मुजफ्फरनगर। ज़िले की ह्रदय स्थली और अति-संवेदनशील शिव चौक से होकर गुजरने वाले मोहर्रम के जुलूस को लेकर की गई प्रशासनिक व्यवस्था में बाधा उत्पन्न करने का प्रयास पुलिस की मुस्तैदी से नाकाम कर दिया गया। मोहर्रम के शांतिपूर्ण संचालन के मद्देनजर शिव चौक पर भगवान आशुतोष के मंदिर के एक हिस्से पर सुरक्षा की दृष्टि से लगाए गए पर्दे को हटाने पहुंचे कुछ हिंदू संगठनों के पदाधिकारियों को नगर कोतवाली पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए हिरासत में ले लिया। पुलिस ने कोतवाली लाकर इन नेताओं को कड़ी फटकार लगाई और कानून हाथ में न लेने की सख्त हिदायत दी। इसके बाद पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की देखरेख में मंदिर के उक्त हिस्से को दोबारा पहले की तरह पर्दे से ढक दिया गया है। इस घटनाक्रम के बाद से पूरे शहर में इस मुद्दे को लेकर तीखी बहस और चर्चाओं का बाजार गर्म है।प्राप्त जानकारी के अनुसार, आगामी मोहर्रम जुलूस को शांतिपूर्ण, व्यवस्थित और सांप्रदायिक सौहार्द के साथ संपन्न कराने के लिए जिला प्रशासन व पुलिस ने शिव चौक पर सुरक्षा के लिहाज से मंदिर के एक हिस्से को अस्थाई पर्दे से कवर किया था। बुधवार को कुछ हिंदू संगठनों के पदाधिकारी और कार्यकर्ता इस व्यवस्था के विरोध में अचानक शिव चौक पर एकत्र हो गए। कार्यकर्ताओं ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा कि इस प्रकार की व्यवस्था से एक नई परंपरा की शुरुआत हो सकती है, जो भविष्य के लिए ठीक नहीं है। विरोध जताते हुए उन्होंने वहां लगे पर्दे को जबरन हटा दिया। जैसे ही पर्दे हटाए जाने की खबर फैली, कलेक्ट्रेट और पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया।मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए और माहौल बिगड़ने की आशंका के चलते भारी पुलिस बल के साथ नगर कोतवाली पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची। पुलिस ने स्थिति को बिगड़ने से पहले ही संभाल लिया और पर्दा हटाने में शामिल प्रमुख हिंदू नेताओं को मौके से हिरासत में लेकर तुरंत गाड़ी में बैठाया और शहर कोतवाली ले आई। कोतवाली परिसर में वरिष्ठ अधिकारियों ने साफ शब्दों में कहा कि किसी भी व्यक्ति या संगठन को बिना अनुमति के प्रशासनिक और सुरक्षा व्यवस्था में हस्तक्षेप करने की इजाजत नहीं दी जाएगी। पुलिस ने सभी को शांति भंग न करने की हिदायत देते हुए कड़ी फटकार लगाई। इसके बाद शिव चौक पर भारी पुलिस बल की मौजूदगी में मंदिर के उस हिस्से को दोबारा पर्दे से व्यवस्थित कर दिया गया।इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो और खबरें सामने आने के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी इस मुद्दे को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। नेटिजन्स का एक बड़ा वर्ग मोहर्रम जैसे संवेदनशील पर्व पर शांति और आपसी सौहार्द बनाए रखने के लिए की गई प्रशासनिक व्यवस्था का पुरजोर समर्थन कर रहा है। वहीं, कुछ प्रबुद्ध नागरिकों ने बिना वजह शहर का माहौल खराब करने का प्रयास करने वाले नेताओं के इस कृत्य पर उनकी तीखी आलोचना की है। लोगों का कहना है कि पुलिस ने समय रहते सही और कड़ा कदम उठाकर शहर को किसी बड़े तनाव से बचा लिया।प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट रुख अपनाते हुए कहा है कि मोहर्रम जैसे बड़े और संवेदनशील अवसरों पर मुजफ्फरनगर शहर के भीतर अमन-चैन, कौमी एकता और मजबूत कानून-व्यवस्था बनाए रखना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। किसी भी अराजक तत्व या संगठन को ऐसी किसी भी गतिविधि की छूट नहीं मिलेगी जिससे सामाजिक सद्भाव प्रभावित हो या दो समुदायों के बीच कटुता पैदा हो। पुलिस प्रशासन ने आम जनता से अपील की है कि सोशल मीडिया या अन्य माध्यमों से फैलने वाली किसी भी तरह की भ्रामक अफवाहों पर बिल्कुल ध्यान न दें और शहर में शांति व्यवस्था बनाए रखने में प्रशासन का सहयोग करें।


