मुजफ्फरनगर । श्री रामलीला समिति नई मंडी के शताब्दी वर्ष महोत्सव के तहत आयोजित श्री रामलीला महोत्सव में बीती रात दशरथ मरण, शूर्पणखा नासिका भंग और सीता हरण जैसे मर्मस्पर्शी व ऐतिहासिक प्रसंगों का अत्यंत जीवंत और मनोहारी मंचन किया गया। कलाकारों के उत्कृष्ट अभिनय और भावपूर्ण संवादों ने वहां उपस्थित विशाल जनसमुदाय को भाव-विभोर कर दिया।कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पधारे समाजसेवी बिजेंदर अग्रवाल रानूजी ने दीप प्रज्वलित कर रात्रि की लीला का शुभारंभ किया। इस अवसर पर जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि बिजेंदर अग्रवाल रानूजी ने कहा कि, “सीता हरण का प्रसंग हमें यह संदेश देता है कि जब व्यक्ति मर्यादाओं की लक्ष्मण रेखा को लांघता है और बाहरी चकाचौंध (सोने के हिरण रूपी मोह) के जाल में फंस जाता है, तो उसे संकटों का सामना करना पड़ता है। यह प्रसंग हमें सिखाता है कि जीवन में कितनी भी विपरीत परिस्थितियां आएं, हमें हमेशा संयम, विवेक और अपनी नैतिक मर्यादाओं के भीतर रहकर ही निर्णय लेने चाहिए, क्योंकि मर्यादा का उल्लंघन ही विनाश का कारण बनता है।”लीला मंचन के दौरान कलाकारों ने दिखाया कि किस प्रकार लक्ष्मण जी द्वारा शूर्पणखा की नाक काटी जाती है और उसके बाद प्रतिशोध की अग्नि में जल रहा रावण छल से माता सीता का हरण कर लेता है। राजा दशरथ के पुत्र वियोग में प्राण त्यागने के दृश्य को देखकर पाण्डाल में मौजूद कई दर्शकों की आँखें नम हो गईं। शताब्दी वर्ष के इस भव्य आयोजन को सफल बनाने में श्री रामलीला समिति के अध्यक्ष संजय मित्तल, मंत्री अशोक गर्ग, कोषाध्यक्ष आदित्य भरतिया, सभी कार्यकर्ता और नगर के गणमान्य लोग सक्रिय रूप से जुटे हुए हैं।


