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किसानों ने सर्वसम्मति से किया सिंधु जल संधि को निरस्त करने का प्रस्ताव 

मुजफ्फरनगर। आज भारत सरकार में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा सिंधु जल संधि पर किसानों से संवाद का आयोजन पूसा में एपीजे सिंधु हाल में किया गया।

कार्यक्रम में हरियाणा,पंजाब,राजस्थान,उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश,के किसानों ने भाग लिया। कार्यक्रम में भारतीय किसान यूनियन अराजनैतिक के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेश सिंह चौहान,राष्ट्रीय उपाध्यक्ष महेंद्र सिंह रंधावा,राष्ट्रीय महासचिव/प्रवक्ता धर्मेंद्र मलिक,राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मांगेराम त्यागी, राष्ट्रीय सचिव उम्मेद सिंह, बाबा श्याम सिंह मलिक, आगरा मंडल अध्यक्ष राजकुमार तोमर ,राजेन्द्र सिंह,विपिन त्यागी राजीव बालियान, सुधीर पंवार, रामपाल जाट, हरपाल डागर,सलविंदर सिंह कलसी सहित सैकड़ों किसान मौजूद रहे।

संवाद कार्यक्रम को अशोक बालियान, राजेश सिंह चौहान,धर्मेंद्र मलिक सलविंदर सिंह कलसी, बाबा श्याम सिंह, रामपाल जाट,हरपाल डागर,रामपाल जाट ने संबोधित किया। धर्मेंद्र मलिक ने कहा कि हमें कानूनी अधिकार है इस संधि पर पुनर्विचार एवं समाप्त करने का निर्णय लेने का अगर देश की नदियों का पानी दुश्मन देश प्रयोग करे तो यह हमारे लिए शर्म की बात है।

भारत सरकार किसानों को पानी दिए जाने का कार्य करे तो किसान दूसरी हरित क्रांति लाने को तैयार है। भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक), भारत सरकार द्वारा उठाए गए इन प्रभावशाली और दृढ़ संकल्पों का पूर्ण समर्थन करती है और आशा करती है कि देश की सुरक्षा और किसानों के कल्याण के लिए इसी प्रकार के कठोर एवं निर्णायक निर्णय आगे भी लिए जाते रहेंगे।हम भारत सरकार के हर देशहित के फैसले के साथ है

पीजेन्ट्स वेल्फेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष अशोक बालियान जी ने कहा कि वियना कन्वेंशन (वीसीएलटी) के अनुच्छेद 60 और 62 के अनुसार भारत को भौतिक उल्लंघन या परिस्थितियों में मौलिक परिवर्तन के कारण संधि निलंबन करने का अधिकार है। इस सिंधु जलसंधि के  निलंबन से भारत के लिए जल प्रवाह पर अधिक नियंत्रणरखने का रास्ता खुल गया है, जिसमें शुष्क मौसम के दौरान पानीरोकना और मानसून के दौरान उसे छोड़ देना शामिल है। भारत के इस कदम को एक मजबूत राजनीतिक संदेश के रूप में देखा जा सकता है।

भारतीय किसान यूनियन अराजनैतिक के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री राजेश सिंह चौहान जी ने कहा कि आपके द्वारा दिए गए वक्तव्य कि “सिंधु जल पर हमारे किसानों का अधिकार है और एक-एक बूंद का उपयोग कृषि, बिजली और विकास में किया जाएगा,” अत्यंत प्रेरणादायक है। इस निर्णय से पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख जैसे राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के किसान समुदाय को नई ऊर्जा और अवसर प्राप्त होंगे।

किसानों ने सर्वसम्मति से सिंधु जल समझोते को निरस्त करने का प्रस्ताव पारित किया

 

माननीय श्री शिवराज सिंह चौहान

कृषि मंत्री, भारत सरकार

नई दिल्ली

दिनांक: 19 मई 2025

विषय: जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 26 नागरिको नरसंहार के पश्चात् सिंधु जल संधि के निलंबन एवं ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के संबंध में केंद्र सरकार के निर्णय हेतु समर्थन।

महोदय,

सविनय निवेदन है कि भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) , केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में लिए गए उन ऐतिहासिक नि र्णयों का समर्थन करती है जो जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 26 निर्दोष नागरिकों के नरसंहार के पश्चात् लिए गए।

इस संदर्भ में, भारत सरकार द्वारा पाकिस्तान के साथ की गई सिंधु जल संधि को निलंबित करने तथा भारतीय सेना द्वारा प्रारंभ किए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत पाकिस्तान के आतंकी अड्डों एवं वायु रक्षा प्रणालियों को निष्क्रिय करने के निर्णय को हम एक साहसी और रणनीतिक कदम मानते हैं।

वियना संधि विधि सम्मेलन (VCLT) के अनुच्छेद 60 और 62 के अंतर्गत भारत को संधि के भौतिक उल्लंघन अथवा परिस्थितियों में मौलिक परिवर्तन के आधार पर उसे निलंबित करने का अधिकार प्राप्त है। भारत का यह कदम केवल एक कूटनीतिक संदेश नहीं, बल्कि जल संसाधनों पर स्वायत्तता और राष्ट्रीय सुरक्षा की दिशा में एक निर्णायक कदम है।

सन् 1960 में विश्व बैंक की मध्यस्थता में हुई सिंधु जल संधि के अंतर्गत तीन पूर्वी नदियाँ (रावी, व्यास, सतलुज) भारत को और तीन पश्चिमी नदियाँ (सिंधु, झेलम, चिनाब) पाकिस्तान को आवंटित की गई थीं। पश्चिमी नदियाँ कुल जल प्रवाह का लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा रखती हैं। अब जबकि भारत ने इस संधि को निलंबित किया है, तो इससे भारत को इन जल स्रोतों का अधिकतम उपयोग करने की व्यावहारिक स्वतंत्रता प्राप्त होगी।

आपके द्वारा दिए गए वक्तव्य कि “सिंधु जल पर हमारे किसानों का अधिकार है और एक-एक बूंद का उपयोग कृषि, बिजली और विकास में किया जाएगा,” अत्यंत प्रेरणादायक है। इस निर्णय से पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख जैसे राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के किसान समुदाय को नई ऊर्जा और अवसर प्राप्त होंगे।

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी द्वारा यह स्पष्ट किया गया है कि यदि पाकिस्तान अपनी आतंकी नीतियों में बदलाव नहीं करता, तो ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की कार्यवाही आगे भी जारी रह सकती है।

भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक), भारत सरकार द्वारा उठाए गए इन प्रभावशाली और दृढ़ संकल्पों का पूर्ण समर्थन करती है और आशा करती है कि देश की सुरक्षा और किसानों के कल्याण के लिए इसी प्रकार के कठोर एवं निर्णायक निर्णय आगे भी लिए जाते रहेंगे।

Taja Report
Author: Taja Report

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