मुजफ्फरनगर। स्वामी उमाकांतानंद सरस्वती जी महाराज जी ने कहा कि दुनिया में एकमात्र सनातन ही वह विचार है जो वसुधैव कुटुंबकम के मार्ग को दिखाता है। उन्होंने कहा कि धर्म निरपेक्ष कुछ नहीं होता, क्योंकि धर्म तो धारणा है। यही कारण है कि धर्म के नाम पर पंथ चाहे जितने हों पर उनका मूल सनातन है।
नई मंडी रामलीला भवन में शताब्दी वर्ष पर आयोजित प्रभु राम की कथा का सुभाषित वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि ॐ तत्व सृष्टि का आधार है। ईश्वर एक है। उसके स्वरूप विभिन्न हैं। उन्होंने कहा कि ब्रहमा रचियता हैं, विष्णु पालक हैं और शिव नियंता हैं। ऐसे में इनमें भेद नहीं है। सब ईश्वर के विभिन्न रूप हैं। उन्होंने कहा कि आज पंथ और जाति के नाम पर फैलाया जा रहा भेद दुर्भाग्यपूर्ण है। विश्व में तमाम पंथों के मानने वाले अनेक देश हैं किंतु हिन्दू के नाम पर एकमात्र नेपाल है, जिसे निशाना बनाया जा रहा है। भारत हिंदुत्व के आधार पर तो है लेकिन पंथ निरपेक्षता का पालन कर रहा है।
उन्होंने कहा कि महादेव ने सती को निराकार को साकार बनने की कथा सुनाते हुए कहा कि जो ज्ञानी है उसे जानने की जरूरत नहीं क्यों कि वह सब जानता है, एक अज्ञानी है जो जानने की इच्छा नहीं रखता और एक वह अज्ञानी है जिसके पास सवाल होते हैं पर वह जीवन भर जवाब ही ढूंढता रहता है। उन्होंने कथा कि कथा सुनने का पात्र वही है जो वास्तव में सुनना और गुणना चाहता है। कथा सुनने का अवसर भी भागवत कृपा से मिलता है। उन्होंने कहा कि महादेव रामकथा सुनाते हुए कहते हैं कि सत्य वही है जो बदलता नहीं। राम वही सत्य हैं, जो मंगल भवन और अमंगल हारी हैं। उन्होंने कहा कि अयोध्या में श्री राम मंदिर में भगवान श्री राम जी की बाल छवि इसलिए स्थापित की गई क्यों कि यह सहज और सरल होने के साथ लोकमंगल कारी रूप है। उन्होंने कहा कि तपस्या का अर्थ मन का संतुलन पाना है, लेकिन विपरीत परिस्थितियों में संतुलन रखना परम तपस्या है। उपवास शरीर की शुद्धि करता है, किंतु केवल भूखे रहने से प्रभु को कुछ लेना देना नहीं है। सात्विक खाने और चिंतन से ही परमात्मा के मिलने का मार्ग प्रशस्त होता है। उन्होंने कहा कि बहुत उपासना विधियां, तंत्र मंत्र साधना हैं। प्रवचन मार्ग दिखाता है लेकिन आंख पर पट्टी बंधी हो तो कुछ नहीं दिखता। ईश्वर अंदर ही है, बस स्थिर हो जाएं। स्वाध्याय ईष्ट को प्राप्त करने का माध्यम है। स्वाध्याय स्वयं को पढना है। ईष्या द्वेष का घूंघट हट जाए तो माला कंठी की जरूरत नहीं है। हमारी निष्ठा और समर्पण ही उसे मिलाता है। सब मेरा है कहने के बजाय कहें सब तेरा है। बस यहीं से परमात्मा मिलेगा क्योंकि वह अंदर ही है। तीर्थों में भगवान को बताने वाले तो मिल जाएंगे, पर भगवान तो स्वयं के भीतर ही खोजना होता है। कथा का श्रवण करते अतिथि के रूप में पहुंचे योगेंद्र मित्तल(राजू )जेबी स्टील सपरिवार, प्रवीण गोयल डायरेक्टर स्वास्तिक रबर, कमेटी के संरक्षक भीम सेन कंसल, अध्यक्ष संजय मित्तल, और मंत्री अशोक गर्ग, कोषाध्यक्ष आदित्य भरतिया, ब्रज गोपाल छारिया, कैलाश चंद ज्ञानी, हरिशंकर तायल, राजीव अग्रवाल, अभिषेक कुच्छल, संजय जिंदल काका, प्रवीण कुमार,एडवोकेट विवेक गर्ग, राजेश गोयल, उपेंद्र मित्तल, विदित गुप्ता, अनिल गोयल, ऋषि राज राही, सुभाष गुप्ता, नरेश गुप्ता, मुकेश गुप्ता,विनोद संगल एवं उपस्थित श्रद्धालुगण | कमेटी के अध्यक्ष संजय मित्तल ने बताया कि कल श्री राम कथा में प्रभु श्री राम क़े जन्म का कथा व्यास द्वारा बहुत ही सुंदर वर्णन किया जाएगा |


