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मुजफ्फरनगर में डीएम रहे एस मोहिंदर सिंह के आवास पर ईडी के छापे में करोड़ों के हीरे और नकदी मिली

नोएडा। लोटस 300 प्रोजेक्ट मामले में ED ने बुधवार को देश भर में कई जगह छापे मारे। दिल्ली के अलावा मेरठ, नोएडा और चंडीगढ़ में छापे मारे गए। रिटायर IAS अफसर एवं नोएडा अथॉरिटी के पूर्व CEO और मुजफ्फरनगर में डीएम रहे एस. मोहिंदर सिंह के चंडीगढ़ स्थित कोठी पर छापे में करीब एक करोड़ रुपये कैश, 12 करोड़ रुपये के हीरे, 7 करोड़ कीमत के सोने के जेवरात और तमाम संदिग्ध दस्तावेज बरामद हुए हैं। लोटस 300 प्रोजेक्ट 300 करोड़ का घोटाला था। इस मामले में मनी लांड्रिंग का मामला ED ने दर्ज किया था। यह जमीन हैसिंडा प्रोजेक्ट प्राइवेट लिमिटेड (एचपीपीएल) को लोटस 300 परियोजना विकसित करने के लिए आवंटित की गई थी। एचपीपीएल कई कंपनियों का एक गठजोड़ है, जिसमें पेबल्स इन्फ्रोटेक की अग्रणी भूमिका है। उच्च न्यायालय ने इस मामले में ‘घोर लापरवाही’ के लिए नोएडा विकास प्राधिकरण को फटकार लगाई थी। उसे एक दशक से अधिक समय से अपने बकाये के भुगतान की स्थिति का पता लगाने या कोई कदम उठाने में फटकार लगाई थी।

ग्रेटर नोएडा व यमुना क्षेत्र की बेशकीमती सरकारी जमीन धन्धेबाजों को मात्र 10 प्रतिशत राशि लेकर आवंटित करने के घोटाले का मुख्य सूत्रधार नोएडा प्राधिकरण के तत्कालीन अध्यक्ष एवं सीईओ मोहिन्दर सिंह को माना जा रहा है। सरदार मोहिंदर सिंह तत्कालीन मुख्यमंत्री सुुश्री मायावती की सरकार में सबसे फेवरेट अधिकारी था। सरदार मोहिंदर सिंह 14 दिसंबर 2010 से लेकर 20 मार्च 2012 तक नोएडा प्राधिकरण में ECO तथा चेयरमैन के पद पर तैनात रहे। उसी तैनाती के दौरान मोहिंदर सिंह ने बिल्डरों को कौडिय़ों के भाव नोएडा प्राधिकरण की सारी जमीन बेच डाली थी। सूत्रों का दावा है कि अपने आकाओं का चहेता बना रहने के लिए मोहिन्दर सिंह ने ही यह योजना बनायी थी कि बिल्डर प्राधिकरण को मात्र 10 प्रतिशत राशि देकर अपना प्रोजेक्ट बना लें और बाकी धन किश्तों में अदा करते रहे। इसी योजना के कारण आज लाखों बायर्स, ठेकेदार, श्रमिक सडक़ों पर हैं और प्राधिकरणों के 28 हजार करोड़ रूपये डूब गए हैं। नोएडा प्राधिकरण से सैकड़ों करोड़ रूपए की भूमि आवंटित कराने वाले एक दर्जन बिल्डर कंगाल हो गए हैं। नोएडा में सक्रिय इन बिल्डरों ने अपनी-अपनी नोएडा की कंपनियों को दिवालिया घोषित कर दिया है। दिवालिया होने वाले बिल्डरों के ऊपर नोएडा प्राधिकरण के नौ हजार करोड़ से भी अधिक रूपए बकाया है। दिवालिया हो जाने के कारण इन बिल्डरों से अब रिकवरी की उम्मीद ना के बराकर रह गयी है। रिकवरी ना होने का अर्थ है कि नोएडा प्राधिकरण का पूरा बकाया डूब गया है। नोएडा प्राधिकरण के इस बकाये की रकम 9 हजार करोड़ रूपए से भी अधिक की है। नोएडा प्राधिकरण का सबसे बड़ा बकाया आम्रपाली बिल्डर पर है। दिवालिया हो चुके आम्रपाली बिल्डर पर नोएडा प्राधिकरण के 4500 करोड़ रूपए बकाया है। इस कड़ी में दूसरा नाम सुपरटेक बिल्डर का है। सुपरटेक बिल्डर पर नोएडा प्राधिकरण के 3062 करोड़ रूपए बकाया है। इसी प्रकार लॉजिक्स बिल्डर पर नोएडा प्राधिकरण के 1 हजार 113 करोड़ रूपए बकाया है। इसी कड़ी में थ्रीसी बिल्डर पर नोएडा प्राधिकरण के 600 करोड़ रूपए बकाया है। यहां बताए गए सभी बिल्डर दिवालिया घोषित हो चुके हैं। इस कारण नोएडा प्राधिकरण के 9 हजार करोड़ रूपए डूब गए हैं। नोएडा प्राधिकरण की भारी-भरकम धनराशि डूबने का यह पूरा घोटाला सरदार मोहिंदर सिंह के समय में हुआ है। दरअसल सरदार मोहिंदर सिंह उत्तर प्रदेश के रिटायर्ड IAS अधिकारी हैं। नोएडा प्राधिकरण के तत्कालीन CEO मोहिंदर सिंह के अनेक घपले-घोटाले सीबीआई तथा ED के सामने आ चुके हैं। कुछ मामले विभिन्न अदालतों में चल रहे हैं। भारत की पुलिस हो, सीबीआई ओ अथवा ED किसी भी एजेंसी को पता ही नहीं है कि सरदार मोहिंदर सिंह रिटायर्ड होने के बाद कहां पर है।

Taja Report
Author: Taja Report

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