मुजफ्फरनगर। श्री राम कॉलेज के कृषि विभाग एवं पशुपालन विभाग के तत्वावधान में विश्व रेबीज दिवस पर “जानवरों से इन्सानों में रेबीज बीमारी के फैलना” विषय पर एक दिवशीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस आयोजन का शुभारंभ डॉ जितेंदर गुप्ता चीफ वेटरनरी अधिकारी, डॉ राजीव त्यागी, वेटरनरी अधिकारी, मुज़फ्फरनगर, डॉ प्रेरणा मित्तल, प्राचार्य, श्री राम कॉलेज, डॉ विनीत कुमार शर्मा, डीन आई क्यू ए सी, डॉ मो नईम विभागाध्यक्ष कृषि विभाग के द्वारा द्वीप प्रज्जवलित कर किया गया। डॉ जितेंदर गुप्ता ने बताया की रेबीज एक खतरनाक वायरस है, जो कुत्तों के काटने या चाटने से फ़ैल सकता है। तथा यह वायरस लम्बे समय तक मनुष्य की शरीर में स्थिर रूप से पड़ा रहता है तथा अनुकूल दशा मिलते ही शरीर में फ़ैल जाता है, जिसके कारण मृत्यु हो जाती है। इसका बचाव करने के लिए सभी कुत्तों या उन जानवरों को जिनसे रेबीज फ़ैल सकता है उनको वेक्सिनेशन कराना अनिवार्य है| यह वैक्सीन आपके आसपास सरकारी पशु चिकित्शालयों पर उपलब्ध हो सकती है।
एक जानवर से दूसरे जानवर में
कुत्तों के काटने या चाटने से बचना है तो इसका ध्यान रखें कि वह कुत्ता जो मुँह नीचे की तरफ मुँह से लार गिराते हुए एवं पानी से बचकर चलता है, उससे बचे| क्योंकि उसको रेबीज हो चुका होता है। यह वायरस कुत्तो से कुत्तों में काटने व चाटने से फ़ैल जाता है। जिसमें वे 40 किलोमीटर के दायरे तक के कुत्तों को संक्रमित कर सकते है। इसलिए एंटीरेबीज का इंजेक्शन कुत्तो को लगना अनिवार्य है। यदि किसी मनुष्य को कुत्ता काट या चाट लेता है तो उस समय उसको साबुन से धोये एवं धुप में निकले तथा बिना किसी देरी के इसका छे: वैक्सीन शून्य, तीसरे, सातवें, चौदवे, अट्ठाइसवें एवं अठानवे दिन पर आवश्यक रूप से लगवाएं| कुत्ता काटने की समस्या 6 से 16 साल की उम्र के बच्चो में ज्यादा है। यह बीमारी नर्वस सिस्टम पर कण्ट्रोल करता है, जो पीड़ित व्यक्ति के ब्रेन पर कण्ट्रोल कर ह्रदय को पैरालाइज कर देती है, इससे उसकी मौत हो जाती है।
सही समय पर सही कदम
डॉ राजीव त्यागी ने बताया की रेबीज (Rabies) एक अत्यंत घातक और जानलेवा वायरल बीमारी है, जो मुख्य रूप से संक्रमित जानवरों के काटने या छूने से मनुष्यों में फैलती है। यह वायरस शरीर के केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (मस्तिष्क) को प्रभावित करता है। एक बार इसके लक्षण दिखने के बाद यह बीमारी 100% जानलेवा हो जाती है, लेकिन सही समय पर सही कदम बढ़ाकर इसे 100% रोका जा सकता है।जानवर के काटने पर तुरंत किए जाने वाले प्राथमिक उपाय काटने वाले स्थान को तुरंत बहते पानी और साबुन से कम से कम 15 मिनट तक अच्छी तरह धोएं। ऐसा करने से वायरस का एक बड़ा हिस्सा नष्ट हो जाता है। एंटीसेप्टिक लगाएं धोने के बाद घाव पर आयोडीन (जैसे बीटाडिन) या अल्कोहल युक्त एंटीसेप्टिक लगाएं। घाव पर पट्टी बांधने या टांके लगवाने के बजाय सीधे नजदीकी सरकारी अस्पताल या डॉक्टर से संपर्क करें। एंटी-रेबीज वैक्सीन (ARV) डॉक्टर द्वारा तय किए गए शेड्यूल के अनुसार वैक्सीन के टीके लगवाएं। टीका लगवाने में बिल्कुल भी देरी या लापरवाही न करें, क्योंकि शेड्यूल बदलने पर वैक्सीन बेअसर हो सकती है। रेबीज इम्युनोग्लोबुलिन (RIG) अगर घाव बहुत गहरा है, तो डॉक्टर तुरंत संक्रमण से लड़ने के लिए घाव के आस-पास रेबीज इम्युनोग्लोबुलिन (सीरम) का इंजेक्शन भी देते हैं।डॉ प्रेरणा मित्तल ने बताया की लोहे से चोट लगने पर आम बोलचाल में जिसे ‘सेप्टिक होना’ कहा जाता है, वह असल में बैक्टीरियल इन्फेक्शन (संक्रमण) या टिटनेस (Tetanus) का खतरा होता है। इसका तुरंत और सही इलाज बेहद जरूरी है ताकि संक्रमण पूरे शरीर में न फैले घाव को साफ करें: चोट लगते ही घाव को तुरंत साफ बहते पानी और साबुन से अच्छी तरह धोएं ताकि वहां जमा धूल, मिट्टी या जंग निकल जाए। दबाव बनाएं अगर खून बह रहा है, तो एक साफ कपड़े से घाव को हल्के हाथों से दबाकर खून रोकने की कोशिश करें।एंटीसेप्टिक क्रीम: घाव साफ करने के बाद उस पर कोई अच्छी एंटीसेप्टिक क्रीम या लिक्विड लगाएं।टिटनेस का इंजेक्शन (Tetanus Injection)24 से 48 घंटे के भीतर लोहे से चोट लगने पर सबसे जरूरी काम टिटनेस का टीका लगवाना है। इसे आदर्श रूप से चोट लगने के 24 से 48 घंटों के भीतर लगवा लेना चाहिए।डॉ विनीत कुमार शर्मा ने बताया की हमारे कॉलेज में एंटीरेबीज से सम्बंधित समिति बनी हुए यदि कोई भी इस प्रकार की घटना सामने आती है तो उसके उपचार में मदद की जाती है तथा पशुओ के डॉक्टर से उसका इलाज समय कराया जा सके। डॉ मो नईम ने बताया की यदि किसी संक्रमित जानवर की लार आपकी खुली त्वचा, आँख, नाक या मुँह के संपर्क में आ जाए, तो भी यह वायरस फैल सकता है। पालतू जानवरों का टीकाकरण अपने पालतू कुत्तों और बिल्लियों को 4 महीने की उम्र के बाद कानूनन रेबीज का टीका जरूर लगवाएं और हर साल इसका बूस्टर डोज दिलवाएं। अज्ञात जानवरों से दूरी आवारा, बीमार या जंगली जानवरों को छूने या उनके करीब जाने से बचें। आवारा कुत्तों का प्रबंधन के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, सामुदायिक स्तर पर आवारा कुत्तों का बड़े पैमाने पर टीकाकरण और उनकी नसबंदी करके रेबीज को पूरी तरह नियंत्रित किया जा सकता है। इस प्रोग्राम का संचालन डॉ स्नेह यादव, सहायक अध्यापक, कृषि विभाग ने किया। प्रोग्राम में डॉ विपिन नैन एवं जिले के अधिकतम पशु पालन चिकित्षक, कृषि विभाग श्री राम कॉलेज के डॉ परवीन मालिक, डॉ अंजलि जाखड़, डॉ संतोष, डॉ अक्षय कुमार, डॉ रीनू कुमार, डॉ विपिन कुमार सैनी, विकाश त्यागी, सालनि मिश्रा, एवं सभी विद्यार्थी मौजूद रहे।


