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मुजफ्फरनगर पुलिस ने किया फर्जी जीएसटी की चोरी कर सरकार को चूना लगाने वाले 7 गिरफ्तार

मुजफ्फरनगर। जिले की पुलिस ने एक बड़े साइबर अपराधी गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो फर्जी कंपनियां रजिस्टर कर उनके जीएसटी नंबरों पर फर्जी बिलिंग के माध्यम से सरकार को करोड़ों रुपये की राजस्व हानि पहुंचा रहा था।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अभिषेक सिंह के निर्देशन में और पुलिस अधीक्षक ग्रामीण आदित्य बंसल के पर्यवेक्षण में इस अभियान को अंजाम दिया गया। थाना साइबर क्राइम, रतनपुरी और बुढाना पुलिस की संयुक्त टीम ने इस कार्रवाई में 7 अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है। इन अभियुक्तों ने 925 करोड़ रुपये के फर्जी GST और ई-वे बिल तैयार कर राजस्व को भारी नुकसान पहुंचाया था। गिरफ्तार अभियुक्तों के पास से 08 मोबाइल फोन, 20 सिम कार्ड, 02 पेन कार्ड और 05 आधार कार्ड बरामद किए गए हैं। पुलिस इस मामले में आगे की विधिक कार्यवाही कर रही है।

एसएसपी अभिषेक सिंह ने घटना का खुलासा करते हुए बताया कि गिरफ्तार अभियुक्तों ने पूछताछ में बताया कि इनका एक संगठित गिरोह है, जिसका मास्टरमाइंड तसलीम है, जबकि वहादत फरार है। गिरोह के सदस्यों ने पिछले 5-6 वर्षों से फर्जी कंपनियों और GST बिलों के माध्यम से सरकार के राजस्व को हानि पहुंचाते हुए अवैध आर्थिक लाभ कमाया है। वे भोले-भाले लोगों को नौकरी का झांसा देकर उनके आधार कार्ड, पैन कार्ड, पहचान पत्र, और अन्य दस्तावेज प्राप्त कर लेते थे। इन दस्तावेजों के आधार पर फर्जी कंपनियां रजिस्टर की जाती थीं और जीएसटी नंबर लिया जाता था। इसके बाद, उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाए जाते थे, लेकिन खातों का नियंत्रण गिरोह के पास रहता था। बदले में, पीड़ितों को कुछ पैसा दे दिया जाता था।

गिरफ्तार अभियुक्तों में तसलीम पुत्र फरमान निवासी भनवाड़ा, थाना रतनपुरी, जुनैद पुत्र महताब – निवासी भनवाड़ा, थाना रतनपुरी आस मोहम्मद पुत्र मंगता – निवासी मं0न0 529, गीतापुरी भूड, कस्बा व थाना खतौली, सेठी पुत्र महावीर – निवासी पश्चिमी पछाला, कृष्णापुरी, कस्बा बुढाना, थाना बुढाना, आसिफ पुत्र मंजूर – निवासी मं0न0 132, मंडी दक्षिणी, बस स्टैंड के पास, कस्बा व थाना बुढाना, मोईन पुत्र सरफराज – निवासी मं0नं0 31, मंडी उत्तरी, पानी की पुरानी टंकी के पास, कस्बा व थाना बुढाना, अजीम पुत्र समीम – निवासी मं0न0 153/7, मंडी दक्षिणी, भगत टाकीज के पास, कस्बा व थाना बुढाना शामिल है।

इस गिरोह के सदस्य स्क्रैप/कबाड़ी जैसे व्यापारियों से 2-3% कमीशन लेते थे और फर्जी जीएसटी बिल का उपयोग कर 18% जीएसटी बचाकर सरकार को नुकसान पहुंचाते थे। यह नेटवर्क कई राज्यों में फैला हुआ है, और यदि किसी व्यापारी को फर्जी जीएसटी बिल की आवश्यकता होती, तो वे उसे उपलब्ध कराते थे। कमीशन की राशि हवाला के माध्यम से या सीधे बैंक खाते में ली जाती थी। गिरोह के तकनीकी कार्यों को अज़ीम नाम का सदस्य, जो बीटेक है, संभालता था।

वे एक ही कंपनी के दो जीएसटी नंबर और फर्जी बैंक खाते बनाते थे, और वाहन मालिकों की जानकारी के बिना उनके वाहनों के नंबरों का उपयोग फर्जी जीएसटी और ई-वे बिलों में करते थे, जिससे सरकार को भारी राजस्व हानि होती थी। पुलिस अब इनके विस्तृत नेटवर्क की जांच कर रही है।

Taja Report
Author: Taja Report

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