दीपोत्सव के प्रमुख पर्व धनतेरस पर माता लक्ष्मी, कुबेर और धन्वंतरि की आराधना की जाती है। देवी लक्ष्मी और कुबेर की कृपा से व्यक्ति के धन और संपत्ति में वृद्धि होती है। इस दिन की पूजा से सुख और समृद्धि बढती है। धन्वंतरि की पूजा करने से व्यक्ति की स्वास्थ्य में सुधार होता है और परिवार के सदस्य स्वस्थ रहते हैं।
धनतेरस की त्रियोदशी तिथि 29 अक्तूबर को प्रातः 10 बजकर 31 मिनट से प्रारंभ होगी और 30 अक्तूबर को अपराह्न 1 बजकर 15 मिनट पर समाप्त होगी। इस दिन प्रदोष काल शाम 5 बजकर 38 मिनट से रात 8 बजकर 13 मिनट तक रहेगा। धनतेरस के लिए 29 अक्तूबर को गोधूली काल शाम 6 बजकर 31 मिनट से रात 8 बजकर 31 मिनट तक रहेगा। इस प्रकार, धनतेरस के पूजन के लिए कुल 1 घंटा 42 मिनट का समय उपलब्ध होगा। भगवान धन्वंतरी आपको सुख वैभव और आरोग्य दें यही कामना है।
Author: Taja Report
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