मुजफ्फरनगर। मुजफ्फरनगर नगर पालिका परिषद में निर्माण विभाग में टेंडल घोटाले की गाज सहायक अभियंता अखंड प्रताप पर गिर गई है। उनका अलीगढ़ तबादला करते हुए उन्हें शासन स्तर से तत्काल रिलीव करते हुए अलीगढ़ पहुंचने को कहा गया है। मामले में पालिका के कुछ और कर्मचारियों और ठेकेदारों के खिलाफ भी कार्रवाई की तैयारी है।
मामले में ईओ से शिकायत की गई थी कि कुछ ठेकेदारों के द्वारा निर्माण कार्यों के टेंडर में फर्जी एफडीआर लगाई गई है। इस मामले को दबाने के लिए आनन फानन में इसकी जांच टीएस नरेश शिवालिया को सौंप दी गई। नगर पालिका में फर्जी एफडीआर प्रकरण को लेकर हडकम्प के बीच नगर पालिका प्रशासन और निर्माण विभाग के अधिकारियों ने गुपचुप उक्त विवादित टेंडर निरस्त कर दिए। अब नगर पालिका ने करीब 85 निर्माण कार्यों के री-टेंडर किए है, लेकिन उक्त मामले में आरोपी ठेकेदारों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है। इस मामले में निर्माण विभाग के कुछ अधिकारी और कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध बनी हुई है। बताया जाता है कि विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने ही मिलीभगत कर नई एफडीआर बनवाने से ठेकेदारों को मुक्ति देते हुए पहले से उनकी फाइलों में रखी पुरानी एफडी उनके टेंडर में लगाकर चेयरपर्सन मीनाक्षी स्वरूप की आंखों में धूल झोंकी। शिकायत के बाद घोटालेबाज मामले में दबाने के प्रयास में लग गए लेकिन शासन तक इसकी शिकायत पहुंचते ही मुजफ्फरनगर नगर पालिका परिषद में सहायक अभियंता अखंड प्रताप का अलीगढ़ तबादला कर उन्हें तत्काल रिलीव कर दिया गया। अब देखना होगा कि चेयरपर्सन और ईओ बाबुओं और ठेकेदारों के खिलाफ क्या कार्रवाई करती हैं।


