लखनऊ । दशकों तक जुर्म और सियासत की सांप सीढ़ी के खेल के मास्टर रहे मुख्तार अंसारी को मौत ने खामोशी से दबोच लिया लेकिन इस पर सियासी बवंडर तय है। खासकर तब जबकि चुनाव का मौसम है।
लंबे समय तक पूर्वांचल की राजनीति पर दबदबा रखने वाले मुख्तार अंसारी को योगी आदित्यनाथ सरकार के कार्यकाल में बुरे दिन देखने पडे। मुख्तार अंसारी को आठ मामलों में अब तक सजा मिल चुकी थी। फर्जी आर्म्स लाइसेंस केस में मुख्तार को उम्रकैद की सजा दी गई थी। दो सजा पर कोर्ट की रोक के मामले को छोड़ भी दें तो मुख्तार अंसारी छह मामलों में सजायाफ्ता था। मुख्तार का पूरा परिवार भी इस समय कानूनी मामले में फंसा है। गाजीपुर से बसपा सांसद और मुख्तार के बड़े भाई अफजाल को भी गैंगस्टर एक्ट में चार साल की सजा सुनाई गई थी। इस मामले में संसद सदस्यता भी छिन गई। हालांकि, बाद में कोर्ट ने सजा पर रोक लगाई तो अफजाल की सदस्यता फिर से बहाल हो गई। एक बार फिर उसे समाजवादी पार्टी ने गाजीपुर से उम्मीदवार बनाया है। मुख्तार की मौत पर सबसे पहले सपा ने ही प्रतिक्रिया व्यक्त की।

