*जनसेवा से राजनीति के नए लक्ष्य तक: पूर्व पालिकाध्यक्ष अंजू अग्रवाल पॉडकास्ट में साझा किए अपने राजनीतिक जीवन के अनछुए पहलू, 2027 में विधानसभा चुनाव लड़ने की मंशा की स्पष्ट घोषणा*
मुजफ्फरनगर। राजनीति में कुछ व्यक्तित्व ऐसे होते हैं, जिनकी पहचान केवल उनके पद और राजनीतिक उपलब्धियों से नहीं, बल्कि उनके निर्णय लेने के साहस, कार्यशैली और जनता के बीच उनकी सक्रिय उपस्थिति से बनती है। मुजफ्फरनगर की पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष अंजू अग्रवाल का राजनीतिक सफर भी एक ऐसी ही प्रेरक कहानी है। एक प्रतिष्ठित व्यवसायी परिवार की गृहिणी से लेकर नगर पालिका अध्यक्ष और फिर एक चर्चित महिला राजनीतिक व्यक्तित्व बनने तक का उनका सफर अनेक चुनौतियों, संघर्षों, अनुभवों और उपलब्धियों से भरा रहा है।
*स्वर्गीय मूलचंद सर्राफ के प्रतिष्ठित परिवार से जुड़ी अंजू अग्रवाल व्यवसायी एवं समाजसेवी अशोक अग्रवाल की पत्नी हैं। उन्होंने पारिवारिक जिम्मेदारियों के साथ सामाजिक गतिविधियों में भी सक्रिय भागीदारी निभाई। उनका परिवार लंबे समय से व्यापार, उद्योग और सामाजिक सरोकारों से जुड़ा रहा है। उनके पुत्र अभिषेक अग्रवाल उद्योग एवं व्यापार जगत में सक्रिय हैं तथा फेडरेशन ऑफ मुजफ्फरनगर कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज (FMCI) के सचिव होने के साथ अग्रवाल डुप्लेक्स बोर्ड मिल लिमिटेड के निदेशक भी हैं*।
अंजू अग्रवाल का राजनीतिक जीवन वर्ष 2017 में उस समय एक नई दिशा में आगे बढ़ा, जब उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रत्याशी के रूप में नगर पालिका परिषद मुजफ्फरनगर के अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। वर्ष 2017 से 2022 तक अपने कार्यकाल में उन्होंने जिस सक्रियता, स्पष्टवादिता और निडर कार्यशैली का परिचय दिया, उसके चलते जनता के बीच उन्हें ‘आयरन लेडी’, ‘लेडी सिंघम’ और ‘झांसी की रानी’ जैसे संबोधनों से पहचान मिली।
उनके कार्यकाल की उल्लेखनीय उपलब्धियों में नगर पालिका के बिजली खर्च में उल्लेखनीय कमी, वर्षों से लंबित कर्मचारियों की लगभग 9 करोड़ रुपये की पेंशन एवं ग्रेच्युटी का एकमुश्त भुगतान, बिना अतिरिक्त वित्तीय भार के नालों की तली झाड़ सफाई और कोरोना महामारी के दौरान पूरे नगर में निशुल्क सैनिटाइजेशन केमिकल की उपलब्धता सुनिश्चित कराना शामिल रहा।
कोरोना महामारी के कठिन दौर में स्वयं जनता के बीच पहुंचकर सेवा कार्य करना उनके सार्वजनिक जीवन का विशेष रूप से चर्चित अध्याय रहा। इस दौरान उनके परिवार ने भी शहर की सेवा में योगदान दिया।
महिलाओं के नेतृत्व, आत्मनिर्भरता और सामाजिक भागीदारी को केंद्र में रखकर चलाए जा रहे मिशन शक्ति 6.0 अभियान के अंतर्गत ओजस्वी मन न्यूज़ द्वारा आयोजित विशेष पॉडकास्ट सीरीज में चीफ एडिटर पं. दीपक कृष्णात्रेय ने पूर्व पालिकाध्यक्ष अंजू अग्रवाल से उनके राजनीतिक सफर, उपलब्धियों, संघर्षों, भाजपा में शामिल होने के बाद के अनुभवों और मिशन 2027 की राजनीतिक संभावनाओं पर विस्तार से बातचीत की।
प्रस्तुत हैं इस विशेष साक्षात्कार के प्रमुख अंश।
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प्रश्न 1. अंजू जी, आपका परिवार मुजफ्फरनगर के प्रतिष्ठित मूलचंद सर्राफ परिवार से जुड़ा है। एक व्यवसायी परिवार की गृहिणी से सार्वजनिक जीवन और राजनीति तक पहुंचने की शुरुआत कैसे हुई?
अंजू अग्रवाल: मेरा जीवन एक सामान्य गृहिणी के रूप में परिवार की जिम्मेदारियां निभाते हुए आगे बढ़ रहा था। मेरा परिवार हमेशा से सामाजिक और व्यावसायिक गतिविधियों में सक्रिय रहा है। मेरे पति अशोक अग्रवाल व्यवसाय के साथ-साथ समाजसेवा में भी रुचि रखते हैं। परिवार के सामाजिक परिवेश ने भी मुझे लोगों से जुड़ने और उनकी समस्याओं को समझने का अवसर दिया।
राजनीति में आने की मेरी कभी कोई पूर्व योजना नहीं थी। परिस्थितियां कुछ ऐसी बनीं कि मुझे राजनीति में कदम रखने का अवसर मिला। मैं इसे केवल एक संयोग नहीं, बल्कि भगवान भोलेनाथ की प्रेरणा मानती हूं।
मुझे आज भी वह समय याद है, जब कांग्रेस की ओर से मुझे नगर पालिका अध्यक्ष पद का प्रत्याशी बनाए जाने की सूचना मिली। उस समय मैं काशी विश्वनाथ के दर्शन के लिए गई हुई थी। मेरे लिए यह बिल्कुल अप्रत्याशित था। एक गृहिणी के लिए अचानक इतनी बड़ी जिम्मेदारी स्वीकार करना आसान नहीं था, लेकिन मैंने इसे ईश्वर की इच्छा और जनसेवा के अवसर के रूप में स्वीकार किया।
प्रश्न 2. एक गृहिणी से सीधे नगर पालिका अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभालना आसान नहीं रहा होगा। शुरुआती चुनौतियों का आपने किस तरह सामना किया?
अंजू अग्रवाल: निश्चित रूप से यह मेरे जीवन का बिल्कुल नया अनुभव था। राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था की अपनी जटिलताएं होती हैं। शुरुआत में मुझे बहुत कुछ सीखना पड़ा। लेकिन मैंने एक बात तय कर ली थी कि जिस जिम्मेदारी को स्वीकार किया है, उसे पूरी ईमानदारी, निष्ठा और समर्पण से निभाऊंगी।
मेरे लिए राजनीति कभी व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा का माध्यम नहीं रही। मैं इसे जनसेवा का एक बड़ा अवसर मानती हूं। जब जनता ने मुझे अपना प्रतिनिधि चुना, तो मैंने महसूस किया कि अब मेरी जिम्मेदारी केवल अपने परिवार तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे नगर के प्रत्येक नागरिक के प्रति है।
मैंने अपने कार्यकाल में इसी भावना के साथ काम किया कि नगर का विकास हो, मूलभूत समस्याओं का समाधान हो और आम नागरिक को बेहतर सुविधाएं मिलें। मेरा विश्वास रहा है कि पद बड़ा नहीं होता, बल्कि उस पद पर रहते हुए किए गए कार्य व्यक्ति को बड़ा बनाते हैं।
प्रश्न 3. आपके कार्यकाल में आपको ‘आयरन लेडी’, ‘लेडी सिंघम’ और ‘झांसी की रानी’ जैसी उपाधियां मिलीं। आपकी कार्यशैली की ऐसी कौन-सी विशेषताएं थीं, जिन्होंने आपको जनता के बीच अलग पहचान दिलाई?
अंजू अग्रवाल: मैं मानती हूं कि किसी भी जनप्रतिनिधि की असली पहचान उसके काम से होती है। मैंने अपने कार्यकाल में समस्याओं से कभी मुंह मोड़ने का प्रयास नहीं किया। जहां भी आवश्यकता महसूस हुई, वहां स्वयं पहुंचकर स्थिति को समझने और समाधान कराने का प्रयास किया।
मेरी कार्यशैली हमेशा स्पष्ट, सक्रिय और निडर रही। मैंने कभी यह नहीं सोचा कि किसी समस्या के समाधान में कौन-सी कठिनाई आएगी या कौन नाराज होगा। मेरे लिए सबसे महत्वपूर्ण नगर की जनता का हित था।
कई बार निर्णय लेना आसान नहीं होता, लेकिन यदि उद्देश्य जनहित हो तो दृढ़ता जरूरी है। जनता ने मेरे काम करने के तरीके को पसंद किया और मुझे जो उपाधियां दीं, वे मेरे लिए सम्मान के साथ-साथ एक बड़ी जिम्मेदारी भी हैं। मैं इन्हें जनता के स्नेह और विश्वास का प्रतीक मानती हूं।
प्रश्न 4. आपके 2017 से 2022 तक के कार्यकाल को नगर पालिका के विकास और प्रशासनिक सुधारों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है। आप अपनी प्रमुख उपलब्धियों को किस रूप में देखती हैं?
अंजू अग्रवाल: मेरे लिए नगर का विकास हमेशा सर्वोच्च प्राथमिकता रहा। नगर पालिका अध्यक्ष का पद केवल एक प्रशासनिक पद नहीं, बल्कि जनता के प्रति जवाबदेही का पद है।
मेरे कार्यकाल में नगर की प्रकाश व्यवस्था को बेहतर बनाने पर विशेष ध्यान दिया गया। विद्युत व्यवस्था के प्रबंधन में सुधार के प्रयास किए गए, जिसके परिणामस्वरूप नगर पालिका का मासिक बिजली खर्च लगभग 95 लाख रुपये से घटकर 17 लाख रुपये के आसपास लाने में सफलता मिली।
एक महत्वपूर्ण उपलब्धि नगर पालिका के कर्मचारियों के हितों से जुड़ी रही। कर्मचारियों की वर्षों से लंबित पेंशन और ग्रेच्युटी की देनदारियों का निस्तारण हमारी प्राथमिकता थी। मेरे कार्यकाल में लगभग 9 करोड़ रुपये की लंबित पेंशन एवं ग्रेच्युटी का एकमुश्त भुगतान कराकर कर्मचारियों को उनका वर्षों से प्रतीक्षित हक दिलाया गया। मेरे लिए यह केवल वित्तीय प्रबंधन का विषय नहीं, बल्कि उन कर्मचारियों के सम्मान और उनके परिवारों की आर्थिक सुरक्षा से जुड़ा महत्वपूर्ण कार्य था।
इसके अतिरिक्त नगर पालिका की वित्तीय स्थिति को मजबूत करने, आय के स्रोतों को व्यवस्थित करने और अनावश्यक खर्चों पर नियंत्रण के लिए भी प्रयास किए गए। पालिका को 100 करोड़ रुपये से अधिक की लाभकारी वित्तीय स्थिति में लाने का हमारा दावा रहा।
नगर की जलभराव की समस्या को दूर करने के लिए नालों की तली झाड़ सफाई का विशेष अभियान चलाया गया। मैंने स्वयं मौके पर खड़े होकर सफाई कार्यों की निगरानी की। नगर पालिका के उपलब्ध संसाधनों का प्रभावी उपयोग करते हुए बिना किसी अतिरिक्त व्यय के नालों की गहराई तक सफाई कराई गई। इसका सकारात्मक परिणाम यह हुआ कि बरसात के दौरान जलनिकासी की व्यवस्था में सुधार आया और जलभराव की समस्या को काफी हद तक कम करने में मदद मिली।
मेरी हमेशा कोशिश रही कि उपलब्ध संसाधनों का अधिकतम उपयोग करके जनता को बेहतर सुविधाएं दी जाएं। विकास केवल बड़े बजट खर्च करने से नहीं, बल्कि सही नियोजन, ईमानदारी और इच्छाशक्ति से होता है।
प्रश्न 5. कोरोना महामारी के दौरान आपकी जनता के बीच सक्रियता काफी चर्चित रही। उस कठिन समय में जब लोग घरों से निकलने में डर रहे थे, तब आप स्वयं गलियों और मोहल्लों में पहुंच रही थीं। क्या आपको अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता नहीं होती थी?
अंजू अग्रवाल: कोरोना का समय पूरी मानवता के लिए बेहद कठिन था। चारों तरफ भय और अनिश्चितता का माहौल था। लोग अपने घरों से बाहर निकलने में भी डर रहे थे। ऐसे समय में एक जनप्रतिनिधि होने के नाते मेरा दायित्व था कि मैं जनता के साथ खड़ी रहूं।
हमने नगर में सैनिटाइजेशन सहित आवश्यक व्यवस्थाओं को प्राथमिकता दी। इस कार्य में मैंने अपने पुत्र अभिषेक अग्रवाल से भी सहयोग मांगा। उनकी फैक्ट्री में सैनिटाइजेशन केमिकल का निर्माण होता है। मैंने उनसे आग्रह किया कि कोरोना महामारी के दौरान पूरे नगर के सैनिटाइजेशन के लिए यह केमिकल निशुल्क उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने इसे सामाजिक दायित्व मानते हुए पूरे कोरोना काल में नगर पालिका को सैनिटाइजेशन केमिकल निशुल्क उपलब्ध कराया।
इससे नगर पालिका पर अतिरिक्त वित्तीय भार काफी कम हुआ और पूरे शहर में नियमित रूप से सैनिटाइजेशन का कार्य प्रभावी ढंग से कराया जा सका। मेरे लिए यह गर्व की बात थी कि परिवार ने भी संकट के समय शहर की सेवा में अपना योगदान दिया।
जरूरतमंद लोगों तक सहायता पहुंचाने का प्रयास किया गया। संक्रमण के उस कठिन दौर में श्मशान घाट तक की व्यवस्थाओं और वहां की परिस्थितियों पर भी ध्यान देना पड़ा।
मैंने कभी अपनी व्यक्तिगत सुरक्षा को जनता के प्रति अपने कर्तव्य से ऊपर नहीं रखा। मेरा मानना था कि जब लोगों ने मुझे अपना प्रतिनिधि चुना है, तो संकट के समय मुझे उनके बीच रहना चाहिए।
मैं जब गली-मोहल्लों में पहुंचती थी, तो लोग ढोल-नगाड़ों और पुष्पवर्षा के साथ मेरा स्वागत करते थे। वह जनता का स्नेह और विश्वास था, जिसे मैं आज भी नहीं भूल सकती। मेरे लिए वह सम्मान किसी भी राजनीतिक पद या उपलब्धि से बड़ा है।
प्रश्न 6. कोरोना काल के अनुभवों के आधार पर क्या आप मानती हैं कि महिलाओं में नेतृत्व की विशेष क्षमता होती है और उन्हें राजनीति में अधिक अवसर मिलने चाहिए?
अंजू अग्रवाल: बिल्कुल। महिलाओं में धैर्य, संवेदनशीलता, साहस और परिस्थितियों से जूझने की अद्भुत क्षमता होती है। महिलाएं परिवार की जिम्मेदारियों को जिस कुशलता से निभाती हैं, उसी क्षमता के साथ सामाजिक और सार्वजनिक जीवन में भी प्रभावशाली नेतृत्व दे सकती हैं।
मैं स्वयं इसका उदाहरण हूं कि एक सामान्य गृहिणी भी यदि संकल्प कर ले तो बड़ी से बड़ी जिम्मेदारी निभा सकती है।
मेरा मानना है कि महिलाओं को राजनीति में केवल प्रतिनिधित्व तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उन्हें निर्णय लेने की प्रक्रिया में भी बराबर की भागीदारी मिलनी चाहिए। महिलाओं को अवसर और जिम्मेदारी दी जाए तो वे किसी भी क्षेत्र में अपनी योग्यता सिद्ध कर सकती हैं।
प्रश्न 7. आपने कांग्रेस के टिकट पर नगर पालिका अध्यक्ष का चुनाव जीता और बाद में भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुईं। इस राजनीतिक निर्णय के पीछे आपकी क्या सोच थी?
अंजू अग्रवाल: जब मैं नगर पालिका अध्यक्ष थी, उस समय उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की सरकार थी। मेरी सोच थी कि प्रदेश सरकार और नगर पालिका के बीच बेहतर तालमेल स्थापित हो, जिससे मुजफ्फरनगर के विकास कार्यों को और अधिक गति मिल सके।
एक निर्वाचित जनप्रतिनिधि के रूप में मेरी प्राथमिकता हमेशा नगर का विकास रही। मुझे लगा कि सरकार के साथ बेहतर समन्वय होने से जनहित के कार्यों को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी। इसी विकासवादी सोच के साथ मैंने भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण की।
मेरे लिए इस निर्णय का आधार व्यक्तिगत राजनीतिक लाभ नहीं, बल्कि विकास कार्यों को अधिक प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने की अपेक्षा थी।
प्रश्न 8. भाजपा में शामिल होने के बाद आपका राजनीतिक अनुभव कैसा रहा? क्या आपको वह अपनत्व और सहयोग मिला जिसकी आपने अपेक्षा की थी?
अंजू अग्रवाल: राजनीति में किसी भी निर्णय के साथ कुछ अपेक्षाएं और संभावनाएं जुड़ी होती हैं। जब मैंने भाजपा की सदस्यता ग्रहण की थी, तो मेरी अपेक्षा थी कि मुझे संगठन में एक नई जिम्मेदारी, सहयोग और अपनत्व के साथ काम करने का अवसर मिलेगा।
लेकिन बाद के अनुभव मेरी अपेक्षाओं के अनुरूप पूरी तरह नहीं रहे। कई बार ऐसा महसूस हुआ कि पार्टी में शामिल होने के बावजूद मुझे उस रूप में स्वीकार्यता और सहयोग नहीं मिल पाया, जिसकी एक निर्वाचित जनप्रतिनिधि के नाते अपेक्षा थी।
मेरे लिए सबसे महत्वपूर्ण बात हमेशा जनहित में स्वतंत्र रूप से काम करना रही है। राजनीतिक परिस्थितियों और संगठनात्मक समन्वय की कुछ कठिनाइयों के बावजूद मैंने अपने दायित्वों को प्राथमिकता दी।
मैं किसी व्यक्ति विशेष को इसके लिए जिम्मेदार नहीं मानती। राजनीति में परिस्थितियां बदलती रहती हैं और हर अनुभव व्यक्ति को कुछ नया सिखाता है। मेरे लिए पार्टी से भी ऊपर जनता का विश्वास और क्षेत्र का विकास रहा है।
प्रश्न 9. आपके राजनीतिक सफर में प्रशंसा के साथ-साथ कई कठिन परिस्थितियां और उतार-चढ़ाव भी आए। क्या इन अनुभवों ने आपको पहले से अधिक मजबूत बनाया है?
अंजू अग्रवाल: निश्चित रूप से। जीवन में आने वाली कठिनाइयां हमें बहुत कुछ सिखाती हैं। राजनीति में तो हर दिन एक नई चुनौती होती है। कई बार व्यक्ति को अपने धैर्य, साहस और आत्मविश्वास की परीक्षा देनी पड़ती है।
मैंने अपने राजनीतिक जीवन में जनता का अपार स्नेह भी देखा है और कठिन परिस्थितियों का सामना भी किया है। इन अनुभवों ने मुझे पहले से अधिक मजबूत और परिपक्व बनाया है।
मैंने हमेशा यही सीखा है कि यदि आपका उद्देश्य स्पष्ट है और आप जनता के हित में काम करना चाहते हैं, तो कठिनाइयों से घबराना नहीं चाहिए। आलोचनाएं और चुनौतियां भी आगे बढ़ने की प्रेरणा बन सकती हैं।
आज भी मेरे भीतर वही उत्साह और जनसेवा की भावना है, जिसके साथ मैंने अपनी राजनीतिक पारी की शुरुआत की थी।
प्रश्न 10. मिशन शक्ति 6.0 के अंतर्गत महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन पर विशेष जोर दिया जा रहा है। एक महिला जनप्रतिनिधि के रूप में आप आज की महिलाओं और बेटियों को क्या संदेश देना चाहेंगी?
अंजू अग्रवाल: मैं सभी महिलाओं से कहना चाहती हूं कि वे स्वयं को कभी कमजोर न समझें। महिला केवल परिवार की जिम्मेदारियां निभाने तक सीमित नहीं है, बल्कि वह समाज और राष्ट्र के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
महिलाओं को शिक्षित, आत्मनिर्भर और जागरूक होना चाहिए। उन्हें अपने अधिकारों की जानकारी होनी चाहिए और अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाने का साहस भी रखना चाहिए।
मैं विशेष रूप से बेटियों से कहना चाहती हूं कि वे अपने सपनों को सीमित न रखें। आत्मविश्वास, शिक्षा और मेहनत के बल पर आगे बढ़ें। परिस्थितियां चाहे जैसी भी हों, अपने लक्ष्य को पाने का संकल्प बनाए रखें।
मैं अपने जीवन के अनुभव से कह सकती हूं कि यदि एक महिला ठान ले तो वह हर क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बना सकती है।
प्रश्न 11. अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल—मिशन 2027। क्या आप उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव में अपनी राजनीतिक पारी को आगे बढ़ाने की तैयारी कर रही हैं?
अंजू अग्रवाल: मैं इस विषय पर बिल्कुल स्पष्ट रूप से कहना चाहती हूं कि यदि ईश्वर की इच्छा हुई तो मैं निश्चित रूप से 2027 में विधानसभा चुनाव लड़ूंगी।
मेरे मन में मुजफ्फरनगर के विकास को लेकर बहुत सारी योजनाएं और विचार हैं। मैंने नगर पालिका अध्यक्ष के रूप में जनता के बीच रहकर काम किया है। नगर की समस्याओं को नजदीक से देखा और समझा है।
अब मेरी इच्छा है कि यदि मुझे व्यापक स्तर पर जनसेवा का अवसर मिलता है, तो मैं मुजफ्फरनगर के चहुंमुखी विकास के लिए और अधिक प्रभावी ढंग से काम कर सकूं।
मेरे लिए राजनीति का अर्थ केवल चुनाव लड़ना या पद प्राप्त करना नहीं है। राजनीति का वास्तविक उद्देश्य जनता की सेवा करना, क्षेत्र का विकास करना और लोगों की अपेक्षाओं पर खरा उतरना है।
मैंने अपने जीवन में जो अनुभव प्राप्त किए हैं, उनका उपयोग भविष्य में भी जनता की सेवा के लिए करना चाहती हूं।
प्रश्न 12. क्या आपने यह तय कर लिया है कि 2027 का विधानसभा चुनाव आप किस राजनीतिक दल से लड़ेंगी? क्या किसी पार्टी से बातचीत या राजनीतिक समीकरणों पर विचार चल रहा है?
अंजू अग्रवाल: फिलहाल मैं इस संबंध में कोई स्पष्ट घोषणा नहीं करना चाहती। मैंने अपनी राजनीतिक मंशा स्पष्ट कर दी है कि यदि ईश्वर की इच्छा हुई तो मैं 2027 का विधानसभा चुनाव अवश्य लड़ूंगी।
मेरी प्राथमिकता मुजफ्फरनगर की जनता और क्षेत्र का विकास है। आगे की राजनीतिक परिस्थितियों, समय और उचित अवसर के अनुसार निर्णय लिया जाएगा।
मैं इतना अवश्य कहना चाहूंगी कि मेरे लिए जनता का विश्वास सबसे महत्वपूर्ण है। मैं जिस भी भूमिका में रहूं, जनसेवा की भावना के साथ काम करना चाहती हूं।
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गृहिणी से जनप्रतिनिधि और अब विधानसभा की ओर बढ़ते कदम
अंजू अग्रवाल का राजनीतिक सफर इस बात का उदाहरण है कि जीवन में परिस्थितियां कभी-कभी व्यक्ति की दिशा और पहचान दोनों बदल देती हैं। एक प्रतिष्ठित परिवार की गृहिणी के रूप में जीवन व्यतीत कर रहीं अंजू अग्रवाल का राजनीति में प्रवेश भले ही अप्रत्याशित रहा हो, लेकिन वर्ष 2017 में नगर पालिका अध्यक्ष निर्वाचित होने के बाद उन्होंने अपने काम करने के अंदाज से अलग पहचान बनाई।
वर्ष 2017 से 2022 तक का उनका कार्यकाल सक्रियता, प्रशासनिक निर्णयों और विकास कार्यों के लिए चर्चा में रहा। नगर की प्रकाश व्यवस्था, बिजली खर्च में कमी और वित्तीय प्रबंधन के साथ-साथ कर्मचारियों की वर्षों से लंबित लगभग 9 करोड़ रुपये की पेंशन एवं ग्रेच्युटी का एकमुश्त भुगतान उनकी महत्वपूर्ण उपलब्धियों में शामिल रहा।
नगर की जलनिकासी व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए नालों की तली झाड़ सफाई का अभियान भी उनके कार्यकाल की उल्लेखनीय पहल रही। इसमें उन्होंने स्वयं मौके पर पहुंचकर निगरानी की और नगर पालिका के उपलब्ध संसाधनों का उपयोग करते हुए बिना अतिरिक्त व्यय के सफाई कार्य कराया।
कोरोना महामारी के दौरान जनता के बीच उनकी सक्रिय उपस्थिति ने उनके राजनीतिक व्यक्तित्व को एक अलग पहचान दी। इस दौरान उनके पुत्र अभिषेक अग्रवाल द्वारा अपनी फैक्ट्री में निर्मित सैनिटाइजेशन केमिकल पूरे कोरोना काल में नगर पालिका को निशुल्क उपलब्ध कराना भी परिवार की सामाजिक प्रतिबद्धता का उदाहरण रहा। इससे नगर पालिका पर अतिरिक्त आर्थिक भार कम हुआ और शहर में सैनिटाइजेशन अभियान को निरंतर संचालित करने में मदद मिली।
भाजपा में शामिल होने के बाद के अपने अनुभवों को भी उन्होंने इस बातचीत में संतुलित और बेबाक अंदाज में साझा किया। उन्होंने स्वीकार किया कि राजनीतिक परिस्थितियां उनकी अपेक्षाओं के अनुरूप पूरी तरह नहीं रहीं और पार्टी में शामिल होने के बाद उन्हें अपेक्षित स्वीकार्यता एवं सहयोग का अनुभव नहीं हुआ। हालांकि इन परिस्थितियों ने उनके आत्मविश्वास और जनसेवा के संकल्प को कमजोर नहीं किया।
इस साक्षात्कार का सबसे महत्वपूर्ण और राजनीतिक दृष्टि से चर्चित पहलू उनका मिशन 2027 है। अंजू अग्रवाल ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि ईश्वर की इच्छा हुई तो वह 2027 का विधानसभा चुनाव अवश्य लड़ेंगी। हालांकि उन्होंने अभी किसी राजनीतिक दल के नाम की घोषणा नहीं की है।
उनका यह बयान मुजफ्फरनगर की आगामी विधानसभा राजनीति में एक नई संभावना की ओर संकेत करता है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले समय में उनकी राजनीतिक रणनीति किस दिशा में आगे बढ़ती है और मिशन 2027 को लेकर वे क्या कदम उठाती हैं।
एक गृहिणी से नगर की प्रथम नागरिक बनने तक और अब विधानसभा चुनाव की दावेदारी की ओर बढ़ते कदम—अंजू अग्रवाल की यह यात्रा केवल एक राजनीतिक सफर नहीं, बल्कि आत्मविश्वास, साहस, अनुभव और सार्वजनिक जीवन में महिला नेतृत्व की एक कहानी भी है।


