भोले नाथ की अर्चना कर कृपा प्राप्त करने एवं स्नान दान एवं पितरों को प्रसन्न करने का सबसे बड़ा पर्व सोमवती अमावस्या सोमवार को है।
*हिंदू शास्त्रों और मान्यताओं के अनुसार अगर सोमवार के दिन अमावस्या पड़े तो इसे सुंदर संयोग माना जाता है. धार्मिक महत्व के इस अवसर को सोमवती अमावस्या कहते हैं. सुहागिन महिलाएं इस दिन अपने पति की लंबी आयु के लिए व्रत रखती हैं और बरगद के वृक्ष की पूजा करती हैं. इस साल 8 अप्रैल सोमवार को चैत्र माह की अमावस्या है. सोमवती अमावस्या पर गंगाजी समेत देश की पवित्र नदियों में स्नान और पितरों के लिए पूजा करने का भी खास धार्मिक महत्व होता है. इस खास दिन पर पितरों के नाम से भोज और दान करने से भी विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है. इस बार सोमवती अमावस्या पर सूर्य ग्रहण का संयोग जुड़ा हुआ है*
*1-काल सर्प दोष*
*अमावस्या के दिन चांदी के नाग-नागिन का पूजन करके नदी में प्रवाहित करने से कालसर्प दोष से मुक्ति मिलती है तथा महामृत्युंजय मंत्र, शिव मंत्र और शिव पंचाक्षर स्तोत्र का जाप करने से कालसर्प दोष दूर होता है तथा आर्थिक समृद्धि मेंवृद्धि होती है।*
*2-अमावस्या के दिन अपने सामर्थ्य के अनुसार असहाय, गरीब या ब्राह्मण को दान देने से जीवन के समस्त कष्ट दूर होते है। इस दिन पीपल का पूजन करना चाहिए, क्योंकि पीपल में सभी देवों का वास माना जाता है, अत: इस दिन पीपल वृक्ष के पूजन सभी तरह के पापों से मुक्ति मिलती है।*
*3-अमावस्या के दिन पितरों के निमित्त तर्पण, पिंडदान या श्राद्ध कर्म करने से पितर खुश होते हैं और* *सुख-समृद्धि, धन-दौलत और वंश वृद्धि और अपने वंशज को खुशहाल जीवन का आशीर्वाद देते हैं।*
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पितरों को सफेद रंग के फूल प्रिय होते हैं। सफेद रंग के फूलों को अर्पित करने से नाराज पितर खुश हो सकते हैं। सफेद रंग सादगी और पवित्रता का प्रतीक होता है। इस वजह से पितरों के लिए सफेद वस्त्र ही दान करते हैं।
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