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*गरुण पुराण*
*मोक्ष कैसे प्राप्त किया जा सकता है?*
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*अज्ञान के कारण जीव जन्म मरण रूपी संसार चक्कर में पड़ता है सभी प्रकार के दुखों से मलिन तथा साररहित इस भयावह संसार में अनेक प्रकार के शरीर धारण करके अनंत जीवराशियां उत्पन्न होती है और मरती है, उनका कोई अंत नहीं है, ये सभी सदा दुख से पीड़ित रहते हैं।*
*”भगवान श्री कृष्ण ने भगवत गीता में इस भौतिक संसार को दुखों का एक सागर कहां है और भगवान श्री कृष्ण भगवत गीता में कहते हैं जो मनुष्य सभी धर्मों को छोड़कर और सभी भौतिक चीजों का प्रलोभन त्याग कर मेरे शरण में आता है ऐसा मनुष्य तुरंत आवागमन के चक्कर से मुक्त हो जाता है”*
*परमात्मा का नाम सुनने मात्र से मनुष्य दुखों के संसार से तुरंत मुक्त हो जाता है वह परमब्रह्मा परमात्मा, शिवस्वरूप, सर्वज्ञ सर्वेश्वर, निर्मल तथा कलारहित है वह परमात्मा स्वयं प्रकाश है अनादि, अनंत, निर्गुण और सच्चिदानंद स्वरूप है प्रत्येक जीव उसी का अंश है जैसे अग्नि से बहुत सी चिंगारियां निकलती हैं उसी प्रकार अनादिकालीन अविद्या से युक्त होने के कारण अनादिकाल से किए जाने वाले कर्मों के परिणामस्वरूप देहादि उपाधि को धारण करके जीव भगवान से पृथक हो गए हैं वे जीव प्रत्येक जन्म में पुण्य और पापरूप सुख-दुख प्रदान करने वाले कर्मों से नियंत्रित होकर तत्ततू जाति के योग से देह (शरीर), आयु, कर्मानुरोधी भोग प्राप्त करते हैं यह दुर्लभ मनुष्य शरीर प्राप्त करके इस जन्म मरण के चक्कर से जो मनुष्य अपने आप को मुक्त नहीं कर लेता उससे अधिक पापी और कौन होगा?*
*8400000 योनियों में घूमने के बाद मनुष्य जीवन मिलता है यदि मनुष्य ज्ञानी हो जाए तो मोक्ष प्राप्त कर सकता है मनुष्य योनि के अलावा अन्य किसी योनि में तत्वज्ञान प्राप्त नहीं किया जा सकता, उत्तम मनुष्य शरीर में जन्म प्राप्त करके और समस्त संपन्न अविकल इंद्रियों को प्राप्त करके भी जो व्यक्ति अपने हित को नहीं जानता, उससे बड़ा ब्रह्मघातक कौन होगा? शरीर के बिना कोई भी जीव पुरुषार्थ नहीं कर सकता, इसलिए शरीर और धन की रक्षा करते हुआ इन दोनों से पुण्योपार्जन करना चाहिए, मनुष्य जीवन में ही मोक्ष पाया जा सकता है शरीर की रक्षा धर्माचरण के उद्देश्य से और धर्माचरण ज्ञानप्राप्ति के उद्देश्य से ज्ञान, ध्यान एवं योग की सिद्धि के लिए और फिर ध्यानयोग से मनुष्य अविलंब मोक्ष प्राप्त कर लेता है।*
*”गुरुड पुराण के अनुसार भगवान श्री कृष्ण का मंगलमय नाम जिस वाणी से उच्चारित होता है ऐसे मनुष्य के करोड़ों-करोड़ों जन्मों के पाप तत्काल भस्म हो जाते हैं*
*”गुरुड़ पुराण के अनुसार यमराज ने अपने किंकरो को आदेश दिया हुआ है मेरे पास ऐसे लोगों को मत लेकर आया करो जो भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति करता हो, मेरे पास केवल ऐसे लोगों को लेकर आया करो जो भगवान श्री कृष्ण की भक्ति नहीं करता क्योंकि मैं स्वयं चौबीसों घंटे भगवान श्री कृष्ण की भक्ति करता रहता हूं”*
*”गुरुड़ पुराण के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण की शुद्ध भक्ति करने वाले लोगों का यमपुरी के अति प्रतिष्ठित पश्चिमी द्वार से प्रवेश होता है यमपुरी के पश्चिमी द्वार का अन्य तीनों द्वारों से विशेष महत्व है यमपुरी का पश्चिमी द्वार रत्नजड़ित भवनों से सुशोभित है यमपुरी की अप्सराएं हाथों में फूलों की थैलियां लेकर कृष्ण भक्तों का स्वागत करने के लिए चौबीसों घंटे पश्चिमी द्वार पर उपस्थित रहती हैं यमपुरी की अप्सराएं अपने हाथों से कृष्ण भक्तों को अमृतपान करवाते हुए यमराज के दरबार में ले जाती हैं यमराज भी अपने सिंहासन से उठकर कृष्ण भक्तों का स्वागत करने के लिए खड़े हो जाते हैं यमराज कृष्ण भक्तों को बार-बार सिंहासन पर बैठने के लिए प्रार्थना करते हैं यमराज अपने सभी सभासदों को कृष्ण भक्तों को बार-बार नमस्कार करने के लिए प्रेरित करते हैं और कृष्ण भक्तों से अपने सभासदों का परिचय करवाते हैं यमराज अपने सभासदों को कहते हैं, यह सभी कृष्ण भगत हमारे लोक का भेेदन करके अब ब्रह्मलोक में चले जाएंगे”*
*इस कलयुग में केवल भगवान श्री कृष्ण ही मोक्ष देने में समर्थ है क्योंकि भगवान श्री कृष्ण का मंगलमय नाम मोक्ष की सीढ़ी है भगवान श्री कृष्ण का मंगलमय नाम कोई अंधविश्वास नहीं है बल्कि दूषित आत्माओं को शुद्ध आत्माओं में बदलने की एक वैज्ञानिक प्रक्रिया है इस वैज्ञानिक प्रक्रिया द्वारा कृष्ण भावनामृत की अनिवार्यता है कृष्ण भावनामृत मनुष्य बार-बार इस भौतिक संसार में जन्म नहीं लेता और भगवान श्री कृष्ण के धाम का अधिकारी बन जाता है “गरुड़ पुराण के अनुसार विष्णु हरि परमात्मा है जो यमराज द्वारा दिए गए सभी दंडों को माफ करने में समर्थ है और भगवान श्री कृष्ण विष्णु के आठवे अवतार है !*
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डिसक्लेमर
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