मुजफ्फरनगर । जागृति कारी संत नयन सागर जी महाराज ने प्रवचन में कहा कि मनुष्य को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि अच्छी बात कहो अच्छी बात सुनो आपका फर्ज एवं कर्तव्य जो बनता है अच्छाई को देखने का बनता है खुद को इतने तरासते तो भगवान बन जाते। संसार में कोई भी माँ बाप अपने बेटे का नाम कमट नही रखते अपने बेटे का नाम भगवान का नाम पारस रखते है इसी प्रकार कोई भी दुकान एवं प्रतिष्ठान का नाम कमट नही रखा बल्कि पारस रखा। व्यक्ति 23 घण्टे अन्य कार्याे में लगा रहता है 1 घण्टे दर्पण को देखता है तो अपने आप को जान जाता है पहले डायरी में सभी फोन नं0 होते थे परंतु उस डायरी में मालिक का नाम व मोबाईल नंम्बर नही होता था। गांधी जी के तीन बन्दर आज भी प्रसिद्ध है श्री आदिनाथ भगवान जी ने अपनी आत्मा को पहचाना तथा जब ही भगवान बन गये हम परिवर्तन चाहते है परंतु परिवर्तन इजरे में चाहते है हमने अपने में परिवर्तन नही किया त्याग करो अपनी आत्मा को परिवर्तन करो। मिध के पर्याय में अपने में परिवर्तन किया तभी महावीर भगवान बन गये। सच्चाई का एक मार्ग ही सुख का मार्ग है शय के पास यश कम था तथा अच्छाई तथा परिवर्तन अपने आप में किया तभी आत्म कल्याण किया रावण के पास सभी प्रकार का यश था परंतु बुराई के साथ जिये और नरक में पहुंचे। इतिहास का मतलब है परिहास वर्तमान वर्धमान है हम अपने आप को बदले, अच्छे बने, त्याग भावना बनाए तथा परिवर्तन करे तो हम आत्म कल्याण अवश्य करेगे। यदि हमें बदलना है तो अच्छाई को अपनाना होगा नही तो हम पतन की ओर चले जायेगे। देव शास्त्र गुरू पर सच्ची ऋद्धा से ही मनुष्य अपना आत्म कल्याण कर सकता हैं।


