इस बार दस मई को अक्षय तृतीया के दिन सर्वार्थ सिद्धि योग रवि योग शुक्र आदित्य योग जैसे अद्भुत सयोग बना रहे हैं, जिसका प्रभाव सभी 12 राशियों पर दिखेगा। लेकिन तीन राशि के लोग अक्षय तृतीया के दिन मालामाल हो सकते हैं। जिसमें मेष राशि वृषभ राशि और मीन राशि के जातक शामिल हैं।
मेष राशि: अक्षय तृतीया के दिन मेष राशि के जातक को आर्थिक स्थिति में लाभ होगा। करियर कारोबार में वृद्धि होगी पारिवारिक जीवन खुशहाल रहेगा भूमि भवन का लाभ मिलेगा।
वृषभ राशि: वृषभ राशि के जातक के लिए अक्षय तृतीया का दिन किसी वरदान से काम नहीं रहेगा। नौकरी और व्यापार में तरक्की होगी। माता लक्ष्मी का आशीर्वाद प्राप्त होगा। व्यापार में वृद्धि होगी, रुका हुआ धन वापस मिलेगा ।
मीन राशि: मीन राशि के जातक के लिए हर क्षेत्र में कामयाबी मिलेगी। धन और संपत्ति में लाभ होगा समाज में मान सम्मान की वृद्धि होगी। धन संपत्ति में लाभ मिलेगा। लंबे समय से रुका हुआ धन वापस मिलेगा ।
अक्षय तृतीया की 10 महत्वपूर्ण बातें-
मान्यता है कि अक्षय तृतीया के दिन किए गए काम में खूब बरकत होती है और शुभ फल मिलता है। इसलिए लोग इस दिन नया व्यापार शुरू करने से लेकर जमकर खरीदारी भी करते हैं।
लेकिन इस बात का ध्यान रखें कि शुभ फलों की प्राप्ति के साथ ही इस दिन अशुभ फल भी मिल सकते हैं। कहा जाता है कि अक्षय तृतीया के दिन आप जो काम करेंगे उसका फल आपको जरूर मिलेगा। सलिए इस दिन कोई भी बुरा या गलत काम न करें. वरना इसका परिणाम भी आपको जरूर मिलेगा।
अक्षय तृतीया के दिन भगवान परशुराम का जन्म हुआ. परशुराम देवताओं के 24 रूपों में छठे अवतार माने जाते हैं।
परशुराम के साथ ही अक्षय तृतीया पर ब्रह्मा जी के पुत्र अक्षय कुमार का प्राकट्य भी इसी दिन हुआ था।
अक्षय तृतीया की तिथि से ही सतयुग, द्वापरयुग और त्रेतायुग के शुरुआत की गणना होती है।
खरीदारी के साथ ही दान करने के लिए भी अक्षय तृतीया का दिन महत्वपूर्ण है। क्योंकि इस दिन को अच्छे कर्मों को संचित करने के लिए भी श्रेष्ठ माना जाता है। इसलिए इस दिन अपने कर्म, सेवा और दान आदि से मनुष्य धर्म का पालन करें।
अक्षय तृतीया पर जौ का दान करना स्वर्ण दान के समान माना जाता है. इसी के साथ इस दिन भूमि, स्वर्ण, पंखा, छाता, जल, सत्तू, वस्त्र आदि का दान भी किया जा सकता है।
कहा जाता है कि, अक्षय तृतीया पर अगर रोहिणी नक्षत्र हो तो इस दिन की महत्ता हजारों गुणा बढ़ जाती है और इस बार 10 मई को अक्षय तृतीया के दिन सुबह 10:47 तक रोहिणी नक्षत्र रहेगा।
अक्षय तृतीया के दिन ही चारों धामों में एक श्री बद्रीनारायण के पट खुलते हैं।
पूरे वर्ष में एक बार सिर्फ अक्षय तृतीया पर ही वृंदावन में बांकेबिहारी के चरणों के दर्शन होते हैं।

