लखनऊ । चुनाव में भाजपा की हार के बाद जहां भाजपा नाकारा जिलाध्यक्षों को हटाने की तैयारी कर रही है वहीं रालोद में भी कई नेताओं पर गाज गिर सकती है। उत्तर प्रदेश में पहले दो चरणों में 16 सीटों पर रालोद गठबंधन का भाजपा को लाभ नहीं मिल पाया। रालोद चुनाव से पहले भाजपा के साथ गठबंधन में आया था। दोनों दलों को उम्मीद थी कि वह वेस्ट यूपी में विपक्ष का सूपड़ा साफ कर देंगे । बागपत और बिजनौर सीट पर रालोद अपने सिंबल पर चुनाव लड़ा तो अन्य पर भाजपा के प्रत्याशी मैदान में उतरे। जयंत चौधरी ने पीएम मोदी व अन्य भाजपा नेताओं के साथ संयुक्त सभाएं भी की। मगर रालोद तो अपनी दोनों सीटें जीत गया, लेकिन भाजपा मुजफ्फरनगर व कैराना सहित कई सीटों पर धराशायी हो गई। ये सीटें रालोद के प्रभाव वाली मानी जाती हैं। हालांकि भाजपा ने जयंत को केंद्र में मंत्री भी बनाया है, किंतु अब पार्टी में चुनाव की समीक्षा शुरू हो गई है। पार्टी सूत्रों के अनुसार जयंत ने चुनाव में संगठन को लेकर राष्ट्रीय व प्रदेश पदाधिकारियों से फीडबैक लिया है। इसमें यह बात निकलकर आई है कि वे भाजपा को अपेक्षित सफलता नहीं दिला पाने में पार्टी संगठन की और कुछ नेताओं की निष्क्रियता भी रही। वहीं केंद्र और प्रदेश में भाजपा के साथ गठबंधन में जाने और मंत्री पद मिलने के बाद भी पार्टी की जिम्मेदारी बढ़ गई है। ऐसे में संगठन को सक्रिय और 2027 के विधानसभा चुनाव के लिहाज से भी तैयार करना है। यही वजह है कि पार्टी अब अपने संगठनात्मक ओवरहॉलिंग की तैयारी में है। पार्टी सूत्रों के अनुसार जल्द ही लोकसभा चुनाव और विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर बैठक होगी। इसमें पार्टी के कुछ नेताओं पर गाज गिर सकती है।
दूसरी ओर यूपी बीजेपी में हारी हुई सीटो पर समीक्षा की जा रही है। समीक्षा के लिए स्पेशल टीम बनाई गई है। प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी ने हारी सीटों के लिए स्पेशल टीम को 15 जून तक हारी हुई सीटों का ब्योरा देने के लिए कहा है। जिन जिलों में सभी सीटें हारी ऐसे जिलाध्यक्षों की कुर्सी पर संकट आ सकता है।

