मुजफ्फरनगर । पंजाब में लम्बें समय से किसान आंदोलन के चलते अब व्यापारी भी परेशान होने लगे हैं। अशोक बालियान,चेयरमैन,पीजेंट वेलफेयर एसोसिएशन का कहना है कि पंजाब के किसान संगठन तीन किसानों की रिहाई की मांग को लेकर 35 दिन से शम्भु में रेलवे ट्रैक पर बैठे हुए थे, अब वे बिना किसी नतीजे के वहां से हट गए है और अब घोषणा की है कि पंजाब में चुनाव के समय प्रधानमंत्री के आने पर उनका घेराव किया जायेगा। पंजाब में लम्बें चार वर्ष पहले व्यापारी व कारोबारी पंजाब में किसानों का हर संघर्ष में साथ देते थे, लेकिन अब वे किसानों के धरने-प्रदर्शन से तंग आ चुके हैं। काम-धंधा चौपट होने से निराश कारोबारियों ने किसानों को चेतावनी दी थी कि अगर 10 दिन में शंभू से धरना नहीं हटाया, तो वे उनके खिलाफ पंजाब बंद की घोषणा कर देंगे। किसानों के आंदोलन से व्यापारियों को सात से आठ सौ करोड़ का नुकसान हो रहा था। पंजाब के शंभू बॉर्डर पर चल रहे किसान आंदोलन के कारण एक महीने से 80 ट्रेनों का संचालन गड़बड़ाया हुआ था।
किसानों के धरने के कारण वाहनों व ट्रेनों को डायवर्ट कर चलाया जा रहा था।ट्रेन पहले लुधियाना से अंबाला तीन घंटे में पहुंच जाती थी और अब आठ घंटे में भी नहीं पहुंच रही थी। कई ट्रेनों को रद भी कर दिया था।इससे कारोबार बुरी तरह से प्रभावित हुआ है। लुधियाना में पंजाब प्रदेश व्यापार मंडल के प्रदेश महासचिव सुनील मेहरा ने कहा कि किसान आंदोलन की आड़ में कुछ संगठन पंजाब को पटरी से उतारने का काम कर रहे हैं। पंजाब के निर्यात में भी 40 प्रतिशत की गिरावट आई है। समय पर सामान नहीं पहुंचने के कारण विदेशी व्यापारी पंजाबी इकाइयों को ब्लैकलिस्ट कर रहे हैं। पंजाब के कारोबारियों का तर्क है कि एक तरफ किसान नेता अपने आंदोलन से पंजाब की किसानी बचाने की बात करते हैं, वहीं उनके धरनों से कारोबार को जो नुकसान पहुंच रहा है, उस पर मौन हो जाते हैं। गत 13 फरवरी 2024 से किसान पटियाला के शंभू में हरियाणा के साथ लगती सीमा पर नेशनल हाईवे पर धरना लगाए बैठे हैं और 17 अप्रैल 2024 से शंभू में ही रेल ट्रैक भी जाम कर दिया था।
किसान आंदोलन के कारण दूसरे प्रदेशों के व्यापारी पंजाब आने से कतराने लगे हैं। पंजाब की वर्तमान स्थिति को देख ऑर्डर देने से भी हिचक रहे हैं। इससे पंजाब के व्यापार और उद्योग जगत को प्रतिदिन करीब 700-800 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है।व्यापारियों ने एलान किया कि अब अगर किसानों ने जबरन बाजार बंद करने का प्रयास किया तो उनका डटकर मुकाबला करेंगे। इस आन्दोलन को भारतीय किसान यूनियन,सिधुपुर के नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल व् किसान मजदूर संघर्ष समिति के नेता सरवन सिंह पंढेर की अगुवाई में चलाया जा रहा हैं। इन किसान यूनियनों ने एमएसपी की कानूनी गारंटी, सभी फसलों की सरकारी खरीद, ऋण माफी से लेकर किसानों को पेंशन देने तक जैसी मांगों को लेकर ‘दिल्ली चलो’ का अभियान शुरू किया था। किसान संगठनों ने जिस तरह की कुछ मांगें सामने रखी हैं, उससे इस आंदोलन के अंजाम को लेकर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं। इस आन्दोलन के शुरू होने से पहले केंद्र सरकार के वरिष्ठ मंत्रियों ने इन संगठनों के किसान नेताओं से कई बार वार्ता की थी,लेकिन किसान नेताओं के रुख से वार्ता असफल रही थी, इससे साफ जाहिर हो गया था कि किसान नेताओं का उदेश्य चुनाव के दौरान केंद्र सरकार को बदनाम करने का था और इसीलिए वे तभी से शंभु में तम्बू गाड कर आन्दोलनरत है। हमारा किसान संगठनों से कहना है कि उन्हें अपनी बात तर्कपूर्ण ढंग से सरकार के सामने रखनी चाहिए। क्योकि बार-बार के अनावश्यक आन्दोलन से किसान संगठनों की साख गिर रही है।

