मुजफ्फरनगर। कथा व्यास जूना अखाड़ा के महामंडलेश्वर संत उमाकांतानंद सरस्वती जी महाराज ने कहा कि परिवार की पवित्रता आपसी विश्वास और प्रेम में है। उन्होंने कहा कि हमारी वर्ण व्यवस्था की गलत व्याख्या की गई है। जो चार वर्णों के है वह सभी सवर्ण हैं।
नई मंडी रामलीला भवन में श्री राम कथा के दूसरे दिन भगवान शिव और सती की कथा का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि पति शिव के मना करने के बाद भी सती का अपने पिता दक्ष के यज्ञ में जाना बड़े प्रकरण का कारण बना। उन्होंने कहा कि महिलाओं के लिए मायके का मोह अनुचित नहीं है। इसके बावजूद बिना निमंत्रण कहीं नहीं जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि असत्य और अविश्वास परिवार को तोड़ने का काम करते हैं। इससे बचने पर ही परिवार भली प्रकार चलता है। उन्होंने कहा कि पहले बेटी को संस्कार देकर भेजा जाता था यह कहकर कि यहां से डोली उठी है वहां से अर्थी उठेगी। अब अहंकार और मोबाइल देकर भेजा जाता है। ससुराल में उसे बेटी जैसा मान दिया जाता था। आज इसके अभाव से विवाह की संस्था विकृत हो रही है। इस पर विचार की जरूरत है। उन्होंने कहा कि कामना स्वभाविक है और इसके पीछे भावना ही रति है। रति राम में हो और सकाम हो कल्याण करती है। राम में रति उत्थान की और ले जाती है व काम में रति पतन का कारण बनेगी। ऐसे में राम में रति लगाएं। राम की रति मुक्ति का मार्ग प्रशस्त करती है। स्वामी उमाकांतानंद सरस्वती जी ने कहा कि भक्ति और हरिभजन के लिए कोई आयु नहीं है। युवावस्था में करें तो बुढापा सुधरता है और बुढापे में करें तो अंत और अगला जन्म सुधरता है। उन्होंने कहा कि वर्ण व्यवस्था का गलत प्रचार किया गया है। ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र चार वर्ण हैं। जो भी इनमें है वही सवर्ण है। यह व्यवस्था कार्य से विभाजित है। जो वर्ण से बाहर है वह अवर्ण है।
कथा में आज के मुख्य यजमान अंकित बिंदल व अंकिता बिंदल, बिंदल डुप्लेक्स रहे। श्री राम कथा का श्रवण करते भारी संख्या में श्रद्धालुओं के साथ पूर्व विधायक अशोक कंसल, संरक्षक भीम सेन कंसल, अध्यक्ष संजय मित्तल और मंत्री अशोक गर्ग के अलावा आदित्य भरतिया, ब्रज गोपाल छारिया, कैलाश चंद ज्ञानी, ऋषिराज राही, राजीव अग्रवाल, अभिषेक कुच्छल, विवेक गर्ग, राजेश गोयल, उपेंद्र मित्तल, विदित गुप्ता, अनिल गोयल, सुभाष गुप्ता, नरेश गुप्ता, मुकेश गुप्ता,विनोद संगल आदि उपस्थित रहे।


