मुजफ्फरनगर । लोकसभा चुनाव के बाद खाली हुई यूपी की 10 विधानसभा सीटों पर जल्द ही उपचुनाव होने हैं। रालोद विधायक चंदन चौहान के बिजनौर से सांसद बनने के बाद उनकी मीरापुर सीट भी खाली हो गई है। इस सीट को लेकर भाजपा और रालोद के नेताओं में खींचतान शुरू हो गई है। भाजपा नेताओं का कहना है कि हमारे सहयोग से रालोद ने अपनी दोनों लोकसभा सीटें तो जीत ली लेकिन भाजपा को वोट दिलाने में रालोद नाकामयाब रही। यूपी में दो सांसद 10 विधायकों के बराबर माने जाते हैं। इस नाते भी मीरापुर की सीट पर भाजपा का क्लेम बनता है।
एक ओर जहां मुजफ्फरनगर के भाजपा के कई जाट नेताओं की नजर मीरापुर की विधानसभा सीट पर है सबसे प्रबल दावेदारी में जोगेंद्र वर्मा कस्बा भोकरहेड़ी के रहने वाले हैं उन्हें पूरी विधानसभा का सहयोग मिलना तय है क्योंकि वही एक ऐसे उम्मीदवार हैं जो क्षेत्र के रहने वाले हैं और क्षेत्र वासियों की यही डिमांड है कि हमारा प्रत्याशी क्षेत्रीय हो ,जोगेंद्र वर्मा ने मुजफ्फरनगर दंगों में अपने पिता को खोने के बाद जेल भी काटी थी। जेल में रहने के दौरान उनकी माता जी का भी निधन हो गया था ।वही अमित राठी और अमित चौधरी भी अपनी दावेदारी दिखा रहे हैं वहीं दूसरी ओर बसपा के बिजनौर के पूर्व सांसद और हाल ही में रालोद में आए नेता की नजर भी इस सीट पर है। उनका दावा है कि मीरापुर से गुर्जर हटा है तो गुर्जर ही बनना चाहिए। सूत्र बताते हैं कि अगर यह सीट भाजपा के कोटे में आई और भाजपा ने इन्हें उम्मीदवार बनाया तो यह पूर्व सांसद रालोद छोड़कर भाजपा में जाने को भी तैयार हैं।


