नई दिल्ली। केरल में ओलियंडर का फूल खाने से 24 साल की एक नर्स की मौत के बाद केरल की सरकार सख्त होती दिखाई दे रही है और केरल सरकार द्वारा पूरे राज्य के दो हजार मंदिरों में ओलियंडर के फूल के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। आज हम आपको बताएंगे कि ओलियंडर फूल कितना जहरीला है और इससे कैसे बचा जा सके।
ओलियंडर के फूल को लेकर विशेषज्ञों द्वारा अलर्ट रहने की सलाह दी जा चुकी है। इंसान को ओलियंडर का फूल, तना और पत्तियां तीनों ही अलग-अलग नुकसान पहुंचा सकती हैं। रिपोर्ट के मुताबिक ओलियंडर को खतरनाक बनाने का काम इसमें मौजूद ग्लायकोसाइड नामक केमिकल करता है। ग्लायकोसाइड नामक ये केमिकल काफी जहरीला होता है जिसका सीधा असर हार्ट और पेट पर पड़ता है। ऐसा कहा जाता है कि यह केमिकल इंसान के शरीर में पहुंचते ही दिल की धड़कन को धीमा कर देता है जिसके बाद इंसान की मौत हो जाती है। गुलाबी रंग के इस फूल को खाना ही नहीं इसका रस भी चेहरे पर चकत्ते पैदा कर सकता है। इसकी पत्ती को चबाना या फिर बीज को खाने से आपकी जान जा सकती है। ओलियंडर का फूल हार्ट और स्किन के अलावा शरीर के कई हिस्सों को गहरा नुकसान पहुंचा सकता है। Oleander का सेवन करने से आंखों की रोशनी का चले जाना, डायरिया, भूख न लगना, पेट में दर्द होना, डिप्रेशन, बेचैनी के कारण कुछ समझ न आना, बेहोशी, और सिरदर्द जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। अमेरिका के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ की रिपोर्ट के मुताबिक ओलियंडर का इस्तेमाल कई बीमारियों में दवाओं के तौर पर भी किया जाता है। इसमें अस्थमा, मिर्गी, पीरियड्स्, मलेरिया, रिंगवर्म आदि शामिल है। ओलियंडर का सीधा इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है क्योंकि इसमें रसायन मौजूद होता है जो बेहद जहरीला होता है। विशेषज्ञों का कहना है कि ओलियंडर का इस्तेमाल कई बीमारियों में जरूर किया जाता है लेकिन इसका ये मतलब बिल्कुल नहीं है कि आप डॉक्टर से बगैर सलाह लिए इसको उपयोग में लाएं।
Oleander के पौधे का उपयोग जहरीला होने के कारण हर्बल मेडिसिन के तौर पर 15वीं शताब्दी से बहुत ध्यान रखते हुए किया जा रहा है। दक्षिण एशिया के कुछ देशों में ओलियंडर का इस्तेमाल आत्महत्या करने के लिए भी किया जाता रहा है वहीं श्रीलंका में भी यही चलन देखा जा चुका है। गुलाबी रंग का ये फूल अपनी खूबसूरती के लिए काफी मशहूर है। इसका इस्तेमाल सबसे ज्यादा मंदिरों में पूजा करने के लिए किया जाता है। जिसके कारण इस फूल को लेकर सबसे पहले मंदिरों में ही बैन लगाया गया है। जितना हो सके इस पौधे से दूर ही रहें।

