श्रीमती कांति देवी जैन स्मृति सातवी व्याख्यानमाला
नई दिल्ली। त्रिदिवसीय श्रीमती कान्तिदेवी जैन स्मृति सातवी व्याख्यानमाला के प्रथम दिन पूर्व राज्यपाल एवं उत्तराखंड के मुख्यमंत्री रहे भगत सिंह कोशियारी ने कहा कि भारत सदियों से देश-दुनिया को शांति का संदेश दे रहा है। यही संदेश संघ का भी है, इसे हाल ही में अपने विदेश दौरे में सरसंघचालक मोहन भागवत जी ने सिद्ध भी कर दिया है। अगर सब लोग भारतीय दर्शन और संघ के मार्ग पर चलेंगे तो कलयुग से सतयुग की तरफ बढ़ेंगे और विश्व में भी शांति रहेगी।
व्याख्यानमाला की थीम *युद्ध से संवाद तक: सहअस्तिव का भारतीय दर्शन एवं विश्व स्तर पर संघ की उपस्थिति* पर बोलते हुए मुख्य अतिथि श्री कोशियारी ने कहा कि भारतीय साधु संतों ने हमेशा से शांति का पाठ पढ़ाया है। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने भी कहा था रार नही ठानूँगा। देश मे ओम शांति, सर्वस्व शांति का जाप किया जाता है। आज कई देशों में संघर्ष चल रहा है। युद्ध नही संवाद होना चाहिए। इसके लिए भारत दर्शन जरूरी है। अगर लोग भारत दर्शन और संघ के मार्ग पर चलेंगे तो कलयुग से सतयुग की तरफ बढ़ेंगे।
हिन्दू विश्वविद्यालय यूके से डॉ राम वैद्य ने बोलते हुए कहा कि भारत की परंपरा सदैव विश्व बंधुत्व की रही है। हमारे संस्कार रहे हैं कि सभी सुखी रहे, सब शांति से रहें। यद्यपि सभी लोग अच्छे नही हो सकते लेकिन हमें खुद को अच्छा बनाना होगा। कोई संघ या कोई संगठन एक साथ रहे या नहीं मगर समाज को एक रहना चाहिए। वैश्विक शांति के लिए भारत ने जो रास्ते दिखाए हैं, उन पर चलने से ही आगे बढ़ सकते हैं। हम सब की जिम्मेदारी है कि खुद भी शांति से रहे और पड़ोसी को भी शांति से रहने दें।
कार्यक्रम अध्यक्ष पूर्व रक्षा सचिव, वरिष्ठ आईएएस डॉ योगेन्द्र नारायण ने कहा कि हम अपने मन को शांत रखे। वहीं से सब शुरू होता है। चाहे प्रथम विश्व युद्ध हो या द्वितीय विश्वयुद्ध हो उन सबका समाधान संवाद से ही हुआ है। शांति संवाद के लिए ही यूनाइटेड नेशन का गठन हुआ। कुदरती नीति है कि हर युद्घ के बाद संवाद होकर शांति आती है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने हमेशा ही शांति की बात की है। अब ब्रिक्स सम्मेलन में विरोधी देशों को एकसाथ बैठाकर डिक्लेरेशन कराया। भारत समय-समय पर योगदान देता रहता है। अब नेपाल को भी मदद भेजी। हमारी फिलोशफी है “हम में आप” है। खुद को बलवान व नंबर 1 साबित करने के लिए कब्जे की लड़ाई चल रही है। ये हमें समाप्त करना है। ये रोल संघ अदा कर सकता है। सरसंघचालक मोहन भागवत ने अमेरिका व अन्य देशों में सिद्ध कर दिया है कि उसकी सौच है सब बराबर रहे। भारतीय दर्शन शास्त्र को जितना फैला सके संसार उतना ही लाभान्वित होगा। समाज में शांति होगी तो राष्ट्र में शांति होगी और राष्ट्र में शांति होगी तो विश्व में शांति होगी।
कार्यक्रम में पूर्व अतिरिक्त मुख्य सचिव पंजाब के शिवा प्रसाद, आईएएस के शिवा प्रसाद, राजीव रंजन चीन, डॉ राम प्रसाद भट्ट जर्मनी ने भी युद्ध की बजाय संवाद पर बल दिया। प्रस्तावना एवं स्वागत भाषण चाणक्य वार्ता के संपादक डॉ अमित जैन ने दिया तो प्रसिद्ध नृत्य गुरु शुभदा वराडकर ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। जबकि संचालन अभिषेक त्रिपाठी ने किया।

