मुजफ्फरनगर । हरियाणा में विपक्ष समर्थित रोज़ाना के आंदोलनों से त्रस्त जनता ने राज्य में बीजेपी को ही तीसरी बार भी सरकार बनाने का का अवसर दिया। यह कहना है अशोक बालियान, चेयरमैन,पीजेंट वेलफेयर एसोसिएशन का।
सभी एग्जिट पोल में वर्ष 2024 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस भारी जीत की ओर बढ़ रही थी, परन्तु आज वोटों की गिनती के बाद आये नतीजों से भारतीय जनता पार्टी ने क्लीयर मेजॉरिटी हासिल की है। वर्ष 2014 के विधानसभा चुनावों में काफी प्रतिशत जाटों का वोट बीजेपी को भी मिला था, लेकिन हरियाणा में जाट वोट अधिकतर कांग्रेस और इनेलो को जाते रहे हैं, तथा लगातार दो कार्यकाल सत्ता में रहने पर एंटी-इन्कंबेंसी का जोखिम तो रहता ही है। सबसे खास बात ये भी है कि वर्ष 2024 के हुए विधानसभा चुनावों में जाटलैंड में भी कांग्रेस का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा है, जबकि कांग्रेस ने किसान,अग्निवीर जवान व् महिला पहलवान का नैरेटिव खूब गढ़ा था। लगातार दो कार्यकाल सत्ता में रहने पर एंटी-इन्कंबेंसी का जोखिम दूर करने के लिए बीजेपी ने हरियाणा का सीएम बदलने के अलावा नए उम्मीदवारों को मैदान में उतारने का कार्य भी किया।
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी को समय बहुत कम मिला,पर उन्होंने कई ऐसी योजनाएं बनाईं, जो सीधे आम जनता को फायदा पहुंचाने वाली हैं।जिन लोगों ने टिकट वितरण के बाद असंतोष जाहिर करते हुए पार्टी के खिलाफ जाने की बात कहीम, उनके पास खुद सीएम सैनी मनाने के लिए पहुंचे थे।जो जाट किसान,अग्निवीर व महिला आंदोलन में आंदोलन के साथ नहीं थे, उन्होंने भी बीजेपी को इस चुनाव में वोट किया हैं।प्रधानमन्त्री मोदी, गृहमन्त्री अमित शाह, उत्तरप्रदेश के मुख्यमन्त्री आदित्यनाथ योगी वहाँ के मतदाताओं को यह समझाने में सफल रहे कि बीजेपी सरकार किसान हित के निर्णय ले रही है और विपक्ष किसानों को गुमराह करने का कार्य कर रहा है।
मुज़फ़्फ़रनगर के पूर्व सांसद व पूर्व केंद्रीय मन्त्री डॉ संजीव बालियान, पूर्व गन्ना मन्त्री सुरेश राणा व एमएलसी मोहित बैनीवाल भी हरियाणा के इन चुनाव में वहीं डेरा डाले रहे। ये नेता किसानों को यह समझाने में कामयाब रहे कि बीजेपी सरकार में किसान हित के बहुत निर्णय लिये गये हैं और विपक्ष नहीं चाहता कि कृषि में रिफॉर्म हो।
किसानों और महिला पहलवानों के आंदोलन से बीजेपी बहुत परेशान थी। बीजेपी ने इस आंदोलन के खिलाफ कोई कदम न उठाकर इसे बढ़ने दिया। हरियाणा में पहलवानों-किसानों और जवानों का आंदोलन इतना अधिक बढ़ा कि दूसरे वर्गों को चिढ़ हो गई।बीजेपी चुपचाप अपने नेताओं को किसानों से पिटते देखते रही।किसानों के आंदोलन में कुछ कथित किसान नेताओं के हौसलें इतने बढ़ गये थे कि वो पूर्व सीएम खट्टर और कई मंत्रियों तक को गांवों में घुसने से रोक दे देते थे।
हरियाणा में किसान आंदोलन में अधिकतर जाट और जट शामिल थे। वहाँ की दूसरी जातियों के किसानों, व्यापारियों और अन्य वर्गों को लगा कि ये लोग सत्ता में आ गए, तो हरियाणा में उत्पात और बढ़ जाएगा।इसप्रकार रोज-रोज के आंदोलनों से व् इन आंदोलनों में हुई अराजकता से बीजेपी को लाभ मिला।
जिस तरह कांग्रेस ने संविधान बचाओ -आरक्षण बचाओ का नारा बुलंद करके यूपी में खेल किया था,उसी तरह हरियाणा में भी करने की तैयारी थी,लेकिन बीजेपी ने दलितों को यह समझाया कि बीजेपी राज में उनके साथ मिर्चपुर और गोहाना जैसी घटनाएं नहीं हुई हैं।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और पूर्व मुख्यमंत्री खट्टर ने बार-बार मिर्चपुर और गोहाना कांड की चर्चा अपनी सभाओं में की थी।
चुनाव से ठीक पहले बीजेपी ने अपने घोषणापत्र में वादा किया कि वह 24 फसलों को एमएसपी पर खरीदेगी, हरियाणा के हर अग्निवीर को सरकारी नौकरी की गारंटी देगी।हरियाणा विधानसभा चुनाव का रिजल्ट बताता है कि चुनाव में बीजेपी को इसका लाभ भी मिला और एंटी-इन्कंबेंसी की तपिश को खत्म करने में मदद मिली।
हरियाणा में बीजेपी की तीसरी बार सरकार बनाने से बीजेपी में एक नए उत्साह का संचार होगा और निश्चित ही इसका प्रभाव आगामी महाराष्ट्र और झारखंड विधानसभा चुनावों में देखने को मिलेगा।

