👉 वास्तु शास्त्र में भगवान गणेश की प्रतिमा की स्थापना, पूजा एवं आवासीय शुद्धिकरण का विशेष महत्व बताया गया है।
👉 इसी कारण वास्तु दोषों के निवारण हेतु दोषयुक्त स्थान पर गणेश जी की प्रतिमा स्थापित करने का विधान माना जाता है।
*वास्तु शास्त्र में गणेश जी का विशेष स्थान*
👉 वास्तु शास्त्र के अनुसार किसी भी भूमि या भवन के अधिष्ठाता देवता वास्तु देव माने गए हैं।
👉 पौराणिक मान्यताओं के अनुसार वास्तु देव की उत्पत्ति भगवान शिव के पसीने से हुई थी।
👉 इस दृष्टि से वास्तु देव और भगवान गणेश दोनों भगवान शिव से संबंधित दिव्य शक्तियाँ हैं।
👉 हर शुभ कार्य एवं पूजन में सर्वप्रथम भगवान गणेश की पूजा की जाती है, क्योंकि वे विघ्नहर्ता एवं मंगलकर्ता माने जाते हैं।
👉 प्रत्येक व्यक्ति चाहता है कि उसके घर, दुकान, कार्यालय, व्यवसाय या फैक्ट्री में किसी प्रकार का विघ्न, बाधा या अशांति न आए।
👉 इसी उद्देश्य से मुख्य प्रवेश द्वार के अंदर की ओर भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करने की परंपरा प्रचलित है।
*गणेश प्रतिमा की स्थापना से जुड़े महत्वपूर्ण नियम*
➡ गणेश जी की प्रतिमा का मुख घर के भीतर की ओर होना चाहिए।
➡ मुख्य द्वार पर गणेश जी की प्रतिमा इस प्रकार स्थापित करें कि उनकी पीठ घर की ओर न रहे।
➡ परंपरागत मान्यता है कि भगवान गणेश की दृष्टि शुभता, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है, जबकि उनकी पीठ की ओर दरिद्रता का वास माना गया है। इसलिए स्थापना करते समय विशेष सावधानी रखनी चाहिए।
👉 *श्वेत आर्क गणेश का महत्व*
👉 भगवान गणेश की प्रतिमाएँ अनेक प्रकार की धातुओं, पत्थरों एवं अन्य पदार्थों से बनाई जाती हैं, जिनके अपने-अपने धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व बताए गए हैं। इनमें श्वेत आर्क (सफेद आक) से निर्मित वास्तु गणेश को विशेष रूप से शुभ माना जाता है।
👉 हिंदू परंपरा में श्वेत आर्क को भगवान गणेश का स्वरूप माना गया है।
👉 यह पौधा औषधीय गुणों के साथ-साथ धार्मिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
👉 मान्यता है कि श्वेत आर्क की जड़ में प्राकृतिक रूप से भगवान गणेश जैसी आकृति दिखाई देती है।
👉 जड़ के दोनों ओर निकली शाखाएँ गणेश जी के दांतों के समान प्रतीत होती हैं और उसका अग्रभाग गणेश स्वरूप का आभास कराता है।
👉 इसी कारण श्वेत आर्क गणेश की पूजा एवं स्थापना को विशेष फलदायी माना जाता है।
👉 भगवान गणेश की कृपा, श्रद्धा, सकारात्मक विचार और शुभ कर्मों के साथ घर में सुख, शांति एवं मंगलमय वातावरण स्थापित करने का प्रयास करना चाहिए।

