताओं के विकास को समझाने में विचारधारा एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।और कुल मिलाकर, कट्टरपंथी विश्वासों को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय राजनीति की वैधता के साथ बड़े पैमाने पर जुड़ा हुआ पाया गया है।
मुस्लिम जगत के कुछ देश व् मुस्लिम जगत के कुछ नेता यहूदियों को खत्म करने की धमकी देते आ रहे है। जब तक इजराइल एक देश भी नहीं बना था, तब भी भारत के एक मुस्लिम नेता ने यहूदियों और ईसाइयों का कत्लेआम की धमकी दी थी।इज़राइल यहूदियों की मातृ भूमि है,जिसपर इस्लामिक आक्रांताओं ने क़ब्जा कर लिया था और फिर ब्रिटेन ने इस पर कब्जा कर लिया था।
बामफोर्ड की पुस्तक ‘असहयोग और खिलाफत आंदोलन का इतिहास 1925’ के पेज 240 के अनुसार भारत में खिलाफत आंदोलन पर 29 फरवरी 1920 को कलकत्ता में खिलाफत सम्मेलन में मौलाना अब्दुल बारी ने अपने भाषण में कहा था कि अगर खिलाफत के लिए दो दावेदार हों, तो इस्लाम के निर्देशानुसार दूसरे दावेदार का सिर कलम कर दिया जाना चाहिए।उन्होंने अपने भाषण को जारी रखते हुए आगे कहा कि कुरान में कहा गया है कि मुसलमानों के अलावा कोई भी राज्य फिलिस्तीन में नहीं होगा और जब ऐसा होगा,तो इमाम मेहदी इस्लाम के उद्धार के लिए आएंगे, और उनके नेतृत्व में मुसलमान फिलिस्तीन में सभी यहूदियों और ईसाइयों का कत्लेआम करेंगे।
मानवता के लिए आवाज उठाना अच्छी बात है, लेकिन जब हमास ने इजरायल पर हमला किया,तब इस संगठन और मुस्लिम देशों ने हमास के खिलाफ आवाज नहीं उठाई।हमास के खिलाफ सड़कों पर नहीं उतरे।
इस्लामी सहयोग संगठन (आईओसी) 57 देशों का समूह है अगर आतंकवाद के खिलाफ जंग छेड़ दे,तो आतंकवादी गतिविधियां तो दूर की बात हैं,कोई आतंकी भी नहीं पनप सकता। दुनिया के किसी भी देश में जह आतंकी हमला होता है और इस्लामी आतंकियों पर आरोप लगाता है या इस्लामी आतंकी संगठन खुद इसकी जिम्मेदारी लेते हैं तब इस्लामी सहयोग संगठन(आईओसी) बैठक बुलाकर उनके युद्ध अपराधी क्यों करार नहीं देता।मुस्लिम देशों में आतंक के खिलाफ प्रदर्शन क्यों नहीं होता।अगर मुस्लिम देश और आईओसी को वास्तव में मानवता की फिक्र है तो दुनिया में आतंकवाद के खिलाफ जंग क्यों नहीं छेड़े देते।हमारी राय में मुस्लिम देशों को आतंकवाद के खिलाफ खड़ा होना चाहिए न कि उनका समर्थन करना चाहिए, तभी दुनिया से आतंकवाद खत्म हो सकता है।
हमें निर्दोष फ़िलिस्तीनी जनता के जंग में मरने का दुख है,लेकिन उनका करना हमास जैसे आतंकवादी संगठन है। यह बात उनको भी समझनी होगी।