बरेली । प्रवक्ता रजनीश गंगवार की विवादित कविता पर बरेली में हिंदू संगठनों ने जताया विरोध
बरेली में लेखक और कवि रजनीश गंगवार की एक कविता पर विवाद खड़ा हो गया है। कावड़ यात्रा को लेकर लिखी गई उनकी कविता में कई विवादित पंक्तियां हैं। जिन्हें वे असेंबली के दौरान बच्चों को सुनाते नजर आ रहे हैं। जैसे ही उनकी कविता गाते हुए वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुई, विरोध शुरू हो गया। वह स्वच्छ भारत मिशन, भारत सरकार के ब्रांड एंबेसडर भी हैं। पहले उस कविता की वो विवादित पंक्तियां पढ़िए जिनको लेकर हंगामा बरपा है—
“कावड़ लेने मत जाना, तुम ज्ञान का दीप जलाना।
मानवता की सेवा करके, तुम सच्चे मानव बन जाना।।”
कांवड़ ढोकर कोई वकील, डीएम एसपी नहीं बना है।
कावड़ जल से कोई बनिया, हाकिम, वैद्य नहीं बना है।
कावड़ से बुद्धि-विवेक का तनिक विकास न होगा।
भांग, धतूरा, गांजा, सुल्फा, मद से कोई उद्धार न होगा।
जाति-धर्म का नशा छोड़कर, स्वकल्याण करो तुम।
शिक्षालय–पुस्तकालय में पढ़, ज्ञान प्रगाढ़ करो तुम।
सत्कर्मों से मानव सेवा कर, प्रेम का दीप जलाना।
कावड़ लेने मत जाना, तुम ज्ञान का दीप जलाना।
मानवता की सेवा करके, तुम सच्चे मानव बन जाना।।
दरअसल, रजनीश गंगवार एमजीएम इंटर कॉलेज में हिंदी के प्रवक्ता हैं। इसके साथ ही NSS कार्यक्रम अधिकारी भी हैं। उनकी कविता को लेकर अब हिंदू संगठनों ने मोर्चा खोल दिया है।


