इंडिया गठबंधन के नेता व बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव को गिरफ़्तार करने के लिए सीबीआई के सह निदेशक यू एन विश्वास को ब सेना की तैनाती हेतू पत्र लिखना पड़ा था–अशोक बालियान, चेयरमैन,पीजेंट वेलफेयर एसोसिएशन
कुछ दिन पहले दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया की गिरफ्तारी के बाद मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और विपक्ष के सात अन्य दलों के नेताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखी थी। इन नेताओं ने पत्र में केंद्रीय जांच एजेंसियों के दुरुपयोग के आरोप लगाए गए थे।
पीएम को पत्र लिखने वालों में अरविंद केजरीवाल (आप), के. चंद्रशेखर राव (बीआरएस), ममता बनर्जी (तृणमूल कांगेस), भगवंत मान (आप), तेजस्वी यादव (राजद), फारूक अब्दुल्ला (जेकेएनसी), शरद पवार (एनसीपी), उद्धव ठाकरे (शिवसेना, यूबीटी), अखिलेश यादव (सपा) का नाम शामिल थे।
यह भी विदित है कि प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिखने वाली पार्टियां के अनेक नेता भ्रष्टाचार में लिप्त है और पत्र लिखने वालों में तेजस्वी यादव (राजद) के पिता व बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू यादव को भ्रष्टाचार में सजा हो चुकी है।
एक तरफ दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया शराब घोटाले में गिरफ्तार हुए है,वहीँ जमीन के बदले नौकरी घोटाला यानी लैंड फॉर जॉब स्कैम मामले में लालू यादव और उनके परिवार की मुश्किलें बढ़ती जा रहीं हैं। लैंड फॉर जॉब स्कैम मामले में केंद्रीय जांच एजेंसी (सीबीआई) के बाद अब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने भी एक्शन शुरू किया हुआ है। ये घोटाला 14 साल पुराना है। तब केंद्र में यूपीए की सरकार थी और लालू यादव रेल मंत्री थे। इस मामले में पिछले साल 18 मई को सीबीआई ने केस दर्ज किया था। उस समय बिहार के मुख्यमंत्री लालू यादव ने भी उसी तरह की धमकियां दी थी जैसे धमकी अब लालू यादव का परिवार दे रहा है।
सीबीआइ के सह निदेशक यू एन विश्वास को लालू यादव को गिरफ्तार करने के लिए बहुत संघर्ष करना पड़ा था। 11 मार्च 1996 को पटना हाईकोर्ट द्वारा चारा घोटाला के सीबीआई को दिए गए जांच के आदेश दिए थे। सीबीआइ के सह निदेशक यू एन विश्वास को वर्ष 1997 में अपनी जाँच के बाद लगा था कि अब मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव को गिरफ्तार करना पड़ेगा, लेकिन बिहार पुलिस ने लालू प्रसाद यादव को गिरफ्तार करने से साफ इनकार कर दिया था। सीबीआई ने बिहार के मुख्य सचिव बी पी वर्मा से संपर्क करना चाहा, लेकिन मुख्य सचिव के ऑफिस से कहा गया कि वह उपलब्ध नहीं हैं।
उस समय बिहार के गृह सचिव डीपी माहेश्वरी, मुख्य सचिव बीपी वर्मा और डीजीपी एस के सक्सेना थे। पटना की जिलाधिकारी राजबाला वर्मा, आयुक्त राजकुमार सिंह व् एसएसपी सुनील कुमार थे। कोर्ट के गिरफ्तारी के आदेश होने के बाद भी लालू प्रसाद यादव को गिरफ्तार करने के लिए सीबीआई उच्च अधिकारियों के आलावा पटना जिलाधिकारी के पास भी गई थी, लेकिन उन्हें जिलाधिकारी राजबाला वर्मा से किसी प्रकार का कोई सहयोग नहीं मिला था।
इसके बाद सीबीआई के ज्वाइंट डायरेक्टर यू एन विश्वास ने रैपिड एक्शन फोर्स के डीआइजी से पुलिस बल की मांग की थी, तदुपरांत पुलिस बल सीबीआइ के कार्यालय पर पहुंच भी गया था, परंतु जिलाधिकारी राजबाला वर्मा ने बल के डीआइजी को स्पष्ट निर्देश दे दिया था कि बिना उनकी इजाजत के पुलिस बल एक कदम भी आगे नहीं बढ़ेगा।
उस दिन बिहार के मुख्य सचिव, डीजीपी व् पटना के एसएसपी ने अपने मोबाइल बंद कर लिए थे और लैंडलाइन फोन पर भी उपलब्ध नहीं थे।
उस समय प्रदेश के सभी अधिकारीयों का ऐसा व्यवहार यह साबित करता था कि उस वक्त कानून और संविधान का सत्ता कैसे इस्तेमाल कर रही थी और कैसे प्रशासन के आला अधिकारी यह सब करने में सत्ता को पूरा साथ दे रहे थे।
इस विकट स्थिति से निपटने के लिए सेना की तैनाती की चर्चा होने लगी थी। भारत के इतिहास में यह पहला मौका था, जब सीबीआई के संयुक्त निदेशक यूएन विश्वास ने लालू प्रसाद यादव की गिरफ्तारी के लिए सेना को बुलाने की चिट्ठी लिखी थी, क्योकि बिहार प्रशासन ने उच्चतम न्यायालय के आदेश का अनुपालन करने से इनकार कर दिया था। इसके बाद दबाव में लालू प्रसाद यादव को झुकना पड़ा था और अगली सुबह लालू प्रसाद यादव ने सीबीआई कोर्ट में सरेंडर कर दिया था।
इस केस की जाँच के दौरान बिहार के मुख्यमंत्री लालू यादव ने उस समय के देश के प्रधानमंत्री देवगौड़ा पर चिल्लाते हुए कहा था कि आपको इसलिए प्रधानमंत्री नहीं बनाया था कि आप मेरे खिलाफ जाँच कराए और यह सब अच्छा नहीं हो रहा है जो आप करवा रहे हैं, इसका अंजाम बहुत बुरा होगा। इसके जबाब में प्रधानमंत्री देवगौड़ा ने कहा कि पटना हाईकोर्ट ने चारा घोटाला में सीबीआई को जांच के आदेश दिए गए थे, हमने नही दिए है।
शुरू-शुरू में मुख्यमंत्री लालू यादव ने इस जाँच को गरीबों व दलितों-कुचलों के महानायक पर हमला बताया था। और अगड़ी जातियों द्वारा एक पिछड़ी जाति के नेता को राजनीति में बर्दास्त नहीं किया जा रहा है।
इसके बाद लालू यादव ने प्रधानमंत्री देवगौड़ा को ही हटाने के लिए कोशिश शुरू कर दी थी। एचडी देवगौड़ा को प्रधानमंत्री पद से हटना पड़ा। इस बार लालू यादव ने इंद्र कुमार गुजराल का नाम आगे कर दिया था। लालू यादव ने गुजराल को फोन किया कि गुजराल जी, हम गाड़ी भेज रहे हैं, आ जाइए। आपको प्रधानमंत्री बनना है। लालू यादव ने ही उन्हें राज्यसभा में भेजा था।
दूसरी ओर दिल्ली में उस वक्त के गृहमंत्री इंद्रजीत गुप्ता ने संसद को बताया कि पटना पहुंचे सीबीआई अधिकारियों ने मदद के लिए दानापुर कैंट के ऑफिसर इंचार्ज को पत्र लिखा है। हालांकि सेना के अफसर ने उस समय कहा था कि सेना सिर्फ अधिकृत सिविल अथॉरिटीज के अनुरोध पर ही मदद मुहैया कराती है और इस मामले में आगे सेना मुख्यालय के निर्देश पर ही कार्रवाई होगी।
तब केंद्र सरकार पर लालू यादव का दबाव इस बात को लेकर था कि तत्कालीन प्रधानमंत्री आई के गुजराल उनकी पसंद से प्रधानमंत्री बने थे और वो बिहार से राज्य सभा में गये थे। जब सीबीआइ के सह निदेशक यू एन विश्वास ने रैपिड एक्शन फोर्स के डीआइजी से पुलिस बल की मांग की थी और इसके बाद पुलिस बल सीबीआई के कार्यालय पर पहुंच भी गया था, परंतु राजबाला वर्मा ने बल के डीआइजी को स्पष्ट निर्देश दे दिया था कि बिना उनकी इजाजत के पुलिस बल एक कदम भी आगे नहीं बढ़ सकता।
उस दिन मुख्य सचिव, डीजीपी, एसएसपी ने मोबाइल बंद कर दिया था, लैंडलैंलाइन पर भी उपलब्ध नहीं थे। घर-ऑफिस से गायब हो गये थे। पूरा प्रशासन कानून की धज्जियां उड़ा रहा था. सीबीआइ के अधिकारियों ने अपने प्रतिवेदन में अंकित किया था कि पटना जिला प्रशासन द्वारा लालू प्रसाद को गिरफ्तार करने के उच्चतम न्यायालय के आदेश का अनुपालन करने से इनकार कर दिये जाने के कारण उन्हें सेना की मदद लेने के लिए विवश होना पड़ा है।
यह घटना 29 जुला ई 1996 की है। सीबीआइ द्वारा लालू प्रसाद की गिरफ्तारी के लिए सेना की मदद मांगे जाने के अगले दिन 30 जुलाई को लालू प्रसाद आत्मसमर्पण करने के लिए तैयार हुए थे।
इस केस के बाद कभी केंद्र में प्रधानमंत्री तक बनाने की बात करने वाले लालू प्रसाद यादव की साख खोनी शुरू हो गई थी। लालू प्रसाद यादव का अब बिहार में अधिक असर नहीं रहा है। वह काफी लम्बे समय हंसी-मजाक करके भी मीडिया में बने रहे थे। इस केस में कोर्ट ने समाज को एक मैसेज दिया है, जो गलत करेगा वो बख्शा नहीं जाएगा।
लेकिन आज लालू यादव इंडिया गठबंधन के प्रमुख नेता बने हुए है और संविधान बचाने के लिए मोदी सरकार को हटाने की बात कर रहे है।

