नई दिल्ली। एक गैर-दलित महिला और दलित पुरुष से शादी में तलाक के बाद दो बच्चों को एससी सर्टिफिकेट बनवाकर देने के आदेश सुप्रीम कोर्ट ने दिए हैं।
तलाक के बाद महिला दोनों बच्चों के साथ मायके रहने लगी थी। मामला अदालत पहुंचा। अब सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 142 तक खुद को मिले असाधारण अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए महिला और पुरुष की शादी को रद्द कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने पुरुष को वन टाइम सेटलमेंट के तौर पर महिला को 42 लाख रुपये का भुगतान करने, प्लॉट का मालिकाना हक देने और बच्चों की पोस्टग्रैजुएट तक पढ़ाई का सारा खर्च वहन करने का आदेश दिया है। शीर्ष अदालत ने इस मामले में स्पष्ट किया कि गैर-दलित महिला को भले ही शादी के आधार पर एसएसी का दर्जा नहीं मिल सकता, लेकिन एससी से पैदा हुए उसके दोनों बच्चों को तलाक के बाद भी एससी का दर्जा मिलेगा। सुप्रीम कोर्ट ने पति को आदेश दिया है कि वह 6 महीने के भीतर बच्चों को एसएसी सर्टिफिकेट बनवाकर दे।

