अभिषेक वालिया
मुजफ्फरनगर । हाल ही में संपन्न हुए लोकसभा चुनाव 2024 के प्रथम चरण में मुजफ्फरनगर में हुई वोटिंग को लेकर तमाम राजनीतिक पार्टियों अपनी अपनी जीत का दावा कर रही है, हालांकि देखा जाए तो मुजफ्फरनगर लोकसभा में मतदान का प्रतिशत काफी कम रहा है। यह आंकड़े 2009 के आंकड़ों से लगभग मिलते-जुलते नजर आए 2009 में 54.37%रहा था। जिसमें लोकसभा सीट बसपा के खाते में गई थी। वही इस बार 58.50% रहा है ,यानी जीत हार को लेकर बड़े दावों के बावजूद पार्टी के कार्यकर्ताओं सहित प्रत्याशी भी काफी चिंतित दिखाई दे रहे हैं। भाजपा, सपा और बसपा खेमे में मायूसी का नजारा देखा गया।
बात करें 2009 के चुनाव की तो भाजपा रालोद गठबंधन से अनुराधा चौधरी, सपा ठाकुर संगीत सोम, बसपा से कादिर राणा और काँग्रेस से हरेंद्र मलिक चुनाव मैदान में थे। जिसमें जीत का ताज बसपा के कादिर राणा के सिर सजा था। भाजपा दूसरे, सपा तीसरे पर रही थी, तो वही काँग्रेस से हरेंद्र मलिक चौथे स्थान पर रहे थे। गत दिवस हुए चुनाव में में भाजपा के बेस वोट के इलाके में वोटर वोट डालने घर से निकले परंतु जिस तरह बसपा और सपा के बेस वोटर ने वोट दी। उसके मुकाबले भाजपा के प्रत्याशी से नाराजगी के चलते भाजपा का अपने घरों में रहा। जिस कारण वोटिंग प्रतिशत बहुत कम रही। बाकी जगहों पर वोटिंग उम्मीद के हिसाब से ठीक रहा। भाकियू के विरोध और रालोद में निचले स्तर पर गठबंधन को लेकर निराशा के चलते जाट वोट का बड़ा हिस्सा सपा को मिला तो राजपूत समाज का विरोध व ओबीसी का खासा वोटर छिटकना भी भाजपा का नुकसान माना जा रहा है। सरधना इलाके में बीस प्रतिशत कम मतदान चिंता बढाने वाला है। 
कल कई लोगों से हुई वार्ता में लोगों ने कई मुद्दों और अपनी समस्याओं को लेकर नाराजगी भी दिखाई। ऐसे में मतदान में दस प्रतिशत की गिरावट और वोटों के बिखराव ने भाजपा व सपा दोनों की चिंता बढा दी है।


