मुज़फ्फरनगर। पीजेंट के चेयरमैन अशोक बालियान ने केन्द्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान व खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री श्री प्रल्हाद जोशी को पत्र लिखते हुए कहा है कि देश की अनेक राज्यों की मंडियों में आलू के दाम लगातार गिरने से किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। कई स्थानों पर किसानों को उत्पादन लागत से भी कम मूल्य पर आलू बेचने के लिए विवश होना पड़ रहा है। भारत में Essential Commodities Act 1955 के अंतर्गत केंद्र सरकार को आलू सहित खाद्य पदार्थों की कीमत नियंत्रण व आपूर्ति प्रबंधन का अधिकार है। आलू का मूल्य गिरने या मूल्य वृद्धि के दौरान, सरकार हस्तक्षेप करके आलू की कीमतें निर्धारित या नियंत्रित कर सकती है।
देश का अनेक राज्यों में आलू उपज की यह स्थिति मुख्यतः अत्यधिक उत्पादन, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग की कमी, कमजोर सप्लाई चेन, सीमित निर्यात व्यवस्था तथा न्यूनतम मूल्य सुरक्षा के अभाव के कारण उत्पन्न हुई है। भारत में उत्पादित आलू का केवल 7–8 प्रतिशत ही प्रोसेस (प्रसंस्कृत) होता है, जबकि अमेरिका और यूरोप जैसे विकसित देशों में यह आंकड़ा 60–70 प्रतिशत तक है।
दुनिया के विकसित देशों, विशेषकर United States, में किसानों की फसल का मूल्य अत्यधिक गिरने से बचाने के लिए सरकार विभिन्न उपाय करती है, जैसे-कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग, मूल्य संरक्षण योजनाएँ, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग को बढ़ावा तथा निर्यात प्रोत्साहन।
इसी संदर्भ में पीजेंट वेलफेयर एसोसिएशन निम्नलिखित सुझाव प्रस्तुत करती है:
1. आलू के लिए मूल्य स्थिरीकरण कोष
आलू के दाम अत्यधिक गिरने की स्थिति में सरकारी एजेंसियों द्वारा खरीद सुनिश्चित करने के लिए एक Price Stabilization Fund बनाया जाए।
2. न्यूनतम गारंटी मूल्य
आलू के लिए कम से कम उत्पादन लागत से ऊपर न्यूनतम गारंटी मूल्य (Minimum Guaranteed Price) निर्धारित किया जाए।
3. खाद्य प्रसंस्करण उद्योग का विस्तार
प्रदेश में बड़े स्तर पर
• आलू चिप्स उद्योग
• फ्रेंच फ्राइज प्लांट
• स्टार्च उद्योग स्थापित करने के लिए विशेष औद्योगिक नीति बनाई जाए।
4. कोल्ड स्टोरेज और कोल्ड-चेन व्यवस्था
छोटे किसानों के लिए कोल्ड स्टोरेज किराये पर विशेष सब्सिडी दी जाए और आधुनिक कोल्ड-चेन प्रणाली विकसित की जाए।
5. निर्यात को प्रोत्साहन
आलू के अतिरिक्त उत्पादन को विदेशों तथा अन्य राज्यों में निर्यात करने के लिए विशेष निर्यात नीति बनाई जाए।
6. किसान उत्पादक संगठनों (FPO) को बढ़ावा
किसानों को संगठित कर उन्हें सीधे बड़े बाजारों और उद्योगों से जोड़ा जाए ताकि बिचौलियों की भूमिका कम हो सके।
7. मार्केट इंटरवेंशन स्कीम (MIS)
मार्केट इंटरवेंशन स्कीम (MIS) के अंतर्गत अविलम्ब आलू खरीद लागत में 100 प्रतिशत जोड़कर
लाभकारी मूल्य पर शुरू की जाए,ताकि अब तक हुए नुकसान की भी भरपाई हो सके।
उत्तरप्रदेश को Potato Processing Hub बनाने की कार्ययोजना
(नीतिगत सुझाव – पीजेंट वेलफेयर एसोसिएशन)
1. Potato Processing Zones की स्थापना
• आलू उत्पादक क्षेत्रों (आगरा, कन्नौज, फर्रुखाबाद, एटा, कासगंज, मैनपुरी) में
विशेष Potato Processing Zones बनाए जाएं
• यहां उद्योग, कोल्ड स्टोरेज और लॉजिस्टिक्स एक साथ विकसित हों
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2. बड़े फूड प्रोसेसिंग उद्योग को आकर्षित करना
• PepsiCo, McCain, ITC जैसी कंपनियों को
विशेष पैकेज देकर निवेश के लिए आमंत्रित किया जाए
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महोदय, यदि उपर्युक्त कदम उठाए जाते हैं तो न केवल आलू उत्पादक किसानों को आर्थिक सुरक्षा मिलेगी बल्कि प्रदेश की कृषि अर्थव्यवस्था भी मजबूत होगी।
अतः आपसे विनम्र अनुरोध है कि इस विषय पर आवश्यक नीतिगत निर्णय लेकर प्रदेश के किसानों को राहत प्रदान करने की कृपा करें।