अभिषेक वालिया
मुजफ्फरनगर । लोकसभा चुनाव की तैयारी प्रशासन द्वारा पूरी कर ली गई है। 19 अप्रैल को पहले चरण के मतदान में मुजफ्फरनगर में होने वाले चुनाव में प्रत्याशियों की किस्मत ईवीएम मशीन में बंद हो जाएंगे। वहीं अभी भी भाजपा से प्रत्याशी संजीव बालियान समाज में कई जातियों की नाराजगी को झेल रहे हैं, तो वहीं दूसरी ओर सपा गठबंधन प्रत्याशी हरेंद्र मलिक और बसपा प्रत्याशी दारा सिंह प्रजापति दलित पिछड़ा और मुसलमानों को लेकर अपना अपना दावा पेश कर रहे हैं। जिले में भाजपा की हार जीत का समीकरण दलित और मुस्लिम वोट तय करेंगे। अगर मुस्लिम और दलित एक साथ बसपा पर पड़ता है तो भाजपा की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। क्योंकि समाजवादी पार्टी गठबंधन से हरेंद्र मलिक 2009 के चुनाव की तरह ही इस बार भी जाट समाज व अन्य समाज की वोट काटने का काम करेंगे। जिस तरह उनके द्वारा 2009 में भाजपा रालोद गठबंधन से प्रत्याशी अनुराधा चौधरी को हरवा कर कादिर राणा को बसपा के टिकट से मुजफ्फरनगर में सांसद बनवाया था। वही स्थिति आज भी 2024 के चुनाव में साफ तौर पर नजर आ रही है। दलित मुस्लिम गठबंधन ही भाजपा के प्रत्याशी की किस्मत का फैसला करेंगे या हरेंन्द्र मलिक और दारा सिंह प्रजापति मुस्लिम वोटों के बल पर आगे निकलने में कामयाब होंगे।


