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काले वाला झील का पुर्नस्थापन व ईको टूरिज्म के रूप में विकसित होगी

मुजफ्फरनगर। जिलाधिकारी उमेश मिश्रा ने आज काले वाला झील का निरीक्षण किया। उन्होंने काले वाला झील का पुर्नस्थापन व ईको टूरिज्म के रूप में वन विभाग द्वारा विकसित किया जा रहा है। उक्त झील का क्षेत्रफल 1150 हेक्टेयर है। जोकि आठ ग्रामों में बसी हुई है। ग्रामों के नाम कमशः 1-अलमावाला 2-जिन्दावाला 3 बहमनबगला, 4-बसेडा-द्वितीय 5-तुगलकपुर 6 गोधना 7-झबरपुर 8-कालेवाला है। उक्त ग्रामों में प्रशासन द्वारा डिमार्केशन का कार्य प्रारम्भ कराया जा चुका है। परन्तु उक्त कार्य अभी तक पूर्ण नहीं हो पाया है। ग्राम अलमावाला, तुगलकपुर व कालेवाला जो कि मैन झील का एरिया है. जिसमें अभी तक डिमार्केशन नहीं किया गया है। जिससे की बाऊंड्री पीलर लगाने का कार्य किया जाना है। जिलाधिकारी ने वन विभाग एवं राजस्व विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए वन विभाग की भूमि एवं राजस्व की भूमि पर जो अवैध कब्जा है, इसको तत्काल कब्जा मुक्त कराकर उस भूमि को संरक्षित करने के निर्देश दिए। उन्होंने वन विभाग को निर्देशित किया की काले वाला झील की भूमि को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाए। काले वाला झील एक ऐसी जगह पर है,जहां पर तरह-तरह के जंगली जानवर तथा तरह-तरह के पक्षियों का रहन-सहन हैं। यह पर्यटकों के लिए बहुत ही आकर्षित करने वाला केंद्र है, पर्यटक यहां पर आकर पर्याप्त लुफ्त उठा सकते हैं।जिलाधिकारी महोदय द्वारा निर्देशित किया गया है कि राजस्व व वन विभाग की संयुक्त टीम गठित कर कब्जामुक्त कराते हुए सीमांकन का कार्य पूर्ण किया जायेगा। ताकि वन विभाग इसको एक ईको टूरिज्म के रूप में विकास कर सकें तथा पुर्नस्थापन के आधार पर इसको विकसित किया जा सकें।

निरीक्षण के अवसर पर उप जिला अधिकारी सदर निकिता शर्मा एवं संबंधित अधिकारी गण उपस्थित रहे।

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Author: Taja Report

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