मुजफ्फरनगर। थाना खतौली क्षेत्र के गांव टिटौड़ा में वर्ष 2012 में हुए चर्चित हत्या प्रकरण में जिला एवं सत्र न्यायालय ने अहम फैसला सुनाते हुए सभी आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया। करीब 14 वर्ष बाद आए इस निर्णय को अभियुक्त पक्ष ने न्याय की जीत बताया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, दिनांक 21 फरवरी 2012 को गांव टिटौड़ा निवासी ऋषिपाल पुत्र जुम्मा सिंह उर्फ जुमन सिंह अपने भाई सोमवीर के साथ खेत पर काम करने गया था। शाम करीब 4 बजे सोमवीर घर लौट आया, जबकि ऋषिपाल खेत पर ही रह गया। देर रात तक घर न लौटने पर परिजनों ने उसकी तलाश शुरू की। अगले दिन 22 फरवरी 2012 की सुबह करीब 8:30 बजे ऋषिपाल का शव जंगल में चक रोड के बीच पड़ा मिला।इस मामले में सोमवीर की तहरीर पर थाना खतौली में मुकदमा अपराध संख्या 157/2012 धारा 302 आईपीसी के तहत अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। विवेचना के दौरान पुलिस ने सोनू पुत्र शेरपाल निवासी ग्राम मढ़करीमपुर तथा नौशाद पुत्र शहाबुद्दीन व जोनी पुत्र राजेंद्र निवासी ग्राम टबीटा को 25 फरवरी 2012 को गिरफ्तार दिखाया। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से मृतक का मोबाइल फोन बरामद होना दर्शाया तथा हत्या में फावड़ा व बलकटी जैसे हथियारों के प्रयोग की बात कही।मामले में पुलिस द्वारा आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया गया, जिसके बाद सत्र परीक्षण संख्या 835/2012 सरकार बनाम सोनू आदि के रूप में सुनवाई शुरू हुई। विचारण के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से सात गवाह पेश किए गए, लेकिन वे घटना, घटनास्थल और बरामदगी को संदेह से परे साबित नहीं कर सके। न्यायालय में यह भी सामने आया कि:बरामद मोबाइल फोन की पुष्टि नहीं हो सकी,
हत्या में प्रयुक्त बताए गए हथियार व कपड़ों पर खून की एफएसएल रिपोर्ट से पुष्टि नहीं हुई,
गवाहों के बयान में विरोधाभास पाए गए,बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता संदीप कुमार त्यागी, मोहम्मद आबिद व टीटू सिंह एडवोकेट ने प्रभावी पैरवी करते हुए एफआईआर में देरी, मृत्यु के समय की संदिग्धता तथा बरामदगी को अविश्वसनीय बताया। जिला एवं सत्र न्यायाधीश बीरेंद्र कुमार ने दोनों पक्षों को सुनने व साक्ष्यों का गहन परीक्षण करने के बाद अभियोजन के मामले को संदेहास्पद मानते हुए तीनों आरोपियों को धारा 302 व 404 आईपीसी के तहत संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया।
फैसले के बाद अभियुक्तों ने न्यायालय व अपने अधिवक्ताओं का आभार जताया और कहा कि उन्हें 14 वर्ष बाद न्याय मिला है।


