कनागत के पक्ष में कुछ सावधानी बरतनी जरूरी हैं। शास्त्रों के अनुसार पितृ पक्ष के दौरान सरसों के तेल, वस्त्र, तामसिक भोजन, लोहे की चीजों व नुकीली चीजों का दान नहीं करना चाहिए। इन चीजों के दान से पूर्वज नाराज होते हैं। साथ ही जीवन में नकारात्मकता आती है, जबकि हिंदू धर्म में दान-पुण्य का विशेष महत्व है, लेकिन इस दौरान इन चीजों का दान भूलकर भी नहीं करना चाहिए।
ये ना करें, ये करें
पितृ पक्ष के दौरान घर या छत पर आए कौवे के लिए ग्रास निकालें या कुछ अनाज के दाने जरूर खिलाएं। इस पर गुस्सा दिखाने या भगा देने से पितर नाराज हो सकते हैं। इससे आपको परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। शास्त्रों में बताया गया है कि पितृ पक्ष के 15 दिन तक पितरण कौवे द्वारा ही अन्न ग्रहण करते हैं। इससे उनके आत्मा को तृप्ति मिलती है। साथ ही परिजनों को उनका आशीर्वाद भी मिलता है। घरों में सुख शांति और सकारात्मकता का प्रवाह होता है।
कुत्ता-गाय को जरूर कुछ खिलाएं
कुत्ते यम के दूत माने जाते हैं। बता दें कि श्राद्ध पक्ष के दौरान पंचबली भोग लगाए जाते हैं। इस भोग में कुत्ते और गाय के नाम का भी भोग लगाया जाता है। इसलिए पितृ पक्ष के समय यदि गाय या कुत्ते घर पर आ रहे हैं तो इन्हें शुभ माना जाता है। इन्हें अनाज या कुछ भी खाने को जरूर दें। यहां तक कि घर के बाहर भी इन्हें देख कर इनका सम्मान करें। पितृ पक्ष में गौ माता की सेवा करने से पितर बहुत प्रसन्न होते हैं। वे अपना आशीर्वाद सदैव आप पर बनाए रखेंगे।
गरीब-जरूरतमंद या अंजान को भोजन कराएं
पितृ पक्ष के दौरान घर आए मेहमान, गरीब, लाचार, बेबस आदि को दुत्कारें नहीं। मान्यता है कि इस दौरान पितरण किसी भी रूप में आपके द्वार आ सकते हैं। ऐसे में उनका सम्मान करें। उन्हें खाना-पीना के साथ उचित दक्षिणा भी दें। इन्हें कभी भी खाली हाथ न लौटाएं। कहते हैं यह पितर द्वारा परीक्षा होती है। इसे अवश्य पूरा करें।

