Skip to main content

TR NEWS UP-UK

बिना कोई मुहूर्त देखे शुभ कार्य एवं विवाह के लिए अक्षय तृतीया अत्यन्त श्रेष्ठ :- पं० विनय शर्मा 

मुजफ्फरनगर। भोपा रोड पर स्थित धार्मिक संस्थान विष्णुलोक के संचालक रत्न रुद्राक्ष विशेषज्ञ पंडित विनय शर्मा ने बताया कि इस वर्ष अक्षय तृतीया (परशुराम जयन्ती) दिनांक 10 मई 2024 दिन शुक्रवार को है । वैशाख मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया का विशेष महत्व है । इस तिथि को अक्षय तृतीया या आखा तृतीया अथवा आखा तीज भी कहते है । इस दिन कोई भी मांगलिक कार्य विवाह, उत्सव आदि बिना कोई मुहूर्त देखे सम्पन्न किया जाता है । क्यों कि भारती काल गणना के अनुसार अक्षय तृतीया स्वयं सिद्ध अभिजीत मुहूर्त है। अक्षय तृतीया वाले दिन त्रेतायुग का भी प्रारम्भ हुआ था और अक्षय तृतीया को ही भगवान विष्णु के छठें अवतार के रूप में भगवान परशुराम का भी जन्म हुआ था । इसलिए इसकों युगादि तिथि एवं परशुराम तिथि भी कहते है । अक्षय का शाब्दिक अर्थ है कि कभी क्षय (नाश) न हो अथवा जो स्थाई रहे । अतः इस दिन किये हुए पुण्य कार्य, त्याग, दान-दक्षिणा, जप-तप, होम-हवन, अक्षय, अविनाशी तथा अनन्त फलदायक हो जाते है। इस दिन अक्षय ग्रन्थ गीता का पठन-पाठन, मनन एवं स्वाध्याय करके हम जीवन की पूर्णता को पा सकते है। विष्णु धर्मसूत्र, मत्स्य पुराण, नारद पुराण, भविष्य पुराण आदि में स्पष्ट उल्लेख है कि इस तिथि को किये गये सभी कर्मो का फल अक्षय हो जाता है। इस दिन पितरों को तिल से तर्पण, जल से तर्पण, पिण्ड दान भी इस विश्वास से किया जाता है कि इसका फल अक्षय हो जाता है। इस दिन जल से भरा कलश, पंखा, खडाऊ, गऊ, भूमि, स्वर्ण आदि का दान अधिक पुण्य दाता एवं लाभदायक माना जाता है। इस दिन अस्त्र-शस्त्र, वस्त्र, आभूषण आदि बनवाये, खरीदे और धारण किये जाते है। नयी भूमि का क्रय, भवन, संस्था आदि व गृह प्रवेश इस तिथि में कर लिया जाये तो अत्यन्त श्रेष्ठ रहता है। समूचे भारत में भगवान परशुराम की जयन्ती धूमधाम से मनायी जाती है। 

Taja Report
Author: Taja Report

Facebook
Twitter
LinkedIn
WhatsApp

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *