मुजफ्फरनगर। जूना अखाङा के महामंडलेश्वर संत उमाकांतानंद सरस्वती जी महाराज ने कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम जी मर्यादा और कृतित्व सिखाने के लिए आते हैं। उन्होंने कहा कि बच्चों के कान नहीं होते आंख होती हैं। आप जो व्यवहार करेंगे वही सीखेंगे।
नई मंडी रामलीला भवन में आयोजित भगवान श्री राम कथा में आज अहिल्या उद्धार, जनकपुरी और धनुष यज्ञ की लीला का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि भगवान राम बाल्यावस्था से ही सोलह संस्कारों से पले। आज बच्चे जिद में बिगड रहे हैं क्योंकि उन्हें संस्कार नहीं मिल पाए रहे। अपने आसपास के वातावरण में जो वह देख रहे हैं वही उनके मन मन-मस्तिष्क में भर रहा है। भगवान राम के आदर्श उन्हें सही मार्ग दिखा सकते हैं। उन्होंने कहा कि केवल भक्ति से ज्ञान प्राप्त नहीं हो सकता। ज्ञान के लिए भक्ति को आचरण में उतारना जरूरी है। उन्होंने कहा कि लौकिक रूप क्षणिक है। ज्ञान से मिला रूप अलौकिक है।
उन्होंने कहा कि ज्ञान जानना मात्र नहीं अनुभव करना है। अनुभव के बिना ज्ञान शून्य है। स्वामी जी ने कहा कि समय घड़ी से नहीं अनुभूति से मापा जाता है। सुख में वह क्षणिक लगता है और पता ही नहीं चलता कि समय कब निकल गया वहीं दुख में बहुत दीर्घ हो जाता है। उन्होंने कहा कि जैसी दृष्टि वैसी सृष्टि होती है। इससे ही परिवार समाज में एक दूसरे को देखने का नजरिया अलग होने से टकराव और असहमति होती है। जो सम दृष्टि रखता है वही साधु है। इसलिए हमेशा साधु समझ से बाहर होता है। दुनिया में जितने संत हुए उन्हें हमेशा तिरस्कार झेलना पड़ा। उन्होंने कहा कि दृष्टि कोण बदले तो समझ भी बदल जाएगी। यहीं से जीवन में परिवर्तन प्रारंभ हो जाएगा। कथा का श्रवण करते वरिष्ठ व्यापारी हरिशंकर मुंदडा, उद्यमी राकेश बिंदल, सचिन बिंदल,श्याम सिंह सैनी, सुरेंद्र अग्रवाल, अमरीश कुमार बघरे वाले, सुनील सिंघल मावे वाले, भाजपा नेता विशाल गर्ग, रजत गोयल, वेद प्रकाश गोयल, विनोद संगल, कमेटी के संरक्षक भीम सेन कंसल, अध्यक्ष संजय मित्तल, और मंत्री अशोक गर्ग, कोषाध्यक्ष आदित्य भरतिया, ब्रज गोपाल छारिया, कैलाश चंद ज्ञानी, ऋषिराज राही, राजीव अग्रवाल, अभिषेक कुच्छल, संजय जिंदल काका, प्रवीण कुमार,एडवोकेट विवेक गर्ग, राजेश गोयल, उपेंद्र मित्तल, विदित गुप्ता, अनिल गोयल, सुभाष गुप्ता, नरेश गुप्ता, मुकेश गुप्ता एवं उपस्थित श्रद्धालुगण |


