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मुजफ्फरनगर लद्दावाला-रामपुरी कब्रिस्तान का कराया फर्जी वसीयतनामा, टकराव की आशंका

मुजफ्फरनगर। मुजफ्फरनगर नगर क्षेत्र के दो प्रमुख मोहल्लों रामपुरी और लद्धावाला में स्थित अंसारियान कब्रिस्तान को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। कब्रिस्तान की भूमि पर कथित रूप से फर्जी वसीयतनामा तैयार कर निजी कब्जे की कोशिशों के आरोप सामने आने के बाद क्षेत्र में तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई है। समाज के लोगों ने पहले पुलिस का दरवाजा खटखटाया, लेकिन वहां से कोई खास ामदद नहीं मिलने के बाद प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग करते हुए चेतावनी दी है कि समय रहते कार्रवाई न होने पर विवाद गंभीर रूप ले सकता है।

मुजफ्फरनगर की सदर तहसील के अन्तर्गत आने वाले मोहल्ला रामपुरी और लद्धावाला के दर्जनों निवासियों ने शनिवार को एसडीएम सदर प्रवीण द्विवेदी के कार्यालय पर पहुंचकर उनको एक ज्ञापन सौंपकर कब्रिस्तान से जुड़े गंभीर अनियमितताओं की शिकायत दर्ज कराई। शिकायतकर्ताओं के अनुसार खसरा नंबर 382/1, 382/3 और 382/4 में दर्ज कब्रिस्तान दशकों से मुस्लिम समाज द्वारा अपने मुर्दों के दफन के लिए उपयोग किया जाता रहा है। वर्ष 2012-13 में तत्कालीन राज्यमंत्री स्व. चितरंजन स्वरूप द्वारा अपनी निधि से इसकी बाउंड्री वॉल भी निर्मित कराई गई थी, जो आज भी मौजूद है। कब्रिस्तान की देखरेख के लिए पूर्व में एक कमेटी गठित की गई थी, जिसमें मोहम्मद राशिद पुत्र यामीन निवासी लद्दावाला को प्रबंधक नियुक्त किया गया था।प्रदर्शन कर रहे सर्वसमाज के लोगों का आरोप है कि राशिद ने वर्षों तक कब्रिस्तान से होने वाली आयकृजैसे घास कटाई, अमरूद के पेड़ों का ठेका और किराये पर दिए गए एक मकान की रकमकृका कोई हिसाब नहीं दिया। इतना ही नहीं, उस पर कब्रिस्तान की ईंटें और पेड़ बेचने का भी आरोप है। शिकायत में दर्ज सबसे गंभीर आरोप यह है कि 25 सितंबर 2025 को राशिद ने कथित रूप से धोखाधड़ी कर कब्रिस्तान की भूमि (खसरा संख्या 382/1) का फर्जी वसीयतनामा अपने पुत्र दानिश, नौशाद, फिरोज अहमद, पुत्री फिरोज़ा परवीन तथा परिचित दिलशाद पुत्र मुन्तयाज के नाम कर दिया। इस घटना के बाद समाज ने राशिद को प्रबंधक पद से हटाते हुए कब्रिस्तान की जिम्मेदारी अंजुमन ट्रस्ट को सौंप दी, जो कि एक पंजीकृत संस्था है और वर्तमान में देखरेख का कार्य सुचारू रूप से कर रही है।

समाज के लोगों का आरोप है कि प्रबंधन से हटाए जाने और वसीयतनामा विवाद के बाद राशिद और उसके परिजन कब्रिस्तान पर कब्जे का प्रयास कर रहे हैं तथा लोगों को धमका रहे हैं कि यह निजी संपत्ति है और यहां किसी भी शव को दफन नहीं होने देंगे। इससे स्थानीय लोगों में गहरा रोष है और मौके पर तनाव की स्थिति बनी हुई है। शिकायतकर्ताओं ने एसडीएम को अवगत कराया कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई, तो अंसारियान कब्रिस्तान को लेकर साम्प्रदायिक तनाव या विवाद की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने मांग की कि तहसीलदार सदर को मौके की जांच करने और यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए जाएं। सभासद पति नदीम खान ने बताया कि शिकायत सुनने के बाद एसडीएम सदर ने भरोसा दिलाया है कि कोर्ट के निर्णय तक किसी भी प्रकार का परिवर्तन या कब्जे का प्रयास नहीं होने दिया जाएगा और यथास्थिति बनाए रखी जाएगी। प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व सपा जिलाध्यक्ष जिया चौधरी ने किया। इस अवसर पर मुख्य रूप से सभासद पति नदीम खान, हाजी इदरीस अंसारी, डॉ. फुरकान मलिक, काजिम गौर, शहजाद सलमानी, ताहिर त्यागी, जाहिद अंसारी, इंतज़ार अंसारी, राजा सलमानी, हाजी इस्लाम, फाजिल अंसारी, अरशद सलमानी, शमशेर मालिक, बाबा मूसली, कल्लू, मजीद प्रधान अंसारी, मास्टर दिलशाद इदरीसी, मोहम्मद अब्बास रंगरेज, नवाब मलिक, जरीफ मालिक, नूर मोहम्मद मालिक, अहसान अंसारी, साकिब सैफी, निसार मेंबर रंगरेज, मुरसलीन ठेकेदार, शमशाद अंसारी डीलर सहित सैकड़ों लोग मौजूद रहे।

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Author: Taja Report

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