आगरा । मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशक को तीन लाख रुपये की रिश्वत लेते गिरफ्तार किया गया है।
सहायक शिक्षक अजयपाल सिंह मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशक के नोटिस पर जांच समिति के सामने पेश होने पहुंचा तो वहां तैनात बाबू ने उसे शाम को आने को कहा। मिठाई से मतलब घूस की रकम से था। शिक्षक के कार्यालय से बाहर निकलने पर शिक्षा भवन के आसपास डेरा डाले विजिलेंस टीम लौट गई थी। शाम को दोबारा पहुंची थी टीम।सहायक अध्यापक अजयपाल सिंह ने विजिलेंस को बताया कि उसकी नियुक्ति को लेकर हुई जांच में तत्कालीन जिला विद्यालय निरीक्षक ने क्लीन चिट दे दी थी। मगर, मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशक द्वारा कराई जा रही जांच की फाइल को फरवरी 2024 से उन्होंने रोक रखा था। कई महीने चक्कर काटने के बाद मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशक ने अपने स्टेनो के माध्यम से 10 लाख रुपये घूस देने के बाद फाइल निस्तारित को कहा था। जिसकी रिकॉर्डिंग सहायक शिक्षक ने कर ली थी। बाबू ने कहा कि साहब से शाम को उनके उठने के समय मिलने आना। मिठाई लेकर आना, डिब्बा देकर पैर छू जाना, तुम्हारा काम हो जाएगा। मिठाई के डिब्बे से उसका तात्पर्य घूस की रकम से था। वह शाम को मिठाई के दो डिब्बे लेकर गया था। एक में डिब्बे घूस की रकम और दूसरे में मिठाई थी। दोनों डिब्बे एक झोले में रखे थे। मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशक शिक्षा भवन के पास अपनी कार में मिले। उसने झोला उन्हें पकड़ा दिया। विजिलेंस टीम ने उन्हें रंगे हाथ दबोच लिया। एसपी विजिलेंस शगुन गौतम ने बताया कि सहायक अध्यापक की शिकायत पर छानबीन के लिए टीम एक सप्ताह तक शिक्षा भवन में घूमती रही थी। विजिलेंस के अधिकांश निरीक्षकों को शिक्षा विभाग के लोग पहचान गए हैं। इसलिए उन्हीं लोगाें को छानबीन में लगाया गया जिन्हें लोग नहीं पहचानते थे। छानबीन में पता चला कि अधिकारी देर शाम तक कार्यालय में रुकते थे। कार्यालय से घर जाते समय ही वह सारा लेनदेन शाम को करते थे।

