मुजफ्फरनगर । मीरापुर विधानसभा में होने वाले उपचुनाव को लेकर तमाम राजनीतिक पार्टियों अपने-अपने दांव पेंच आजमा रही है । वही ग्राउंड जीरो पर जाकर बात करें तो किसी भी पार्टी को जिताने को लेकर अभी भी मतदाता अपना स्पष्ट रुख नहीं कर पा रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी एवं रालोद गठबंधन से प्रत्याशी मिथलेश पाल, समाजवादी कांग्रेस गठबंधन से प्रत्याशी पूर्व सांसद कादिर राणा की पुत्रवधू सम्बुल राणा, बहुजन समाज पार्टी से शाहनजर सहित आजाद समाज पार्टी ,ओवैसी की पार्टी के प्रत्याशियों के प्रति इस बार मतदाता रुख साफ नहीं कर रहे हैं । मतदाताओं का कहना है कि कादिर राणा व मिथलेश पाल को पूर्व में भी विधायक बनकर देख लिया परंतु क्षेत्र के विकास को लेकर दोनों ही नदारद रहे थे ,बात करें भारतीय जनता पार्टी की तो रालोद से गठबंधन के बाद मीरापुर में चुनाव तो लड़ रहे हैं परंतु भारतीय जनता पार्टी की अंदरूनी कलह है एवं राष्ट्रीय लोकदल से कई ऐसे नेता जो टिकट की मांग कर रहे थे उनके साथ जुड़े जन समूह की नाराजगी मिथलेश पाल को भारी पड़ती नजर आ रही है ,वहीं कादिर राणा की छवि भी 2013 के दंगों के बाद से क्षेत्र में काफी खराब स्थिति में नजर आ रही है ,हालांकि बहुजन समाज पार्टी एवं आजाद समाज पार्टी ने दोनों नए चेहरे को टिकट दिया है। जिनका पुराना कोई राजनीतिक अस्तित्व नहीं है । ऐसे में दोनों प्रत्याशी जीत के दावे करते हुए क्षेत्र में भ्रमण कर रहे हैं । सत्ताधारी पार्टी भारतीय जनता पार्टी एवं गठबंधन से रालोद के तमाम बड़े नेता यहां तक की भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष एवं सूबे के मुख्या योगी आदित्यनाथ भी वोटरों को साधने के लिए क्षेत्र में आ रहे हैं। रालोद के राष्ट्रीय अध्यक्ष केंद्र सरकार में राज्य मंत्री जयन्त चौधरी भी वोटरों को साधेगे। मीरापुर विधानसभा के उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी की स्थिति भले ही रालोद के साथ गठबंधन करके सुधरती नजर आ रही है परंतु हाल ही में स्थिति खतौली में हुए 2022 के उप चुनाव की तरह साफ नजर आ रही है।


